मथुरा Mathura : मथुरा के वृंदावन स्थित संत प्रेमानंद महाराज के राधा केली कुंज आश्रम से जुड़े कुछ मामलों को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी और जूना अखाड़े के संत राधानंद गिरि ने आश्रम से जुड़े मामलों की निष्पक्ष जांच की मांग उठाई है। दोनों ने शिष्य रसिक दुलारी शरण की मौत के साथ-साथ नाबालिग बच्चों और कथित तौर पर लापता लोगों से जुड़े मामलों की भी जांच की मांग की है। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र और आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में पुलिस की जांच जारी है।
शिष्य की मौत के बाद उठे सवाल
विवाद की शुरुआत आश्रम से जुड़े 25 वर्षीय शिष्य दीपक लोधी उर्फ रसिक दुलारी शरण की मौत के बाद हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, 25 सितंबर को वृंदावन स्थित गुरु कृपा कुंज की चौथी मंजिल से गिरने के बाद उनकी मौत हो गई थी। पुलिस ने मामले की जांच शुरू की और घटनास्थल से मिले साक्ष्यों तथा सीसीटीवी फुटेज की जांच की।
मौत की परिस्थितियों को लेकर शुरुआत से ही कई सवाल सामने आए। मीडिया रिपोर्टों में बताया गया कि मृतक के शरीर पर गंभीर चोटें थीं और कमरे से एक ग्राइंडर भी मिला था। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक साक्ष्यों को जांच का हिस्सा बनाया है। कुछ रिपोर्टों के अनुसार, फुटेज में मृतक चौथी मंजिल पर जाता और कुछ देर बाद नीचे गिरता दिखाई देता है। मौत का वास्तविक कारण और घटना से पहले क्या हुआ था, इसे लेकर जांच अभी जारी है।
दिनेश फलाहारी ने क्या कहा?
श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश फलाहारी ने इस पूरे मामले को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मामले की सीबीआई जांच की मांग किए जाने की बात कही है। उनका कहना है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की गहराई से जांच होनी चाहिए और अगर किसी तरह की अनियमितता हुई है तो उसकी सच्चाई सामने आनी चाहिए।
फलाहारी ने आश्रम में नाबालिग बच्चों के रहने और कुछ परिवारों द्वारा अपने बच्चों को तलाशने के दावों का भी मुद्दा उठाया। उनके मुताबिक, ऐसे मामलों की जांच सिर्फ आरोपों के आधार पर नहीं बल्कि रिकॉर्ड, परिजनों की शिकायतों और पुलिस जांच के आधार पर की जानी चाहिए।
उन्होंने कथित तौर पर यह भी आरोप लगाया कि आश्रम से जुड़े मामलों में कई सवाल ऐसे हैं जिनके जवाब सामने आना बाकी हैं। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों को अभी जांच एजेंसियों की ओर से प्रमाणित तथ्य के तौर पर पेश नहीं किया गया है।
राधानंद गिरि ने भी उठाए सवाल
जूना अखाड़े के संत राधानंद गिरि ने भी रसिक दुलारी शरण की मौत की परिस्थितियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने घटना की निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि मौत से जुड़े सभी पहलुओं को सामने लाया जाना चाहिए।
राधानंद गिरि की ओर से घटना को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं, लेकिन इन आरोपों और आशंकाओं को जांच के अंतिम निष्कर्ष के रूप में नहीं देखा जा सकता। फिलहाल पुलिस और संबंधित जांच एजेंसियों के पास मौजूद सीसीटीवी, पोस्टमार्टम, फोरेंसिक और अन्य साक्ष्य ही घटना की वास्तविक तस्वीर स्पष्ट कर सकते हैं।
नाबालिग बच्चों को लेकर भी मामला चर्चा में
इस विवाद का दूसरा पहलू नाबालिग बच्चों से जुड़ा है। आरोप लगाने वालों ने दावा किया है कि कुछ
नाबालिग बच्चे
आश्रम में मौजूद हो सकते हैं और उनके परिजन उन्हें तलाश रहे हैं। ऐसे दावों की जांच के लिए बच्चों की पहचान, आश्रम के रिकॉर्ड, परिजनों की शिकायतों और पुलिस के दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण हो जाती है।
हाल ही में हाथरस के एक 17 वर्षीय युवक अनुज चौधरी के लापता होने का मामला भी सामने आया था। परिवार ने दावा किया था कि युवक ने प्रेमानंद महाराज से दीक्षा ली थी और उसके बाद वह घर नहीं लौटा। बाद में उसे बरसाना क्षेत्र के एक अन्य आश्रम में खोज लिया गया। पुलिस के मुताबिक, आश्रम में उसके ठहरने का रिकॉर्ड नहीं मिला था।
इस घटना से यह भी स्पष्ट होता है कि किसी व्यक्ति के आश्रम से जुड़े होने और उसके वहां रहने के दावे को रिकॉर्ड और जांच के जरिए सत्यापित करना जरूरी है।
आश्रम ने क्या कहा?
मामले के बीच प्रेमानंद महाराज के राधा केली कुंज ट्रस्ट की ओर से रसिक दुलारी शरण की मौत पर दुख जताया गया है। आश्रम ने पुलिस जांच में सहयोग करने की बात कही और लोगों से अफवाहों से बचने तथा आधिकारिक जानकारी पर भरोसा करने की अपील की है।
यह बयान इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि मामले को लेकर सोशल मीडिया और अलग-अलग माध्यमों में कई तरह के दावे सामने आ रहे हैं। ऐसे में किसी भी आरोप को जांच के निष्कर्ष से पहले अंतिम सत्य मानना उचित नहीं होगा।
पुलिस जांच में क्या सामने आया?
पुलिस की जांच में सीसीटीवी फुटेज, घटनास्थल से मिले सामान और फोरेंसिक साक्ष्यों को देखा जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, फुटेज में रसिक दुलारी शरण के चौथी मंजिल से गिरने की घटना सामने आई है। वहीं, मौत से पहले की परिस्थितियों और कमरे में मिले सामान की भी जांच की जा रही है।
मामले में पोस्टमार्टम और फोरेंसिक जांच की रिपोर्ट भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि घटना आत्महत्या थी, दुर्घटना थी या इसके पीछे कोई अन्य कारण था।
अब आगे क्या?
फिलहाल पूरे मामले में सबसे अहम बात यही है कि आरोप और आधिकारिक जांच के निष्कर्षों को अलग-अलग रखा जाए। दिनेश फलाहारी और राधानंद गिरि ने सीबीआई जांच की मांग की है, जबकि स्थानीय स्तर पर पुलिस पहले से मामले की जांच कर रही है।
नाबालिग बच्चों और कथित गुमशुदगी से जुड़े दावों की भी यदि शिकायतें सामने आई हैं तो उनकी स्वतंत्र रूप से जांच जरूरी है। वहीं रसिक दुलारी शरण की मौत में सीसीटीवी, पोस्टमार्टम और फोरेंसिक साक्ष्यों के आधार पर निष्कर्ष तक पहुंचना होगा।
कुल मिलाकर, प्रेमानंद महाराज के आश्रम से जुड़े मामलों को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं, लेकिन अभी कई दावे जांच के दायरे में हैं। इसलिए अंतिम निष्कर्ष जांच एजेंसियों की रिपोर्ट और आधिकारिक कार्रवाई के बाद ही सामने आएगा।
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