Shukra Pradosh Vrat 2025 Date: सितंबर का पहला प्रदोष व्रत कब है, जानें तिथि, शुभ मुहूर्त और महत्व

Update: 2025-08-28 05:35 GMT
Shukra Pradosh Vrat 2025 Date: सितंबर माह का पहला प्रदोष व्रत भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि को है। यह भाद्रपद का अंतिम प्रदोष व्रत है। शुक्रवार के दिन होने के कारण इसे शुक्र प्रदोष व्रत कहा जाता है। शुक्र प्रदोष व्रत के दिन 3 शुभ योग बन रहे हैं, जो अत्यंत शुभ हैं। शुक्र प्रदोष व्रत करने से शाम के समय भगवान शिव की पूजा की जाती है। महादेव की कृपा से व्यक्ति को अपने जीवन में सुख, समृद्धि, धन, संपत्ति, वैभव आदि की प्राप्ति होती है। कष्टों का निवारण होता है और पापों से मुक्ति मिलती है। तिरुपति के ज्योतिषाचार्य डॉ. कृष्ण कुमार भार्गव से जानिए शुक्र प्रदोष व्रत यानी सितंबर माह का पहला प्रदोष व्रत कब है? प्रदोष पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है?
सितंबर का पहला प्रदोष व्रत:
द्रिक पंचांग के अनुसार, इस बार भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की त्रयोदशी तिथि 5 सितंबर को प्रातः 4:08 बजे से प्रारंभ होगी। यह तिथि 6 सितंबर को प्रातः 3:12 बजे तक मान्य है। ऐसे में सितंबर का पहला प्रदोष व्रत शुक्रवार, 5 सितंबर को है।
शुक्र प्रदोष मुहूर्त:
5 सितंबर को शुक्र प्रदोष व्रत के दिन पूजा का शुभ मुहूर्त सवा दो घंटे से अधिक है। उस दिन आप शाम 6:38 बजे से रात 8:55 बजे के बीच भगवान शिव की पूजा कर सकते हैं। प्रदोष व्रत की पूजा हमेशा शाम के समय की जाए तो अधिक शुभ और फलदायी होती है।
शुक्र प्रदोष पर ब्रह्म मुहूर्त प्रातः 04:30 बजे से प्रातः 05:16 बजे तक है। उस दिन अभिजीत मुहूर्त प्रातः 11:54 बजे से दोपहर 12:45 बजे तक है। वहीं, उस दिन निशिता मुहूर्त रात्रि 11:57 बजे से मध्यरात्रि 12:43 बजे तक है।
शुक्र प्रदोष पर बनेंगे 3 शुभ योग:
इस बार शुक्र प्रदोष व्रत पर 3 शुभ योग शोभन, सर्वार्थ सिद्धि योग और रवि योग बनेंगे। शोभन योग सुबह से दोपहर 01:53 बजे तक है, उसके बाद अतिगंड योग बनेगा।
प्रदोष पर सर्वार्थ सिद्धि योग सुबह 06:01 बजे से बन रहा है, जो देर रात 11:38 बजे तक रहेगा। रवि योग देर रात 11:38 बजे से अगले दिन 6 सितंबर को सुबह 06:02 बजे तक है। सर्वार्थ सिद्धि योग में किए गए कार्य सफल होते हैं। प्रदोष व्रत में श्रवण नक्षत्र सुबह से देर रात 11:38 बजे तक है, उसके बाद धनिष्ठा नक्षत्र है।
शुक्र प्रदोष पर रुद्राभिषेक का समय:
जो लोग शुक्र प्रदोष पर रुद्राभिषेक करना चाहते हैं, वे सूर्योदय के बाद कर सकते हैं। रुद्राभिषेक के लिए आवश्यक शिव की उपस्थिति 6 सितंबर को प्रातः 03:12 बजे तक नंदी पर रहेगी।
यदि आप अपने शत्रुओं पर विजय चाहते हैं, तो आपको शुक्र प्रदोष व्रत अवश्य रखना चाहिए। सुखी वैवाहिक जीवन के लिए भी शुक्र प्रदोष व्रत किया जाता है। शुक्र प्रदोष व्रत भौतिक सुख-सुविधाओं की प्राप्ति में भी सहायक होता है। शुक्र प्रदोष व्रत कष्टों, रोगों और दोषों से मुक्ति के लिए किया जाता है।
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