Chaturmas 2026: शुरू हुआ चातुर्मास, जानें किन 5 कार्यों को करने से माना जाता है अशुभ
चार महीने तक योगनिद्रा में रहेंगे भगवान विष्णु, चातुर्मास में भूलकर भी न करें ये काम
हिंदू धर्म में चातुर्मास का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है। इस साल चातुर्मास की शुरुआत देवशयनी एकादशी से हुई है। मान्यता है कि इस दिन से भगवान विष्णु चार महीने के लिए योगनिद्रा में चले जाते हैं और सृष्टि का संचालन भगवान शिव संभालते हैं। इसी कारण इन चार महीनों को साधना, संयम और धार्मिक नियमों के पालन का समय माना जाता है।
चातुर्मास के दौरान पूजा-पाठ, व्रत, दान और धार्मिक कार्यों का विशेष महत्व होता है। वहीं, शास्त्रों में कुछ ऐसे कार्यों का भी उल्लेख मिलता है जिन्हें इस अवधि में करने से बचने की सलाह दी जाती है। मान्यता है कि इन नियमों का पालन करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है और मन को शांति मिलती है।
1. शुभ मांगलिक कार्यों से बचने की मान्यता
चातुर्मास के दौरान विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन जैसे कई मांगलिक कार्यों को करने से परहेज किया जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार भगवान विष्णु के योगनिद्रा में जाने के कारण इस अवधि में शुभ कार्यों का फल कम माना जाता है। हालांकि, अलग-अलग परंपराओं में इसके नियम अलग हो सकते हैं।
2. तामसिक भोजन का सेवन न करें
चातुर्मास में खान-पान को लेकर विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। इस दौरान मांसाहार, शराब और अत्यधिक मसालेदार भोजन से दूरी बनाने की मान्यता है। सात्विक भोजन करने से मन शांत रहता है और धार्मिक साधना में ध्यान केंद्रित करने में सहायता मिलती है।
3. क्रोध और नकारात्मक विचारों से बचें
धार्मिक ग्रंथों में चातुर्मास को आत्मसंयम का समय बताया गया है। इस दौरान क्रोध, ईर्ष्या, अहंकार और गलत विचारों से बचने की सलाह दी जाती है। माना जाता है कि इस समय मन को शांत रखकर ध्यान और भक्ति करने से आध्यात्मिक लाभ मिलता है।
4. बिना जरूरत यात्रा करने से बचें
पुराने समय में चातुर्मास के दौरान अधिक यात्रा करने से बचा जाता था, क्योंकि इस अवधि में बारिश के कारण रास्तों में कठिनाइयां होती थीं। साधु-संत भी एक स्थान पर रहकर साधना करते थे। इसी परंपरा के आधार पर अनावश्यक यात्राओं से बचने की मान्यता बनी हुई है।
5. दूसरों का अपमान और अधर्म के कार्य न करें
चातुर्मास में दान, सेवा और अच्छे कर्मों को महत्व दिया जाता है। इस दौरान किसी को दुख पहुंचाना, झूठ बोलना या गलत कार्य करना अशुभ माना जाता है। मान्यता है कि अच्छे व्यवहार और सेवा भाव से भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
चातुर्मास में करें ये शुभ कार्य
भगवान विष्णु और भगवान शिव की पूजा करें
नियमित रूप से मंत्र जाप और ध्यान करें
जरूरतमंदों को दान दें
धार्मिक ग्रंथों का पाठ करें
सात्विक जीवनशैली अपनाएं
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार चातुर्मास आत्मशुद्धि और संयम का समय है। इन चार महीनों में नियमों का पालन करने से व्यक्ति मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा का अनुभव कर सकता है।