Shukra Pradosh Vrat Katha: शुक्र प्रदोष व्रत पर आज पूजा में जरूर पढ़ें ये कथा, शिव हरेंगे सारे कष्ट

Update: 2026-01-16 01:42 GMT
Shukra Pradosh Vrat Katha: आज शुक्रवार 16 जनवरी 2026 को शुक्र प्रदोष व्रत है. आज भगवान शिव की पूजा में शुक्र प्रदोष व्रत की कथा जरूर पढ़ें. कथा का पाठ करने से पूजा सफल होती है और पूर्ण फल मिलता है|
प्रदोष व्रत भगवान शिव को समर्पित विशेष व्रत है, जोकि हर महीने त्रयोदशी तिथि को पड़ती है. शुक्रवार के दिन प्रदोष व्रत पड़े तो इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है. शुक्र प्रदोष व्रत विशेष रूप से वैवाहिक सुख, प्रेम, सौंदर्य, भौतिक सुख-संपदा और मनोकामना पूर्ति के लिए उत्तम माना जाता है|
आज है शुक्र प्रदोष व्रत:
आज शुक्रवार 16 जनवरी 2026 को प्रदोष व्रत है. पंचांग के अनुसार माघ कृष्ण पक्ष त्रयोदशी तिथि 15 जनवरी रात 8:16 बजे शुरू होकर 16 जनवरी रात 10:21 बजे समाप्त होगी. इसलिए आज प्रदोष व्रत रखा गया है. शाम में प्रदोष काल में भगवान शिव की पूजा के लिए शाम 5:43 बजे से 8:19 बजे तक शुभ मुहूर्त रहेगा. पूजा के दौरान व्रत कथा का पाठ जरूर करें|
शुक्र प्रदोष व्रत कथा:
पौराणिक व धार्मिक कथा के अनुसार, अंबापुर गांव में एक विधवा ब्राह्मण महिला रहती थी. वह भीख मांगकर किसी तरह से अपना गुजारा करती थी. एक बार उसे दो छोटे बच्चे मिले, जो अपने परिवार से बिछड़ गए थे और रो रहे थे. बच्चे इतने छोटे थे कि वे अपने परिवार वालों के बारे में बता भी नहीं पा रहे थे. तब महिला उन बच्चों को अपने घर ले आई और उनकी देखभाल करने लगी|
कुछ समय बाद महिला दोनों बच्चों को लेकर ऋषि शांडिल्य के पास गई और उनके माता-पिता के बारे में पूछा. तब ऋषि ने कहा कि, ये बच्चे तो विदर्भ नरेश के राजकुमार हैं, जिनका राज्य गंदर्भ नरेश ने छीन लिया है. महिला को यह जानकर बहुत दुख हुआ. उसने ऋषि से कहा कि, मुझे कुछ ऐसा उपाय बताएं, जिससे कि इन बच्चों को पिता और उनका राजपाट दोनों मिल जाए. तब ऋषि ने उसे प्रदोष व्रत करने को कहा|
महिला और दोनों बच्चों ने प्रदोष व्रत किया. कुछ समय बाद बड़े राजकुमार का विवाह अंशुमती से हुआ. राकुमार ने अंशुमती के पिता की सहायता से गंदर्भ पर हमला किया और जीत हासिल की इस तरह से दोनों राजकुमार को उनका राजपाट वापस मिल गया. दोनों राजकुमार और गरीब ब्राह्मणी के दिन बदल गए और वे सुखी जीवन जीने लगे|
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