श्राद्ध तर्पण से पूज्यों की भी हो जाती है पूजा, जानें किस दिन करें श्राद्ध कर्म
पितृपक्ष शब्द सुनते या पढ़ते ही मन में पूर्वजों का चित्र और उनकी स्मृतियां तुरंत ही ध्यान आ जाती हैं और इसके साथ ही उनके प्रति श्रद्धा भी उत्पन्न होती है. पितृपक्ष एक ऐसा अवसर है, जिसमें नई पीढ़ी को अपने ज्ञात पूर्वजों के बारे में बताना चाहिए, साथ ही उनसे जुड़ी हुई घटनाओं का भी सजीव चित्रण करने का प्रयास करना चाहिए. हालात ऐसे हो गए हैं कि आज की नई पीढ़ी को अपने माता-पिता के अलावा बाबा तक का नाम अकसर मालूम नहीं होता है. हमेशा न सही, लेकिन साल के 15 दिनों में ही कभी आप अपने पूर्वजों के बारे में नई पीढ़ी को बता सकें या आपको नहीं मालूम है तो पता कर सकें तो यह भी एक प्रकार का पितरों को प्रणाम है. इसको अपने ऊपर लेकर सोचना चाहिए कि हम रात-दिन बच्चों के भविष्य के लिए मेहनत कर रहे हैं, लेकिन यदि आपका पौत्र आपका अभिवादन तक नहीं करता हो तो आत्मा को बहुत कष्ट होगा.