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बिहार के विश्वविद्यालयों में अब 4 साल की डिग्री के साथ अप्रेंटिसशिप

Kavita2
4 Oct 2026 12:10 PM IST
बिहार के विश्वविद्यालयों में अब 4 साल की डिग्री के साथ अप्रेंटिसशिप
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पटना। बिहार के विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। राज्य में चार वर्षीय स्नातक शिक्षुता अंतर्निहित डिग्री कार्यक्रम यानी AFDP के तहत सात नए पाठ्यक्रम शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल सह कुलाधिपति ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 के तहत आने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए संशोधित अध्यादेश एवं विनियमों को मंजूरी दे दी है।

इस मंजूरी के बाद अब विद्यार्थियों को पारंपरिक तरीके से केवल कक्षा आधारित पढ़ाई तक सीमित नहीं रहना होगा। चार वर्षीय स्नातक पाठ्यक्रम के दौरान उन्हें संबंधित क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप यानी शिक्षुता का अवसर भी मिलेगा। इसका उद्देश्य उच्च शिक्षा को रोजगारपरक बनाने के साथ विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान ही व्यावहारिक अनुभव उपलब्ध कराना है।

राज्यपाल सह कुलाधिपति की ओर से दी गई स्वीकृति को 30 सितंबर 2026 से प्रभावी माना जाएगा। संशोधित अध्यादेश एवं विनियमों के लागू होने के बाद संबंधित विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में AFDP के तहत निर्धारित पाठ्यक्रमों को संचालित करने का रास्ता खुल गया है।

चार वर्षीय डिग्री के साथ अप्रेंटिसशिप की व्यवस्था विद्यार्थियों के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। सामान्य तौर पर स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं को नौकरी या पेशेवर क्षेत्र में प्रवेश के लिए अलग से प्रशिक्षण और अनुभव हासिल करना पड़ता है। AFDP के तहत पढ़ाई के साथ ही संबंधित क्षेत्र में प्रशिक्षण मिलने से विद्यार्थियों को कार्यस्थल की जरूरतों को समझने का अवसर मिलेगा।

इस कार्यक्रम की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि डिग्री और अप्रेंटिसशिप को एक ही शैक्षणिक ढांचे के भीतर जोड़ा गया है। विद्यार्थी अपने चुने हुए क्षेत्र में चार वर्ष की स्नातक शिक्षा पूरी करने के साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण हासिल कर सकेंगे। इससे उन्हें संबंधित क्षेत्र में काम करने के तौर-तरीकों, तकनीकी जरूरतों और पेशेवर वातावरण की जानकारी मिल सकती है।

सात नए पाठ्यक्रमों के शुरू होने से विद्यार्थियों के सामने उच्च शिक्षा के दौरान करियर के नए विकल्प खुलने की उम्मीद है। हालांकि इन पाठ्यक्रमों में प्रवेश, सीटों की संख्या, पात्रता, अप्रेंटिसशिप की अवधि और संबंधित संस्थानों की भूमिका जैसी विस्तृत जानकारी विश्वविद्यालयों की ओर से आगे जारी की जाएगी।

संशोधित अध्यादेश और विनियमों को मंजूरी मिलने का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि अब AFDP को संस्थागत स्तर पर लागू करने के लिए नियामकीय आधार उपलब्ध हो गया है। बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम के दायरे में आने वाले संस्थानों में कार्यक्रम को नियमों के अनुरूप संचालित किया जा सकेगा।

उच्च शिक्षा में पढ़ाई और रोजगार के बीच अंतर को कम करना वर्तमान समय की बड़ी चुनौती है। कई बार विद्यार्थी डिग्री तो हासिल कर लेते हैं, लेकिन नौकरी के लिए जरूरी व्यावहारिक अनुभव और कौशल की कमी महसूस करते हैं। अप्रेंटिसशिप आधारित शिक्षा इस अंतर को कम करने का एक माध्यम बन सकती है।

AFDP के तहत विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ संबंधित क्षेत्र में कामकाजी अनुभव प्राप्त करने का अवसर मिलेगा। इससे उनके तकनीकी और व्यावहारिक कौशल में सुधार की संभावना है। साथ ही वे अपनी पढ़ाई के दौरान ही यह समझ सकेंगे कि उनके चुने हुए क्षेत्र में वास्तविक कार्य किस तरह किया जाता है।

इस कार्यक्रम का लाभ उन विद्यार्थियों को विशेष रूप से मिल सकता है जो स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के तुरंत बाद रोजगार के क्षेत्र में जाना चाहते हैं। यदि विद्यार्थी के पास डिग्री के साथ संबंधित क्षेत्र का प्रशिक्षण और अनुभव भी होगा तो उसके लिए नौकरी के अवसर तलाशना अपेक्षाकृत आसान हो सकता है। हालांकि रोजगार की गारंटी कार्यक्रम का स्वतः हिस्सा नहीं होगी।

अप्रेंटिसशिप के दौरान विद्यार्थियों को संस्थानों और संबंधित कार्यक्षेत्र के बीच तालमेल का लाभ भी मिल सकता है। इससे शैक्षणिक पाठ्यक्रम और उद्योग या कार्यस्थल की वास्तविक जरूरतों के बीच बेहतर संबंध स्थापित करने में मदद मिल सकती है।

बिहार में उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर लंबे समय से इस बात पर जोर दिया जाता रहा है कि विश्वविद्यालयों में पढ़ाई के साथ कौशल विकास और रोजगारपरक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। AFDP इसी दिशा में एक कदम माना जा सकता है। चार वर्षीय डिग्री संरचना के भीतर अप्रेंटिसशिप जोड़ने से विद्यार्थियों को अकादमिक ज्ञान के साथ व्यावहारिक समझ भी विकसित करने का अवसर मिलेगा।

राज्यपाल सह कुलाधिपति की मंजूरी के बाद अब विश्वविद्यालयों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। संबंधित संस्थानों को नए पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए आवश्यक शैक्षणिक और प्रशासनिक व्यवस्था तैयार करनी होगी। अप्रेंटिसशिप के लिए संबंधित संस्थानों या कार्यक्षेत्रों के साथ समन्वय की व्यवस्था भी करनी पड़ सकती है।

विद्यार्थियों के लिए कार्यक्रम की संरचना को स्पष्ट करना भी जरूरी होगा। उन्हें यह जानकारी देनी होगी कि चार वर्षीय पाठ्यक्रम में अप्रेंटिसशिप किस चरण में होगी, उसका मूल्यांकन किस प्रकार किया जाएगा और डिग्री के अंतिम परिणाम में इसका क्या योगदान होगा। इन सभी पहलुओं की जानकारी विश्वविद्यालयों के स्तर पर जारी नियमों और निर्देशों से स्पष्ट होगी।

AFDP के तहत पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों को केवल किताबों और व्याख्यानों पर निर्भर रहने के बजाय अपने विषय से जुड़े वास्तविक काम को समझने का अवसर मिल सकता है। उदाहरण के तौर पर किसी पेशेवर या तकनीकी क्षेत्र से जुड़े विद्यार्थी को संबंधित संस्थान में कामकाज की प्रक्रिया देखने और उसमें प्रशिक्षण लेने का अवसर मिल सकता है।

इस तरह की शिक्षा व्यवस्था से विद्यार्थियों में संवाद क्षमता, समस्या समाधान, टीमवर्क और पेशेवर अनुशासन जैसे कौशल विकसित होने की संभावना रहती है। हालांकि इन कौशलों का वास्तविक विकास अप्रेंटिसशिप की गुणवत्ता और संबंधित संस्थानों द्वारा उपलब्ध कराए जाने वाले प्रशिक्षण पर निर्भर करेगा।

सात नए पाठ्यक्रमों की शुरुआत का रास्ता साफ होना बिहार के उच्च शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। इससे विद्यार्थियों को डिग्री हासिल करने के साथ-साथ अपने क्षेत्र में अनुभव लेने का अवसर मिलेगा। आने वाले समय में कार्यक्रम की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि विश्वविद्यालय और संबंधित संस्थान इसे किस तरह लागू करते हैं।

संशोधित अध्यादेश एवं विनियमों की स्वीकृति के बाद अब कार्यक्रम के क्रियान्वयन से जुड़े अगले चरण पर काम किया जा सकता है। संस्थानों को पाठ्यक्रम, प्रवेश प्रक्रिया, अप्रेंटिसशिप व्यवस्था और मूल्यांकन से संबंधित नियमों को लागू करना होगा।

30 सितंबर 2026 से प्रभावी मानी गई यह मंजूरी बिहार के उच्च शिक्षा ढांचे में व्यावहारिक प्रशिक्षण को संस्थागत रूप देने की दिशा में महत्वपूर्ण है। विद्यार्थियों को पढ़ाई के साथ-साथ वास्तविक कार्यक्षेत्र का अनुभव मिलने से उनके करियर की तैयारी बेहतर हो सकती है।

हालांकि अभी यह स्पष्ट होना बाकी है कि सातों पाठ्यक्रम किन-किन विषयों में शुरू किए जाएंगे और इनमें प्रवेश लेने वाले विद्यार्थियों के लिए अप्रेंटिसशिप की व्यवस्था किस तरह की होगी। इन जानकारियों के लिए संबंधित विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा संस्थानों की ओर से विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए जाने की उम्मीद है।

कुल मिलाकर, बिहार के विश्वविद्यालयों में चार वर्षीय स्नातक शिक्षुता अंतर्निहित डिग्री कार्यक्रम यानी AFDP के तहत सात नए पाठ्यक्रम शुरू करने का रास्ता साफ हो गया है। राज्यपाल सह कुलाधिपति ने बिहार राज्य विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 और पटना विश्वविद्यालय अधिनियम, 1976 के तहत आने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों के संशोधित अध्यादेश एवं विनियमों को मंजूरी दे दी है। यह स्वीकृति 30 सितंबर 2026 से प्रभावी मानी जाएगी। कार्यक्रम के तहत विद्यार्थियों को चार वर्षीय स्नातक शिक्षा के साथ अपने संबंधित क्षेत्र में अप्रेंटिसशिप का अवसर मिलेगा। इससे उच्च शिक्षा को व्यावहारिक प्रशिक्षण और रोजगारपरक कौशल से जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद है।

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