धर्म: घर के मंदिर में शिवलिंग स्थापित है तो इन नियमों का करना चाहिए पालन

Update: 2025-07-22 05:46 GMT
धर्म: सावन का महीना शिव की पूजा के लिए बहुत ही लाभकारी होता है। हर कोई शिव की पूजा और जलाभिषेक करता है। कुछ लोग घर पर ही शिव का जलाभिषेक करते हैं और घर में शिवलिंग स्थापित करते हैं, लेकिन इसके कुछ नियम और कायदे हैं जिन्हें जानना बेहद ज़रूरी है।
भले ही शिव भोले हैं, देवों के देव हैं, वे बहुत जल्दी प्रसन्न होते हैं लेकिन सरल होने के कारण उतनी ही जल्दी क्रोधित भी होते हैं। आज हम आपको शिवलिंग रखने के नियम बता रहे हैं, जिनका वर्णन पुराणों में तो है ही, साथ ही अन्य ग्रंथों में भी इनका उल्लेख किया गया है।
घर का शिवलिंग अंगूठे से बड़ा न हो:
शिवलिंग स्थापित करने से पहले यह ज़रूर देख लें कि शिवलिंग का आकार अंगूठे से बड़ा न हो क्योंकि ऐसा होने पर उसकी मूर्ति स्थापित करना ज़रूरी हो जाता है। इसका उल्लेख हमें शिवपुराण में भी मिलता है।
इस दिशा में मुख करके करें अभिषेक:
शिवलिंग पर अभिषेक करते समय आपका मुख हमेशा उत्तर दिशा की ओर होना चाहिए। दक्षिण और पूर्व दिशा की ओर मुख करके अभिषेक करना शुभ नहीं माना जाता है।
शिवलिंग सूखा न रहे:
अगर आपने अपने घर में शिवलिंग स्थापित किया है, तो हमेशा ध्यान रखें कि शिवलिंग सूखा न रहे। शिवलिंग पर प्रतिदिन जल चढ़ाना चाहिए और जलाभिषेक के लिए उस पर जलधारी भी रखनी चाहिए।
घर में स्थापित करें ये शिवलिंग:
अगर आप घर में शिवलिंग रख रहे हैं, तो आप पारद शिवलिंग या नर्मदेष शिवलिंग रख सकते हैं, ये शुभ माने जाते हैं और साथ ही इन्हें घर में रखने के लिए उपयुक्त भी बताया गया है।
घर में रखे शिवलिंग की प्रतिदिन पूजा करनी चाहिए और उस पर प्रतिदिन जल चढ़ाना चाहिए।
इन बर्तनों का प्रयोग न करें:
अगर आपने अपने घर में शिवलिंग स्थापित किया है, तो उस पर कभी भी प्लास्टिक या स्टील के बर्तन से जलाभिषेक न करें। हमेशा तांबे या पीतल के बर्तन से जल चढ़ाएँ।
शिव परिवार साथ रखें:
अगर आपने घर में शिवलिंग स्थापित किया है, तो यह न भूलें कि शिव परिवार भी वहाँ होना चाहिए। आपके मंदिर में भगवान गणेश और माता गौरी का होना भी बहुत ज़रूरी है।
तुलसी न चढ़ाएँ:
याद रखें, अगर आप घर पर शिवजी की पूजा करते हैं, तो भूलकर भी भगवान शिव को तुलसी न चढ़ाएँ, शिवजी की पूजा में इसे वर्जित माना जाता है।
चढ़ाया हुआ जल किसी बर्तन में डालें:
शिवजी पर चढ़ाया गया जल इकट्ठा करके किसी बर्तन में रख दें। इस जल को न तो फेंकें और न ही बहने दें।
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