Nag Panchami Vrat Katha: इस कथा के बिना अधूरा है नाग पंचमी का व्रत, पढ़ें ये पावन कथा
Nag Panchami Vrat Katha: नाग पंचमी का त्योहार हर साल श्रावण मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. यह दिन नागों की पूजा के लिए समर्पित है और मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से सर्प भय से मुक्ति मिलती है और घर में सुख-समृद्धि आती है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि नाग पंचमी का व्रत एक प्राचीन कथा के बिना अधूरा माना जाता है? आइए, आज हम आपको उसी पावन कथा से परिचित कराते हैं, जो नाग पंचमी के महत्व को और भी बढ़ा देती है|
नाग पंचमी की पौराणिक कथा:
प्राचीन काल की बात है, एक नगर में एक धनी सेठजी रहते थे. उनके सात पुत्र थे और सातों ही विवाहित थे. सेठजी के सभी पुत्रवधुओं में से सबसे छोटे पुत्र की पत्नी अत्यंत चरित्रवान, सुशील और श्रेष्ठ थी. उसके गुणों की ख्याति दूर-दूर तक फैली हुई थी. हालांकि, उसका कोई भाई नहीं था, जिसकी कमी उसे कभी-कभी महसूस होती थी. एक दिन की बात है, सेठजी की सबसे बड़ी बहू ने घर की लिपाई-पुताई के लिए पीली मिट्टी लाने का विचार किया. उसने अपनी सभी देवरानियों को अपने साथ चलने के लिए कहा. सभी बहुएं धलिया (मिट्टी रखने का पात्र) और खुरपी (मिट्टी खोदने का औजार) लेकर पास के एक स्थान पर मिट्टी खोदने लगीं.जब वे मिट्टी खोद रही थीं, तभी अचानक एक सांप बिल से निकलकर उनके सामने आ गया|
सांप को देखते ही बड़ी बहू ने भयभीत होकर अपनी खुरपी उठाई और उसे मारने की कोशिश करने लगी. यह देखकर छोटी बहू ने तुरंत अपनी बड़ी बहू को रोका. उसने कहा, “दीदी! इसे मत मारो. यह एक निर्दोष प्राणी है.” छोटी बहू के इस हस्तक्षेप से बड़ी बहू ने सांप को नहीं मारा और सांप उस स्थान से हटकर एक ओर जाकर बैठ गया|
नाग देवता का आशीर्वाद और नाग पंचमी का महत्व:
छोटी बहू के इस दयालु और निस्वार्थ कार्य से नाग देवता बहुत ही प्रसन्न हुए. जिसके बाद नाग देवता प्रकट होते हैं छोटी बहू को आशीर्वाद देते हैं, जिससे नाग पंचमी के व्रत का महत्व स्थापित होता है. इसलिए यह कथा हमें सिखाती है कि प्राणियों के प्रति दया और करुणा का भाव रखना कितना महत्वपूर्ण है. माना जाता है कि जो व्यक्ति इस कथा को सुनता या सुनाता है, उसे नाग देवता का आशीर्वाद प्राप्त होता है और वह सर्प दंश के भय से मुक्त रहता है|
इस दिन नागों की मूर्ति या चित्र पर दूध, कुशा, पुष्प, चावल आदि अर्पित करें.
सांप को दूध पिलाने की परंपरा का पालन करते समय पर्यावरण का ध्यान रखें.
सांपों को न मारने और उनके संरक्षण का संकल्प लें.
बहनें इस दिन भाई की लंबी उम्र के लिए पूजा करें और रक्षा सूत्र बांधें|