Science: अंतरिक्ष में हुआ तारों का भयंकर विस्फोट, वैज्ञानिकों ने देखते ही खड़े कर दिए हाथ

Update: 2025-12-20 05:09 GMT
Science: वैज्ञानिकों ने जेम्स वेब टेलीस्कोप का इस्तेमाल करके सबसे पुराने सुपरनोवा की खोज की है। यह पहली बार है जब ब्रह्मांड के इतिहास के इतने शुरुआती दौर के कॉस्मिक विस्फोट को देखा गया है। यह खोज कई बातें बताएगी और हमें यह समझने में मदद करेगी कि ब्रह्मांड में पहले सितारों ने अपना जीवन कैसे खत्म किया और उनके विस्फोटों से क्या बदलाव आए। इस विस्फोट की पहचान गामा-रे बर्स्ट नामक बहुत तेज़ रोशनी की चमक से हुई, जो अंतरिक्ष में सबसे चमकदार तरह की रोशनी है। इस विस्फोट से निकलने वाली रोशनी अरबों सालों तक अंतरिक्ष में यात्रा करके हम तक पहुँची।
इस विस्फोट की पहचान कैसे हुई?
इसे सबसे पहले 14 मार्च, 2025 को एक चीनी-फ्रांसीसी सैटेलाइट (SVOM) ने पता लगाया था, जिसने अंतरिक्ष में रोशनी की एक चमक देखी जो सिर्फ़ 10 सेकंड तक रही। इसे गामा-रे बर्स्ट के नाम से जाना जाता है, जो तब होता है जब एक बहुत बड़ा तारा पूरी तरह से ढह जाता है। वैज्ञानिक यह पक्का करना चाहते थे कि इसके पीछे कोई सुपरनोवा था या नहीं।
जेम्स वेब टेलीस्कोप की शक्ति
जेम्स वेब टेलीस्कोप की नज़र इतनी तेज़ है कि वह विस्फोट की हल्की रोशनी को उस गैलेक्सी की रोशनी से अलग कर पाया जहाँ यह हुआ था। इस रिसर्च के मुख्य वैज्ञानिक ए.जे. लेवान ने कहा कि उन्हें हैरानी हुई कि उनकी भविष्यवाणी इतनी सटीक निकली। टेलीस्कोप की मदद से, उन्होंने साफ़ देखा कि यह सच में एक सुपरनोवा था।
वैज्ञानिकों ने एक हैरान करने वाला पैटर्न देखा
यह प्राचीन सुपरनोवा बिल्कुल वैसा ही दिखता था जैसा कि हम आज अपने आस-पास के ब्रह्मांड में होने वाले विस्फोटों को देखते हैं। वैज्ञानिकों ने सोचा था कि शुरुआती तारे बहुत बड़े होंगे और उनकी संरचना अलग होगी, और इसलिए उनके विस्फोट भी अलग होंगे। शोधकर्ताओं ने कहा, "हमें कुछ नया देखने की उम्मीद थी, लेकिन जेम्स वेब टेलीस्कोप ने दिखाया कि यह प्राचीन विस्फोट बिल्कुल वैसा ही है जैसा कि हम आज के सुपरनोवा देखते हैं।"
जेम्स वेब ने और क्या खोजा?
इस टेलीस्कोप ने न सिर्फ़ विस्फोट को देखा, बल्कि उस गैलेक्सी का भी पता लगाया जहाँ वह तारा रहता था। यह गैलेक्सी इतनी दूर है कि दुनिया के सबसे शक्तिशाली टेलीस्कोप भी इसे सिर्फ़ रोशनी के एक हल्के धब्बे के रूप में देखते हैं। यह बहुत घना और धुंधला है। वैज्ञानिक एमेरिक ले फ्लोच ने बताया कि इतनी दूरी पर गैलेक्सी का धुंधला दिखना स्वाभाविक था। हालाँकि इसे साफ़ देखना बहुत मुश्किल है, लेकिन यह हमारे लिए एक टाइम मशीन की तरह काम करता है, जो हमें दिखाता है कि गैलेक्सी कैसे बनीं।
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