Sawan 2026: शिव चालीसा पाठ से दूर होंगे सारे कष्ट

Update: 2026-07-30 12:17 GMT
Sawan 2026 ज्योतिष न्यूज़: भगवान भोलेनाथ को समर्पित सावन माह का शुभारंभ हो चुका है। हिंदू धर्म में इस पूरे महीने का विशेष महत्व माना जाता है। मान्यता है कि, सावन में सच्चे मन से भगवान शिव की पूजा-अर्चना और भक्ति करने से व्यक्ति के जाने-अनजाने में हुए पापों का प्रभाव कम होता है। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि आती है और मानसिक शांति की प्राप्ति होती हैं। कहा जाता है कि सावन के प्रत्येक दिन भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद भक्तों पर बना रहता है, इसलिए इस माह में की गई साधना का कई गुना अधिक फल मिलता है। सावन के दौरान जलाभिषेक, व्रत, दान-पुण्य और मंत्र जाप के साथ-साथ शिव चालीसा का भी नियमित पाठ करना चाहिए। यह अत्यंत शुभ माना गया है।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,
शिव चालीसा का पाठ करने से जीवन के कष्ट दूर होते हैं और मन से नकारात्मकता दूर होने लगती हैं। ऐसे में आइए इस शक्तिशाली चालीसा के बारे में जानते हैं।
शिव चालीसा पाठ के लाभ
शिव चालीसा का नियमित पाठ मन को शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है।
महादेव की कृपा से मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।
घर में सुख, शांति और सकारात्मक बदलाव का संचार होता है।
योग्य और मनचाहा साथी मिलने के योग बनते हैं।
वैवाहिक जीवन में प्रेम, सामंजस्य और खुशहाली बनी रहती है।
जीवन में स्थिरता, आत्मविश्वास और संतुलन आता है।
माता के साथ रिश्ते में प्रेम, सम्मान और मधुरता बढ़ती है।
शिव चालीसा
श्री गणेश गिरिजा सुवन, मंगल मूल सुजान।
कहत अयोध्यादास तुम, देहु अभय वरदान॥
जय गिरिजा पति दीन दयाला। सदा करत संतन प्रतिपाला॥
भाल चंद्रमा सोहत नीके। कानन कुण्डल नागफनी के॥
अंग गौर शिर गंग बहाए। मुण्डमाल तन छार लगाए॥
वस्त्र खाल बाघंबर सोहे। छवि को देख नाग मुनि मोहे॥
मैना मातु की ह्वै दुलारी। बाम अंग सोहत छवि न्यारी॥
कर त्रिशूल सोहत छवि भारी। करत सदा शत्रुन क्षयकारी॥
नन्दि गणेश सोहै तहं कैसे। सागर मध्य कमल हैं जैसे॥
कार्तिक श्याम और गणराऊ। या छवि को कहि जात न काऊ॥
देवन जबहीं जाय पुकारा। तब ही दुख प्रभु आप निवारा॥
किया उपद्रव तारक भारी। देवन सब मिलि तुमहिं जुहारी॥
तुरत षडानन आप पठायउ। लवनिमेष महं मारि गिरायउ॥
आप जलंधर असुर संहारा। सुयश तुम्हार विदित संसारा॥
त्रिपुरासुर सन युद्ध मचाई। सबहिं कृपा कर लीन बचाई॥
किया तपहिं भागीरथ भारी। पुरब प्रतिज्ञा तसु पुरारी॥
दानिन महं तुम सम कोउ नाहीं। सेवक स्तुति करत सदाहीं॥
वेद नाम महिमा तव गाई। अकथ अनादि भेद नहिं पाई॥
प्रगट उदधि मंथन में ज्वाला। जरे सुरासुर भये विहाला॥
कीन्ह दया तहँ करी सहाई। नीलकण्ठ तब नाम कहाई॥
पूजन रामचंद्र जब कीन्हा। जीत के लंक विभीषण दीन्हा॥
सहस कमल में हो रहे धारी। कीन्ह परीक्षा तबहिं पुरारी॥
एक कमल प्रभु राखेउ जोई। कमल नयन पूजन चहं सोई॥
कठिन भक्ति देखी प्रभु शंकर। भये प्रसन्न दिए इच्छित वर॥
जय जय जय अनंत अविनाशी। करत कृपा सब के घटवासी॥
दुष्ट सकल नित मोहि सतावै । भ्रमत रहे मोहि चैन न आवै॥
त्राहि त्राहि मैं नाथ पुकारो। यहि अवसर मोहि आन उबारो॥
लै त्रिशूल शत्रुन को मारो। संकट से मोहि आन उबारो॥
मातु पिता भ्राता सब कोई। संकट में पूछत नहिं कोई॥
स्वामी एक है आस तुम्हारी। आय हरहु अब संकट भारी॥
धन निर्धन को देत सदाहीं। जो कोई जांचे वो फल पाहीं॥
अस्तुति केहि विधि करौं तुम्हारी। क्षमहु नाथ अब चूक हमारी॥
शंकर हो संकट के नाशन। मंगल कारण विघ्न विनाशन॥
योगी यति मुनि ध्यान लगावैं। नारद शारद शीश नवावैं॥
नमो नमो जय नमो शिवाय। सुर ब्रह्मादिक पार न पाय॥
जो यह पाठ करे मन लाई। ता पार होत है शम्भु सहाई॥
ॠनिया जो कोई हो अधिकारी। पाठ करे सो पावन हारी॥
पुत्र हीन कर इच्छा कोई। निश्चय शिव प्रसाद तेहि होई॥
पण्डित त्रयोदशी को लावे। ध्यान पूर्वक होम करावे ॥
त्रयोदशी ब्रत करे हमेशा। तन नहीं ताके रहे कलेशा॥
धूप दीप नैवेद्य चढ़ावे। शंकर सम्मुख पाठ सुनावे॥
जन्म जन्म के पाप नसावे। अन्तवास शिवपुर में पावे॥
कहे अयोध्या आस तुम्हारी। जानि सकल दुःख हरहु हमारी॥
॥दोहा॥
नित्त नेम कर प्रातः ही, पाठ करौं चालीसा।
तुम मेरी मनोकामना, पूर्ण करो जगदीश॥
मगसर छठि हेमन्त ॠतु, संवत चौसठ जान।
अस्तुति चालीसा शिवहि, पूर्ण कीन कल्याण
Tags:    

Similar News