मैट पर ऐतिहासिक जीत और हाथों में पिता की तस्वीर, मनीषा के गोल्ड ने किया भावुक
मनीषा ने विश्व कुश्ती में स्वर्ण जीतकर रचा इतिहास
अस्ताना: भारतीय पहलवान मनीषा भनवाला ने विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतकर ऐसा इतिहास रचा है, जिसके पीछे वर्षों की मेहनत और पिता को खोने का गहरा दर्द छिपा है। वर्ष 2022 में दिल का दौरा पड़ने से उनके पिता सुरेश का निधन हो गया था। चार साल बाद मनीषा ने विश्व चैंपियन बनकर उस सपने को साकार किया, जिसे उनके पिता ने संजोया था। जीत के बाद पिता की तस्वीर वाली टी-शर्ट दिखाने का उनका भावुक अंदाज इस उपलब्धि को और खास बना गया।
कजाखस्तान के अस्ताना में शुक्रवार, 30 अक्टूबर को हुए महिलाओं के 59 किलोग्राम भारवर्ग के फाइनल में मनीषा ने अमेरिका की अबीगैल नेट को 8-6 से हराया। इस सफलता के साथ वह सीनियर विश्व कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक जीतने वाली पहली भारतीय महिला पहलवान बनीं। विश्व कुश्ती की सर्वोच्च संस्था यूनाइटेड वर्ल्ड रेसलिंग ने भी उनकी ऐतिहासिक जीत की पुष्टि की। फाइनल की शुरुआत में छह अंक से पिछड़ने के बावजूद उन्होंने मुकाबला अपने पक्ष में कर लिया।
हरियाणा के जींद जिले के सिवाहा गांव की रहने वाली मनीषा के कुश्ती सफर में उनके पिता की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने ही बेटी को खेल अपनाने के लिए प्रेरित किया था। जब मनीषा राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रही थीं, तभी परिवार को बड़ा आघात लगा। वर्ष 2022 में एशियाई चैंपियनशिप के लिए मंगोलिया की यात्रा के समय उनके पिता का निधन हो गया। यह मनीषा के जीवन के सबसे कठिन दौरों में से एक था।
निजी दुख के बावजूद मनीषा ने उस एशियाई चैंपियनशिप में हिस्सा लिया और 62 किलोग्राम वर्ग में कांस्य पदक जीता। पिता के निधन के बाद भी उन्होंने खेल से अपना रिश्ता बनाए रखा। विश्व चैंपियनशिप से पहले दिए साक्षात्कार में उन्होंने बताया था कि पिता की याद उन्हें मुश्किल परिस्थितियों में ताकत देती है। उनके लिए यह संबंध केवल अतीत की स्मृति नहीं, बल्कि हर चुनौती के समय आगे बढ़ने की प्रेरणा बना हुआ है। अस्ताना जाने से पहले मनीषा ने अपने बड़े भाई रिंकू से पिता की कुछ दूसरी तस्वीरें मांगी थीं। भाई के पास भी वही तस्वीरें थीं, जो मनीषा के पास पहले से मौजूद थीं। अंततः उन्होंने उपलब्ध तस्वीर से ही विशेष टी-शर्ट तैयार कराई। विश्व चैंपियन बनने के बाद जब उन्होंने उसे सबके सामने दिखाया, तो वह उनके परिवार के लिए गर्व और पिता की याद से भरा क्षण था। रिंकू ने बताया कि मनीषा इस बार कुछ विशेष करने को लेकर आश्वस्त थीं।
फाइनल मुकाबले में मनीषा की शुरुआत कठिन रही। अमेरिकी पहलवान नेट ने चार अंक का दांव लगाया। भारतीय पक्ष की चुनौती असफल होने पर नेट को एक अतिरिक्त अंक मिला। इसके बाद मनीषा के खिलाफ चेतावनी से अमेरिकी खिलाड़ी की बढ़त 6-0 हो गई। मनीषा ने पहले पीरियड के अंत से पहले एक अंक हासिल किया और ब्रेक तक स्कोर 1-6 पहुंचाया। उस समय मुकाबला अमेरिकी पहलवान के पक्ष में दिखाई दे रहा था। दूसरे पीरियड में मनीषा ने वापसी की। टेकडाउन से अंक जुटाने के बाद अमेरिकी पक्ष की असफल चुनौती का लाभ भी उन्हें मिला। फिर उन्होंने प्रतिद्वंद्वी को पलटकर स्कोर 6-6 कर दिया। बराबरी के बाद भी उन्होंने आक्रमण जारी रखा और एक और टेकडाउन से 8-6 की बढ़त हासिल कर ली। अंतिम क्षणों में इस बढ़त को बचाते हुए उन्होंने स्वर्ण पदक अपने नाम किया। शुरुआती पिछड़ने के बाद उनकी वापसी ऐतिहासिक जीत की सबसे बड़ी विशेषता रही।
इस उपलब्धि से कुछ समय पहले मनीषा को एशियाई खेलों में निराशा मिली थी। उन्होंने 57 किलोग्राम वर्ग में हिस्सा लिया था, लेकिन क्वार्टर फाइनल में जापान की अकारी फुजिनामी से हार गई थीं। मनीषा के मुताबिक, उस प्रतियोगिता की तैयारी के लिए उन्होंने काफी समय लगाया था और पदक नहीं मिलने से उन्हें गहरा दुख हुआ। हालांकि, उन्होंने उस निराशा से निकलकर विश्व चैंपियनशिप पर ध्यान केंद्रित किया। कम अंतराल में हुई दोनों प्रतियोगिताओं के कारण उन्होंने विश्व चैंपियनशिप के लिए 59 किलोग्राम वर्ग चुना।
मनीषा के लिए विश्व चैंपियनशिप का पदक लंबे इंतजार के बाद आया। इससे पहले वह 2023, 2024 और 2025 की प्रतियोगिताओं में हिस्सा ले चुकी थीं, लेकिन पदक तक नहीं पहुंच सकी थीं। भारवर्ग का चयन भी उनके करियर का महत्वपूर्ण विषय रहा है। अलग-अलग वर्गों में प्रतिस्पर्धा करने के बाद उन्होंने अपनी शारीरिक बनावट और भविष्य के लक्ष्यों को ध्यान में रखकर बदलाव किए। तीन प्रयासों की निराशा के बाद चौथी बार स्वर्ण तक पहुंचना उनके धैर्य को दर्शाता है। मनीषा की यह जीत भारतीय महिला कुश्ती के लिए नई उपलब्धि और उनके परिवार के लिए बेहद निजी सपना पूरा होने का क्षण है। पिता उन्हें विश्व चैंपियन बनते देखने के लिए मौजूद नहीं थे, लेकिन उनकी तस्वीर जीत के उस पल में बेटी के साथ थी। मैट पर पिछड़ने के बाद वापसी और जीवन में बड़े दुख के बाद आगे बढ़ने की उनकी यात्रा ने इस स्वर्ण पदक को खास बना दिया। अब मनीषा का नाम भारतीय कुश्ती के इतिहास में पहली महिला सीनियर विश्व चैंपियन के रूप में दर्ज हो गया है।