Science: मिस्र के विशाल पिरामिड कैसे बनाए गए, यह रहस्य दशकों से वैज्ञानिकों को हैरान करता रहा है। अब, नई रिसर्च ने एक बहुत ही दिलचस्प संभावना का खुलासा किया है। वैज्ञानिकों का सुझाव है कि पिरामिड बनाने के लिए पुली और काउंटरवेट सिस्टम का इस्तेमाल किया गया होगा। इस तरीके से भारी पत्थरों को उठाना बहुत आसान हो गया होगा, जिससे पिरामिड इतनी जल्दी और इतनी ज़्यादा ऊंचाई तक बनाए जा सके। डॉ. साइमन एंड्रियास शूरिंग और उनकी टीम ने पिरामिड की संरचना और पत्थरों को निकालने और आकार देने के तरीकों का गहराई से अध्ययन किया।
ग्रेट पिरामिड में कितने पत्थर हैं?
मिस्र का ग्रेट पिरामिड दुनिया के सबसे बड़े अजूबों में से एक है। यह 2.3 मिलियन चूना पत्थर के ब्लॉकों से बना है, जिसमें सबसे छोटे पत्थरों का वज़न लगभग 2,000 किलोग्राम और सबसे बड़े पत्थरों का वज़न 60,000 किलोग्राम से ज़्यादा है। वैज्ञानिकों का मानना है कि इसे बनाने में 20 साल लगे, जिसका मतलब है कि मज़दूरों को हर मिनट एक पत्थर रखना पड़ता होगा।
वैज्ञानिकों का मानना है कि पिरामिड के अंदर ढलान वाले रैंप बनाए गए थे। ये रैंप भारी काउंटरवेट से लैस थे। जब एक भारी वज़न नीचे आता था, तो वह पुली सिस्टम के ज़रिए दूसरे भारी पत्थर को ऊपर खींचता था। यह काफी हद तक आधुनिक लिफ्ट की तरह काम करता था। इससे मज़दूरों की ताकत बची और पत्थरों को सटीकता के साथ बहुत ऊंचाई तक उठाया जा सका।
यह रिसर्च क्या साबित करती है?
अगर यह थ्योरी सही है, तो इसका मतलब है कि पिरामिड नीचे से ऊपर, परत दर परत नहीं बनाया गया था। इसके बजाय, इसे अंदर से शुरू किया गया था और धीरे-धीरे पुली सिस्टम का इस्तेमाल करके बाहर और ऊपर की ओर बढ़ाया गया। पिरामिड के अंदर पाए जाने वाले ऊंचे रैंप और गलियारों को वैज्ञानिक सामान्य रास्ते नहीं मानते हैं। उनका मानना है कि ये असल में भारी पत्थरों को खींचने के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले रैंप थे।