स्पोर्ट: भारतीय क्रिकेट टीम को आखिरकार श्रेयस अय्यर की कप्तानी में पहली टी20 इंटरनेशनल जीत नसीब हो गई। जिम्बाब्वे के खिलाफ खेले गए पहले टी20 मुकाबले में भारत ने शानदार प्रदर्शन करते हुए मेजबान टीम को सात विकेट से मात दी। करीब सात हफ्तों और लगातार सात टी20 इंटरनेशनल मुकाबलों के बाद भारतीय टीम ने जीत का स्वाद चखा। इस जीत ने न सिर्फ कप्तान श्रेयस अय्यर को राहत दी, बल्कि टीम की कई कमजोरियों को भी उजागर करने के बाद उनका समाधान दिखाया।
मुंबई से शुरू हुई श्रेयस अय्यर की कप्तानी यात्रा को आखिरकार हरारे में पहली सफलता मिली। इससे पहले भारतीय टीम का प्रदर्शन निराशाजनक रहा था। आयरलैंड के खिलाफ टी20 सीरीज में हार और इंग्लैंड दौरे पर लगातार खराब प्रदर्शन ने टीम की रणनीति पर सवाल खड़े कर दिए थे। कई मुकाबलों में भारतीय टीम बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों विभागों में संघर्ष करती नजर आई थी।
जिम्बाब्वे के खिलाफ मुकाबले में टीम इंडिया ने अपनी रणनीति में बड़ा बदलाव किया। लगातार ज्यादा ऑलराउंडरों को खिलाने के प्रयोग के कारण टीम का संतुलन बिगड़ रहा था। लेकिन इस मुकाबले में भारतीय टीम ने विशेषज्ञ खिलाड़ियों को मौका दिया और इसका फायदा तुरंत देखने को मिला।
गेंदबाजी में भारत ने तीन तेज गेंदबाजों के साथ मैदान पर उतरने का फैसला किया। राजस्थान के अशोक शर्मा को डेब्यू का मौका मिला, जबकि मयंक यादव और प्रिंस यादव ने तेज गेंदबाजी की जिम्मेदारी संभाली। रवि बिश्नोई टीम के एकमात्र विशेषज्ञ स्पिनर रहे। वहीं शिवम दुबे को ऑलराउंडर के रूप में शामिल किया गया और उन्होंने पूरे चार ओवर गेंदबाजी की। इस बदलाव का असर साफ दिखा और भारतीय गेंदबाजों ने जिम्बाब्वे को बड़ा स्कोर बनाने से रोक दिया।
टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने उतरी भारतीय टीम ने जिम्बाब्वे को निर्धारित 20 ओवर में सात विकेट पर सिर्फ 125 रन तक सीमित कर दिया। जिम्बाब्वे की ओर से वेस्ली मदेवेरे ने 39 रन की सबसे बड़ी पारी खेली, लेकिन बाकी बल्लेबाज भारतीय गेंदबाजों के सामने टिक नहीं सके। भारत की ओर से मयंक यादव ने शानदार गेंदबाजी करते हुए चार ओवर में सिर्फ 18 रन देकर दो विकेट झटके। उन्हें उनके बेहतरीन प्रदर्शन के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया। प्रिंस यादव ने भी दो विकेट हासिल किए, जबकि शिवम दुबे और रवि बिश्नोई को एक-एक सफलता मिली।
लक्ष्य का पीछा करने उतरी भारतीय टीम को युवा बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने तूफानी शुरुआत दी। उन्होंने महज 19 गेंदों में 50 रन बनाकर इतिहास रच दिया। वैभव अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में अर्धशतक लगाने वाले सबसे युवा खिलाड़ियों में शामिल हो गए। उनकी आक्रामक बल्लेबाजी ने जिम्बाब्वे के गेंदबाजों पर दबाव बना दिया।
वैभव ने अपनी पारी में चार छक्के और चार चौके लगाए। उन्होंने दूसरे ओवर से ही आक्रामक रुख अपनाया और जिम्बाब्वे के गेंदबाज रिचर्ड एनगरावा के ओवर में 19 रन बटोरे। इसके बाद भी उन्होंने लगातार बड़े शॉट खेलते हुए टीम को तेज शुरुआत दिलाई। हालांकि सातवें ओवर में वह 50 रन बनाकर आउट हो गए।
वैभव के आउट होने के बाद भारतीय पारी को इशान किशन और कप्तान श्रेयस अय्यर ने संभाला। इशान किशन ने 24 गेंदों में 35 रन बनाए, जबकि श्रेयस अय्यर ने 24 गेंदों में नाबाद 28 रन की पारी खेलकर टीम को जीत तक पहुंचाया। तिलक वर्मा ने भी नाबाद छह रन का योगदान दिया। भारत ने सात विकेट शेष रहते मुकाबला अपने नाम कर लिया।
इस जीत से भारतीय टीम को कई सकारात्मक संकेत मिले हैं। खासतौर पर तेज गेंदबाजी विभाग की समस्या काफी हद तक हल होती दिखाई दी। मयंक यादव और प्रिंस यादव जैसे युवा तेज गेंदबाजों ने अपनी क्षमता दिखाई, जबकि वैभव सूर्यवंशी की विस्फोटक बल्लेबाजी ने टीम को भविष्य के लिए एक मजबूत विकल्प दिया है।
श्रेयस अय्यर की कप्तानी में मिली यह पहली जीत भारतीय टीम के लिए आत्मविश्वास बढ़ाने वाली साबित हो सकती है। अब टीम की नजर सीरीज में बढ़त मजबूत करने और अपने प्रदर्शन में निरंतरता बनाए रखने पर होगी।