Science News:भारत जमीन से अंतरिक्ष पर रखेगा पैनी नजर, अब लद्दाख बनेगा नया स्पेस हब
Science News: भारत सरकार अगले पांच सालों में अंतरिक्ष विज्ञान (एस्ट्रोफिजिक्स) पर ₹3,600 करोड़ खर्च करेगी। इस प्लान में दो नए, बड़े ग्राउंड-बेस्ड टेलीस्कोप लगाना, मौजूदा टेलीस्कोप को मॉडर्न टेक्नोलॉजी से अपग्रेड करना और अंतरिक्ष दिखाने और लोगों को जानकारी देने के लिए एक अत्याधुनिक प्लैनेटेरियम बनाना शामिल है। ये सुविधाएं नई खोज करने, डेटा इकट्ठा करने और स्टूडेंट्स को ट्रेनिंग देने में मदद करेंगी। DST के अधिकारी करंदीकर ने आगे बताया कि इस प्लान का एक मुख्य हिस्सा नेशनल लार्ज सोलर टेलीस्कोप (NLST) होगा।
यह टेलीस्कोप क्या जानकारी देगा?
यह टेलीस्कोप सूरज के बारे में बहुत जल्दी जानकारी देगा। यह भारत के आदित्य-L1 मिशन के साथ मिलकर भी काम करेगा। ये दोनों मिलकर अंतरिक्ष के मौसम का अनुमान लगाना आसान बनाएंगे, और इसके निर्माण में लगभग ₹800 से ₹1000 करोड़ का खर्च आएगा। यह भारत का पहला सैटेलाइट है जिसे खास तौर पर सूरज और उसकी गतिविधियों को समझने के लिए अंतरिक्ष में लॉन्च किया गया है।
यह टेलीस्कोप कहाँ लगाया जाएगा?
यह टेलीस्कोप हिमालय में लद्दाख के हानले इलाके में 4500 मीटर की ऊंचाई पर लगाया जाएगा। इस ऊंचाई पर आसमान बहुत साफ रहता है, जिससे अंतरिक्ष में तारों और ग्रहों को देखना बहुत आसान हो जाता है। यह टेलीस्कोप रोशनी और गर्मी दोनों को कैप्चर करने में माहिर होगा। यह अब तक का भारत का सबसे एडवांस्ड ग्राउंड-बेस्ड टेलीस्कोप होगा, जिसकी कीमत ₹1800 करोड़ होगी।
लद्दाख में मौजूदा हिमालयन चंद्र टेलीस्कोप को भी अपग्रेड किया जाएगा। यह टेलीस्कोप एक ठंडे, सूखे रेगिस्तान में है जहाँ आबादी बहुत कम है। यहाँ की हवा बहुत साफ है और नमी बहुत कम है। यही वजह है कि इस जगह से तारों और ग्रहों को देखना दुनिया में सबसे अच्छा माना जाता है। एक बहुत ही मॉडर्न कॉसमॉस-2 प्लैनेटेरियम भी बनाया जाएगा। यह अंतरिक्ष के असली नज़ारे दिखा पाएगा।