Chaitra Navratri के पहले दिन मां शैलपुत्री की आराधना, जानें कलश स्थापना मुहूर्त
Chaitra Navratri ज्योतिष न्यूज़: चैत्र नवरात्रि का पावन पर्व आज से प्रारंभ हो रहा है, जो अपने साथ हिंदू नववर्ष का शुभ सन्देश भी लेकर आया है. आज, चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर, भक्तजन कलश स्थापना कर मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप, माता शैलपुत्री की श्रद्धापूर्वक पूजा-अर्चना करेंगे. यह उत्सव नवमी तिथि तक जारी रहेगा.
शैलपुत्री, जिनका अर्थ है 'पर्वत की पुत्री', पर्वतराज हिमालय की पुत्री होने के कारण माता पार्वती को समर्पित हैं. वृषभ (बैल) उनका वाहन है, इसलिए उन्हें वृषभारूढ़ा भी कहा जाता है. मान्यता है कि माता शैलपुत्री की आराधना से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और जीवन के सभी दोष दूर होते हैं. आइए जानें कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, मंत्र, आरती और इस दिन का महत्व.
चैत्र नवरात्रि का महत्व
ज्योतिषाचार्य आदित्या झा का कहना है कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन नौ दिनों में मां दुर्गा पृथ्वी लोक पर अपने भक्तों के बीच विराजमान होती हैं. इसलिए, भक्तजन व्रत रखते हैं और पूरे परिवार के साथ विधि-विधान से माता की पूजा करते हैं. इस बार माता दुर्गा का आगमन हाथी पर होगा और प्रस्थान भी हाथी पर ही होगा. शास्त्रों में हाथी की सवारी को शुभ माना गया है, जो खुशहाली, समृद्धि और अच्छी वर्षा का प्रतीक है. हालांकि, इस बार नवरात्रि 9 दिनों की नहीं, बल्कि 8 दिनों की होगी, क्योंकि तृतीया तिथि का क्षय हो रहा है.
माता शैलपुत्री का दिव्य स्वरूप: वन्दे वंछितलाभाय चन्द्रार्धकृतशेखराम्।वृषारूढाम् शूलधरां शैलपुत्रीं यशस्विनीम्॥
माता शैलपुत्री का स्वरूप अत्यंत शांत और सरल है. उन्होंने अपने दाहिने हाथ में त्रिशूल धारण किया है, जो धर्म, मोक्ष और अर्थ के संतुलन का प्रतीक है. वहीं, बाएं हाथ में कमल का फूल है, जो सांसारिक जीवन में रहकर उससे परे रहने का संकेत देता है. माता की सवारी वृषभ (बैल) है, जो नंदी के समान है. मां अपने भक्तों की सभी मनोकामनाएं पूरी करती हैं और उन्हें सुख-समृद्धि प्रदान करती हैं. माता शैलपुत्री चंद्रमा को दर्शाती हैं, और उनकी आराधना करने से चंद्र दोष से भी मुक्ति मिलती है.
कलश स्थापना 2025: शुभ मुहूर्त
पहम(अवधि: 49 मिनट)
चैत्र नवरात्रि 2025: पहले दिन के शुभ समय
प्रातः सन्ध्या: 05:04 ए एम से 06:13 ए एम तक
अभिजीत मुहूर्त: 12:01 पी एम से 12:50 पी एम तक
अमृत काल: 02:28 पी एम से 03:52 पी एम
विजय मुहूर्त: 02:30 पी एम से 03:19 पी एम तक
गोधूलि मुहूर्त: 06:37 पी एम से 07:00 पी एम तक
सायाह्न सन्ध्या: 06:38 पी एम से 07:47 पी एम तक
निशिता मुहूर्त: 31 मार्च को 12:02 ए एम से 12:48 ए एम तक
चैत्र नवरात्रि 2025: पहले दिन के शुभ योग और नक्षत्र
सर्वार्थ सिद्धि योग: 04:35 पी एम से मार्च 31 को 06:12 ए एम तक
इन्द्र योग: प्रात:काल से 05:54 पी एम तक
रेवती नक्षत्र: प्रात:काल से लेकर शाम 04:35 बजे तक, फिर अश्विनी नक्षत्र
कलश स्थापना सामग्री
मिट्टी, मिट्टी का घड़ा, कलावा, जटा वाला नारियल, अशोक के पत्ते, जल, गंगाजल, लाल रंग का कपड़ा, एक मिट्टी का दीपक, मौली, अक्षत, हल्दी, फल, फूल.
शैलपुत्री पूजा मंत्र
ॐ शं शैलपुत्री देव्यै नम:
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थ साधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोऽस्तुते।
ॐ जयन्ती मंगला काली भद्रकाली कपालिनी। दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तुते।
शैलपुत्री माता पूजा विधि
ज्योतिषाचार्य आदित्या झा ने बताया चैत्र नवरात्रि के पहले दिन, ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान आदि से निवृत्त होकर स्वच्छ वस्त्र धारण करें. फिर एक चौकी पर गंगाजल छिड़ककर उसे शुद्ध करें और उस पर देवी दुर्गा की मूर्ति या तस्वीर स्थापित करें. इसके बाद पूरे परिवार के साथ विधि-विधान से कलश स्थापना करें. कलश स्थापना के बाद शैलपुत्री के ध्यान मंत्र का जप करें और फिर षोडशोपचार विधि से मां दुर्गा की पहली शक्ति, शैलपुत्री की पूजा करें. माता को कुमकुम, फल, अक्षत, सफेद फूल, धूप-दीप आदि पूजा सामग्री अर्पित करें. फिर पान सुपारी, लौंग, नारियल और श्रृंगार का सामान अर्पित करें. इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ करें और पूरे परिवार के साथ आरती करें. अंत में, माता से अपनी गलतियों के लिए क्षमा मांगें.