क्या हमारी धरती मंगल और बुध ग्रह की तरह वीरान हो जाएगी? यह सवाल इसलिए उठ रहा है, क्योंकि उम्मीद से ज्यादा तेज गति से पथरीले ग्रहों की तरह धरती होती जा रही है। एक रिसर्च में यह चौंकाना वाला खुलासा हुआ है। रिसर्च के मुताबिक, धरती का केंद्र (गर्म मैग्मा) का इलाका अपनी तय गति से ज्याजा तेजी से ठंडा होता जा रहा है।
धरती का केंद्र तेजी से क्यों ठंडा हो रहा है इसकी प्रक्रिया को समझने के लिए वैज्ञानिक शोध कर रहे हैं। वैज्ञानिक धरती के कोर और मैंटल के बीच मौजूद खनिजों की थर्मल कंडक्टिविटी की स्टडी कर रहे हैं। अगर तेजी से कोर की गर्मी बाहरी परतों पर आती है, तो पृथ्वी उतनी ही तेजी से केंद्र की गर्मी खो देगी। गर्मी खत्म होने के बाद पृथ्वी का चुंबकीय क्षेत्र, गुरुत्वाकर्षण जैसी ताकतें समाप्त हो जाएंगी। आइए जानते हैं कि अगर ऐसा होता है तो इंसानों पर क्या असर पड़ेगा?
नई रिसर्च में हुआ चौंकाने वाला खुलासा
कार्नेगी इंस्टीट्यूशन फॉर साइंस के ईटीएच के प्रोफेसर मोतोहिको मुराकामी ने ब्रिजमैनाइट की ऊष्मीय चालकता को लेकर शोध किया है। उन्होंने चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा कि इस शोध में पता चला कि ब्रिजमैनाइट की ऊष्मीय चालकता उम्मीद से डेढ़ गुना अधिक थी।
अर्थ एंड प्लैनेटरी साइंस लेटर्स जर्नल में मोतोहिको और उनकी साथियों की यह स्टडी प्रकाशित हुई है। मोतोहिको का कहना है कि इस स्टडी के बाद अब हमे एक बार पिर धरती की उत्पत्ति को लेकर स्टडी करनी चाहिए। उसके परतों की जांच करनी चाहिए, क्योंकि धरती का केंद्र (अंदर का हिस्सा) ठंडा होता जा रहा है जिसका असर धरती से निकलने वाली तरंगों पर पड़ रहा है। ऐसा ही कुछ मंगल और बुध ग्रह पर हुआ था जो अब विरान हैं।
ऐसे पता चला कि धरती ठंडी हो रही है
इन शोधकर्ताओं ने प्रयोगशाला में ब्रिजमेनाइट की तापीय चालकता को मापने के लिए एक माप प्रणाली विकसित की है। इससे पता चलता है कि धरती के अंदर दबाव और तापमान में क्या बदलाव हो रहा है। इस शोध में पता चला कि धरती के केंद्र से मेंटल में गर्मी का प्रवाह तेजी से हो रहा है जो पहले की तुलना में ज्यादा है। अधिक ऊष्मा प्रवाह की वजह से धरती ठंड होती है। इन विशेषज्ञों का कहना है कि इस बदलाव की वजह से धरती ठंडी होती जा रही है।
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