चेन्नई। उम्र 36 साल, भारतीय टीम से लंबे समय से बाहर और करियर के भविष्य को लेकर लगातार सवाल। इन सबके बीच तेज गेंदबाज **मोहम्मद शमी** ने अपने इरादे साफ कर दिए हैं। शमी फिलहाल रुकने या अपने करियर को खत्म मानने के मूड में नहीं हैं। दलीप ट्रॉफी में ईस्ट जोन की खिताबी जीत के बाद उन्होंने कहा कि उनका काम मेहनत करते रहना है और वह आज भी खुद को बेहतर बनाने की कोशिश करते हैं। उनके मुताबिक क्रिकेट में इतने वर्षों का अनुभव होने के बावजूद सीखना बंद कर देना गलत होगा।
शमी का यह बयान ऐसे समय आया है जब उनकी भारतीय टीम में वापसी को लेकर बहस तेज है। दलीप ट्रॉफी में उन्होंने अपना 100वां फर्स्ट क्लास मुकाबला खेला और फाइनल में अपनी अनुभवी गेंदबाजी से एक बार फिर दिखाया कि उनमें लंबा स्पेल डालने और बल्लेबाजों को परेशान करने की क्षमता अभी बाकी है। पूर्व भारतीय गेंदबाजी कोच भरत अरुण तक कह चुके हैं कि चयनकर्ताओं को शमी के लिए भारतीय टीम के दरवाजे बंद नहीं करने चाहिए।
दलीप ट्रॉफी जीतने के बाद शमी ने क्या कहा?
ईस्ट जोन ने दलीप ट्रॉफी के फाइनल में साउथ जोन को मात देकर खिताब अपने नाम किया। मुकाबला पांचवें दिन समाप्त हुआ और जीत के बाद शमी ने अपने करियर तथा आगे की तैयारी को लेकर खुलकर बात की।
उनका जोर किसी चयन या वापसी की घोषणा पर नहीं बल्कि अपनी मेहनत पर था।
शमी का कहना था कि खिलाड़ी के हाथ में सबसे महत्वपूर्ण चीज उसकी तैयारी और मेहनत है। बाकी फैसले उसके नियंत्रण से बाहर होते हैं। वह मैदान पर उतरकर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने और लगातार खुद में सुधार करने पर ध्यान देना चाहते हैं।
यह रवैया इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि शमी के अंतरराष्ट्रीय भविष्य को लेकर पिछले काफी समय से सवाल उठते रहे हैं।
'हर दिन कुछ सीखना जरूरी'
शमी ने अपने लंबे करियर के बावजूद खुद को आज भी एक विद्यार्थी बताया।
उनके मुताबिक क्रिकेट ऐसा खेल है जिसमें खिलाड़ी हर दिन कुछ नया सीख सकता है। चाहे किसी खिलाड़ी ने कितना भी अनुभव हासिल कर लिया हो, अगर वह सीखने की कोशिश छोड़ देता है तो यह सही सोच नहीं है।
शमी का मानना है कि खेल लगातार बदलता रहता है। बल्लेबाज नई तकनीक अपनाते हैं, गेंदबाज नई विविधता तैयार करते हैं और परिस्थितियों के अनुसार रणनीति भी बदलती रहती है।
ऐसे में अनुभवी खिलाड़ी को भी अपने खेल को अगले स्तर तक ले जाने की कोशिश करते रहना चाहिए। यही सोच उनके मौजूदा करियर का आधार दिखाई देती है।
36 की उम्र में भी वही मेहनत
शमी के लिए मौजूदा दौर आसान नहीं रहा है।
उन्होंने भारतीय टीम के लिए अपना आखिरी अंतरराष्ट्रीय मुकाबला मार्च 2025 में चैंपियंस ट्रॉफी के दौरान खेला था। इसके बाद वह राष्ट्रीय टीम से बाहर हैं। इसके बावजूद घरेलू क्रिकेट में लगातार खेलकर उन्होंने खुद को चयन की दौड़ में बनाए रखने की कोशिश की है।
कई वरिष्ठ खिलाड़ी इस उम्र में अपने कार्यभार को कम करना शुरू कर देते हैं, लेकिन शमी घरेलू क्रिकेट में लंबे स्पेल डालकर अपनी फिटनेस और मैच तैयारियों को साबित करने में जुटे हैं।
दलीप ट्रॉफी में उनकी मौजूदगी इसी कोशिश का हिस्सा रही।
100वां फर्स्ट क्लास मैच बना खास
दलीप ट्रॉफी का फाइनल शमी के करियर में एक और बड़ी उपलब्धि लेकर आया। यह उनका **100वां फर्स्ट क्लास मुकाबला** था।
फाइनल से पहले क्रिकेट एसोसिएशन ऑफ बंगाल ने इस उपलब्धि पर शमी को सम्मानित भी किया था। ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन भी इस मौके पर मौजूद रहे।
100 फर्स्ट क्लास मुकाबले किसी तेज गेंदबाज के लिए अपने आप में बड़ी उपलब्धि हैं।
तेज गेंदबाजी शरीर पर काफी दबाव डालती है और शमी अपने करियर में कई गंभीर चोटों और सर्जरी से गुजर चुके हैं। इसके बावजूद उनका घरेलू क्रिकेट में लौटकर 100 फर्स्ट क्लास मैच पूरे करना उनके लंबे करियर को दिखाता है।
फाइनल में दिखी पुरानी धार
दलीप ट्रॉफी फाइनल में साउथ जोन के सामने ईस्ट जोन ने पहली पारी में विशाल 708 रन बनाए थे।
इसके बाद गेंदबाजी की बारी आई तो शमी और मुकेश कुमार की जोड़ी ने साउथ जोन के बल्लेबाजों को खुलकर रन बनाने का मौका नहीं दिया।
फाइनल के तीसरे दिन शमी की गेंदबाजी खास तौर पर प्रभावशाली रही। उनकी लाइन और लेंथ ने बल्लेबाजों पर लगातार दबाव बनाए रखा और साउथ जोन छह विकेट पर 242 रन तक ही पहुंच पाया था।
यह प्रदर्शन शमी के लिए इसलिए महत्वपूर्ण था क्योंकि उनकी फिटनेस और लंबे स्पेल डालने की क्षमता को लेकर लगातार सवाल किए जाते रहे हैं।
ईशान किशन ने भी कहा- अभी वही भूख
ईस्ट जोन के कप्तान ईशान किशन ने भी शमी की वापसी की इच्छा को करीब से महसूस किया है।
फाइनल से पहले किशन ने कहा था कि शमी के अंदर भारतीय टीम में वापस आने की भूख अभी भी दिखाई देती है। उनके मुताबिक उम्र केवल एक संख्या है और अनुभवी तेज गेंदबाज जिस ऊर्जा तथा समर्पण के साथ अभ्यास और मुकाबले में उतरते हैं, उससे उनकी वापसी की इच्छा साफ नजर आती है।
ईशान ने शमी के अनुभव को टीम के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।
एक युवा कप्तान के लिए शमी जैसा अनुभवी गेंदबाज मैदान पर अतिरिक्त मदद देता है। गेंदबाजी की रणनीति से लेकर मैच की परिस्थितियों को समझने तक उनका अनुभव बाकी खिलाड़ियों के काम आता है।
भरत अरुण ने चयनकर्ताओं पर उठाए सवाल
भारतीय टीम के पूर्व गेंदबाजी कोच भरत अरुण ने भी शमी के समर्थन में खुलकर बयान दिया है।
उनका मानना है कि मौजूदा चयन समिति को अनुभवी तेज गेंदबाज के लिए दरवाजे पूरी तरह बंद नहीं करने चाहिए।
भरत अरुण लंबे समय तक भारतीय टीम के साथ काम कर चुके हैं और उन्होंने शमी को करीब से गेंदबाजी करते देखा है। उनका मानना है कि अगर शमी घरेलू क्रिकेट में फिट हैं और प्रदर्शन कर रहे हैं तो उनके अनुभव को नजरअंदाज करना जल्दबाजी हो सकती है।
यह बयान शमी की वापसी को लेकर चल रही चर्चा को और मजबूत करता है।
टीम इंडिया से क्यों बाहर हैं शमी?
शमी का करियर पिछले कुछ वर्षों में चोटों से काफी प्रभावित हुआ है।
2023 वनडे विश्व कप में वह भारत के सबसे सफल गेंदबाज रहे थे। उन्होंने टूर्नामेंट में **24 विकेट** हासिल किए और सबसे ज्यादा विकेट लेने वाले गेंदबाज बने। इसके बाद चोट और सर्जरी के कारण उन्हें लंबे समय तक मैदान से बाहर रहना पड़ा।
वापसी के बाद भी उनका अंतरराष्ट्रीय करियर पहले जैसी निरंतरता हासिल नहीं कर सका। मार्च 2025 की चैंपियंस ट्रॉफी के बाद उन्हें भारतीय टीम में जगह नहीं मिली।
इसके बावजूद शमी ने घरेलू क्रिकेट खेलना जारी रखा।
यही बात उनकी वापसी की उम्मीद को जिंदा रखती है।
अब अगला लक्ष्य क्या?
शमी के सामने सबसे बड़ी चुनौती केवल विकेट लेना नहीं बल्कि चयनकर्ताओं को यह भरोसा दिलाना भी है कि उनका शरीर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट का दबाव संभाल सकता है।
तेज गेंदबाज के लिए 36 साल की उम्र में फिटनेस सबसे महत्वपूर्ण मुद्दा बन जाती है।
भारत के पास मौजूदा समय में कई युवा तेज गेंदबाज विकल्प मौजूद हैं। ऐसे में शमी को टीम में वापस आने के लिए केवल अनुभव के आधार पर नहीं बल्कि लगातार प्रदर्शन और फिटनेस के जरिए अपना दावा मजबूत करना होगा।
दलीप ट्रॉफी में उनका प्रदर्शन इस दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।
चयन नहीं मेहनत शमी के हाथ में
शमी की मौजूदा सोच का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा यही है कि वह चयन को लेकर ज्यादा चिंता नहीं करना चाहते।
भारतीय टीम में किसे चुना जाएगा, यह चयनकर्ताओं का फैसला है। खिलाड़ी के नियंत्रण में उसका अभ्यास, फिटनेस और प्रदर्शन है।
इसीलिए शमी का कहना है कि उनका काम मेहनत करना है।
उन्होंने अपने लंबे करियर में कई बार चोट के बाद वापसी की है और मौजूदा दौर को भी उसी चुनौती की तरह देख रहे हैं।
क्या वनडे टीम में खुल सकता है रास्ता?
शमी की भारतीय टीम में वापसी के लिए वनडे क्रिकेट को संभावित रास्ता माना जा रहा है। घरेलू क्रिकेट में उनके प्रदर्शन पर चयनकर्ताओं की नजर होने की रिपोर्टें हैं और आने वाली वनडे सीरीज में उनके नाम पर चर्चा होने की संभावना जताई जा रही है। हालांकि अभी उनकी वापसी की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए किसी संभावित सीरीज को उनकी निश्चित वापसी मानना जल्दबाजी होगी।
लेकिन एक बात स्पष्ट है कि घरेलू क्रिकेट में लगातार विकेट और फिटनेस दिखाकर शमी चयनकर्ताओं पर दबाव जरूर बना सकते हैं।
2027 विश्व कप भी बड़ा लक्ष्य
शमी के करियर का अगला बड़ा अंतरराष्ट्रीय लक्ष्य 2027 का वनडे विश्व कप माना जा रहा है।
2023 विश्व कप में उन्होंने जिस तरह गेंदबाजी की थी, उसके बाद अनुभव के लिहाज से वह अभी भी भारत के सबसे सफल सक्रिय तेज गेंदबाजों में शामिल हैं।
लेकिन 2027 तक पहुंचने के लिए उन्हें लगातार फिट रहना होगा और घरेलू स्तर पर अपना प्रदर्शन बनाए रखना होगा।
यही वजह है कि शमी फिलहाल भविष्य के बड़े लक्ष्य की चर्चा से ज्यादा रोज की मेहनत पर जोर दे रहे हैं।
शमी का संदेश साफ- सीखना बंद नहीं करूंगा
दलीप ट्रॉफी की जीत के बाद शमी के बयान से उनके करियर की मौजूदा दिशा काफी हद तक साफ हो जाती है।
वह यह साबित करने की कोशिश कर रहे हैं कि **36 साल की उम्र और 100 फर्स्ट क्लास मुकाबलों के अनुभव के बावजूद उनके लिए सीखने की प्रक्रिया खत्म नहीं हुई है।**
उनकी नजर अपने खेल को और बेहतर करने तथा अगले स्तर तक पहुंचाने पर है।
भारतीय टीम में वापसी होगी या नहीं, इसका फैसला चयनकर्ताओं को करना है। लेकिन शमी ने घरेलू क्रिकेट में उतरकर यह जरूर दिखाया है कि उन्होंने खुद अपने अंतरराष्ट्रीय करियर पर पूर्णविराम नहीं लगाया है।
दलीप ट्रॉफी की सफलता, 100वां फर्स्ट क्लास मैच और प्रभावशाली गेंदबाजी के बाद अब नजर अगले चयन पर होगी। शमी के लिए रास्ता कठिन जरूर है, लेकिन उनका संदेश साफ है—**मेहनत करते रहना और हर दिन सीखना ही उनके हाथ में है; अनुभवी होने के बाद भी अगर कोई खिलाड़ी सीखना बंद कर दे तो वह गलत है।