पानी के अंदर निगरानी का नया हथियार चीन ने बनाई रोबोटिक मछली
मछली करेगी पानी के अंदर निगरानी
बीजिंग: चीन ने अंडरवॉटर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में एक ऐसी रोबोटिक मछली विकसित की है, जो देखने और तैरने के अंदाज में असली 'गोल्डन एरोवाना' मछली जैसी दिखाई देती है। इसे पानी के भीतर निगरानी और पर्यावरण से जुड़ा डेटा जुटाने जैसे कामों के लिए इस्तेमाल किए जाने की संभावना है। पारंपरिक अंडरवॉटर ड्रोन की तुलना में इसका मछली जैसा डिजाइन इसे पानी में ज्यादा स्वाभाविक तरीके से आगे बढ़ने में मदद कर सकता है।
इस रोबोटिक मछली को बायोमिमेटिक तकनीक के आधार पर तैयार किया गया है। बायोमिमेटिक टेक्नोलॉजी में वैज्ञानिक जीव-जंतुओं की शारीरिक बनावट और उनके चलने के तरीके से प्रेरणा लेकर मशीन तैयार करते हैं। रोबोटिक मछली का शरीर और तैरने की गतिविधि भी इसी सिद्धांत पर आधारित है।
असली मछली की तरह करती है मूवमेंट
इस रोबोट की सबसे बड़ी खासियत इसका मछली जैसा डिजाइन है। यह पारंपरिक प्रोपेलर वाले अंडरवॉटर ड्रोन से अलग तरीके से पानी में चल सकती है। इसके शरीर और पूंछ की गतिविधि को इस तरह डिजाइन किया गया है कि यह वास्तविक मछली के तैरने जैसी चाल की नकल कर सके।
ऐसा डिजाइन पानी के भीतर कम व्यवधान पैदा करने में मदद कर सकता है। इससे जलीय जीवों के बीच जाकर उनके व्यवहार का अध्ययन करने जैसे वैज्ञानिक कामों में भी इस तरह के रोबोट उपयोगी हो सकते हैं।
कैमरा और सेंसर से हो सकती है निगरानी
रोबोटिक मछली में कैमरे और अलग-अलग सेंसर लगाने की क्षमता ऐसी तकनीक को खास बनाती है। इनके जरिए पानी के भीतर तस्वीरें और वीडियो रिकॉर्ड करने के साथ तापमान, पानी की गुणवत्ता और अन्य पर्यावरणीय जानकारी जुटाई जा सकती है।
इसका इस्तेमाल झीलों, नदियों, जलाशयों और समुद्री क्षेत्रों की निगरानी में किया जा सकता है। वैज्ञानिक शोध के दौरान ऐसे रोबोट उन जगहों तक भी पहुंच सकते हैं जहां इंसानों के लिए लंबे समय तक काम करना कठिन या जोखिम भरा हो।
अंडरवॉटर सर्विलांस में भी उपयोग की संभावना
मछली जैसी बनावट के कारण इस तकनीक के निगरानी संबंधी उपयोग को लेकर भी चर्चा हो रही है। भविष्य में बंदरगाहों, महत्वपूर्ण समुद्री ढांचों और पानी के भीतर मौजूद सुविधाओं के निरीक्षण में बायोमिमेटिक रोबोट का इस्तेमाल संभव है।
हालांकि किसी विशिष्ट सैन्य या जासूसी क्षमता का दावा तभी किया जाना चाहिए जब उसके बारे में आधिकारिक जानकारी उपलब्ध हो। केवल निगरानी की तकनीकी क्षमता के आधार पर इसे सीधे 'जासूसी मछली' कहना भ्रामक हो सकता है।
क्यों खास है बायोमिमेटिक तकनीक?
पारंपरिक अंडरवॉटर वाहन अक्सर मोटर और प्रोपेलर के जरिए चलते हैं। इससे आवाज और पानी में हलचल पैदा हो सकती है। मछली की तरह तैरने वाले रोबोट को अपेक्षाकृत सहज और कम व्यवधान वाले संचालन के लिए विकसित किया जा सकता है।
रोबोटिक मछलियों की तकनीक पर चीन समेत दुनिया के कई देशों में लंबे समय से शोध चल रहा है। इनका इस्तेमाल पर्यावरण निगरानी, वैज्ञानिक अनुसंधान, पानी के भीतर निरीक्षण और संभावित सुरक्षा कार्यों में किया जा सकता है।
'गोल्डन एरोवाना' जैसी दिखने वाली यह रोबोटिक मछली इसी दिशा में बायोमिमेटिक इंजीनियरिंग का दिलचस्प उदाहरण है। इसकी वास्तविक क्षमता और बड़े पैमाने पर इस्तेमाल की तस्वीर तकनीक से जुड़े विस्तृत आधिकारिक विवरण सामने आने के बाद और स्पष्ट होगी।