Shani Jayanti 2025: मेष समेत इन दो राशियों पर शनि की साढ़ेसाती, इसके प्रभाव से बचने के लिए करें ये उपाय

Update: 2025-05-14 04:22 GMT
Shani Jayanti 2025: 13 मई 2025 से ज्येष्ठ महीने की शुरुआत हो चुकी है, जो धार्मिक दृष्टि से बेहद खास है। यह माह भीषण गर्मी और इसमें पड़ने वाले व्रत त्योहारों के लिए जाना जाता है। बता दें, ज्येष्ठ के महीने में अपरा एकादशी, बड़ा मंगल, वट सावित्री और गंगा दशहरा जैसे बड़े त्योहार मनाए जाते हैं। इस दौरान शनि जयंती का पर्व भी मनाया जाता है, जिसका इंतजार सभी को सालभर रहता है।
पंचांग के मुताबिक ज्येष्ठ माह की अमावस्या तिथि पर शनि जयंती पड़ती है। मान्यता है कि इस दिन न्याय के देवता शनि महाराज का जन्म हुआ था। इसलिए इस तिथि पर उनकी पूजा-अर्चना करने से व्यक्ति को सभी तरह के दोष से मुक्ति मिलती है।
ज्योतिष में शनि को कर्मफलदाता कहा जाता है, क्योंकि वह कर्म के अनुसार ही फल देते हैं। उनकी दृष्टि जीवन में समस्याएं बढ़ाने से लेकर कार्यों में सफलता दिलाती हैं। हालांकि शनि की साढ़ेसाती होने पर व्यक्ति अक्सर मानसिक तनाव और आर्थिक संकटों से घिरा रहता है। ऐसे में शनि जयंती पर कुछ खास उपाय करने से आप साढ़ेसाती के प्रभाव को कम कर सकते हैं। आइए इनके बारे में जानते हैं।
कब है शनि जयंती 2025 :
इस बार ज्येष्ठ मास की अमावस्या तिथि 26 मई को
दोपहर
12 बजकर 11 मिनट से शुरू होगी। इसका समापन 27 मई को सुबह 8 बजकर 31 मिनट पर है। ऐसे में 27 मई 2025 के दिन शनि जयंती का पर्व मनाया जाएगा।
इन राशि वालों पर साढ़ेसाती का साया
ज्योतिषियों के अनुसार शनि के राशि परिवर्तन करने पर कुंभ, मेष और मीन राशि के लोगों पर शनि की साढ़ेसाती का साया बना हुआ है। इस दौरान मेष पर शनि की साढ़ेसाती का पहला चरण, मीन वालों पर दूसरा चरण और कुंभ राशि के जातकों पर साढ़ेसाती का अंतिम चरण चल रहा है।
साढ़ेसाती के प्रभाव को कम करने के उपाय:
ज्योतिषियों के मुताबिक शनि जयंती पर काली गाय की पूजा करें। पूजा के समय गाय के माथे पर तिलक लगाकर उसे लड्डू खिलाएं। अंत में परिक्रमा करें। इससे शनि दोष व साढ़ेसाती से मुक्ति प्राप्त होती है।
शनि जयंती के अवसर पर आप पीपल के पेड़ के पास सरसों के तेल का दीपक जलाएं। इसके अलावा पेड़ की पूजा करते हुए सात बार परिक्रमा करें। इससे शनिदेव की कृपा प्राप्त होती हैं।
इस दिन आप काले तिल और उड़द की दाल का दान करें। मान्यता है कि इससे शनि दोष से मुक्ति मिलती है।
शनि जयंती पर‘ॐ शं शनैश्चराय नमः’ मंत्र का 108 बार जाप करें। इससे साढ़ेसाती व शनि की ढैय्या से राहत मिलती है।
शनि जयंती पर शनिदेव को सरसों का तेल चढ़ाएं। साथ ही दान-दक्षिणा, पूजा-पाठ व असहाय लोगों की सहायता करें।
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