Vikat Sankashti Chaturthi : जानिए कब है विकट संकष्टी चतुर्थी 16 या 17 अप्रैल
Vikat Sankashti Chaturthi : विकट चतुर्थी का व्रत प्रथम पूजनीय देवता भगवान गणेश को समर्पित हैं. हिंदू पंचांग के अनुसार, यह व्रत हर साल वैशाख महीने की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि रखा जाता है. मान्यता है कि इस दिन विधिपूर्वक व्रत रखने और रात को चंद्रोदय के समय गणेश जी की पूजा करने से सुख-समृद्धि का आशीर्वाद मिलता है और जीवन में शांति आती है. वहीं इस बार विकट चतुर्थी व्रत की तिथि को लेकर कुछ कन्फ्यूजन बना हुआ है, तो आइए जान लेते हैं कि इस बार यह व्रत कब किया जाएगा.
विकट संकष्ट चतुर्थी कब है:
पंचांग के अनुसार, वैशाख माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि की शुरुआत 16 अप्रैल को दोपहर 1 बजकर 16 मिनट पर होगी. वहीं तिथि का समापन 17 अप्रैल को दोपहर 3 बजकर 23 मिनट पर होगा. इस दिन चंद्रोदय के समय पूजा का विधान है. ऐसे में 16 अप्रैल को भालचंद्र संकष्टी चतुर्थी मनाई जाएगी.
विकट संकष्टी चतुर्थी के दिन चंद्रोदय रात्रि 10 बजे होगा. इस समय व्रती चंद्रमा दर्शन और अर्घ्य देकर पूजा संपन्न कर सकते हैं.
विकट संकष्टी चतुर्थी पूजा विधि:
विकट संकष्ट चतुर्थी के दिन शुभ मुहूर्त में गणेश जी की मूर्ति को पंचामृत से स्न्नान करा कर सिंदूर, दूर्वा, गंध, अक्षत, अबीर, गुलाल, सुंगधित फूल, जनेऊ, सुपारी, पान, मौसमी फल अर्पित करें. पूजा के समय गणेश जी की मूर्ति न होने पर एक साबुत सुपारी को ही गणेश जी मानकर पूजन किया जा सकता है. फिर दूर्वा अर्पित करके मोदक का प्रसाद लगाएं एवं दीप-धूप से उनकी आरती कर लें.
ॐ गं गणपतये नमः
वक्रतुण्ड महाकाय सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघ्नं कुरु मे देव सर्वकार्येषु सर्वदा॥
गणपूज्यो वक्रतुण्ड एकदंष्ट्री त्रियम्बक:। नीलग्रीवो लम्बोदरो विकटो विघ्रराजक :।।
धूम्रवर्णों भालचन्द्रो दशमस्तु विनायक:। गणपर्तिहस्तिमुखो द्वादशारे यजेद्गणम।।
विघ्नेश्वराय वरदाय सुरप्रियाय लंबोदराय सकलाय जगद्धितायं। नागाननाथ श्रुतियज्ञविभूषिताय गौरीसुताय गणनाथ नमो नमस्ते।।
एकदंताय शुद्धाय सुमुखाय नमो नमः। प्रपन्न जनपालाय प्रणतार्ति विनाशिने।।