Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि पर जरूर जाप करें ये महामंत्र, शिवपुराण में है इस मंत्र की महिमा का वर्णन

Update: 2026-02-10 04:50 GMT
Mahashivratri 2026: महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को है। यह पर्व भगवान शिव और माता पार्वती की उपासना के साथ हमें तन से स्वस्थ और मन से निर्मल बने रहने का संदेश देता है। शिवपुराण में महाशिवरात्रि का महत्व बताते हुए कहा गया है कि जो प्राणी इस दिन सच्चे मन से शिवजी की आराधना करता है, वह वर्ष भर किए उपवासों से कई गुणा पुण्य की प्राप्ति कर लेता है।
शिवपुराण में पंचाक्षर मंत्र का महत्व:
शिवपूजा का सर्वमान्य पंचाक्षर मंत्र ‘ॐ नमः शिवाय’है, जो प्रारंभ में ‘ॐ’के संयोग से षडाक्षर हो जाता है और भोलेनाथ को शीघ्र ही प्रसन्न कर देता है। यह मंत्र शिव तत्व है, जो सर्वज्ञ, परिपूर्ण और स्वभावतः निर्मल माना गया है। इसके समान अन्य कोई मंत्र नहीं है। इस मंत्र के हृदय में समाहित होने पर संपूर्ण शास्त्र ज्ञान और शुभ कर्मों का बोध स्वतः प्राप्त होने लगता है।
मंत्र की उत्पत्ति और पौराणिक मान्यता:
शिवपुराण के अनुसार एक बार माता पार्वती ने भगवान शिव से प्रश्न किया कि कलियुग में समस्त पापों के नाश के लिए किस मंत्र का आश्रय लेना चाहिए। तब भगवान शिव ने बताया कि प्रलय काल में, जब सृष्टि का सर्वस्व समाप्त हो गया था, तब उनकी आज्ञा से समस्त वेद और शास्त्र पंचाक्षर मंत्र में विलीन हो गए थे। सर्वप्रथम शिवजी ने अपने पाँच मुखों से यह मंत्र ब्रह्माजी को प्रदान किया। शिवपुराण में इस मंत्र के ऋषि वामदेव और देवता स्वयं भगवान शिव माने गए हैं।
मंत्र जप के आध्यात्मिक और वैज्ञानिक लाभ:
विभिन्न वैज्ञानिक शोधों में यह सिद्ध किया गया है कि मंत्रों के उच्चारण से उत्पन्न होने वाली ऊर्जा तरंगें मन और शरीर को सकारात्मकता की ओर ले जाती हैं तथा उत्तम स्वास्थ्य प्रदान करती हैं। यदि यह जप महाशिवरात्रि के पावन दिन किया जाए तो उसका फल कई गुना बढ़ जाता है। स्कंदपुराण में कहा गया है कि जिसके मन में ‘ॐ नमः शिवाय’ महामंत्र का वास हो जाता है, उसके लिए अन्य मंत्र, तीर्थ, तप और यज्ञों की आवश्यकता नहीं रह जाती। यह मंत्र मोक्ष प्रदान करने वाला और पापों का नाश करने वाला है।
पंचाक्षर मंत्र जप से जीवन में शुभ फल:
वेद-पुराणों के अनुसार शिव अर्थात सृष्टि के सृजनकर्ता को प्रसन्न करने के लिए केवल ‘ॐ नमः शिवाय’ का जप ही पर्याप्त माना गया है। इस मंत्र के जप से दुःख और कष्ट दूर होते हैं तथा महाकाल की असीम कृपा प्राप्त होती है। नियमित रूप से घर में इस मंत्र का जप करने से वास्तु दोष दूर होते हैं और वातावरण में सुख-शांति बनी रहती है।
मंत्र जप सदैव पूर्व या उत्तर दिशा की ओर मुख करके करना चाहिए। शिवालय, तीर्थ स्थान अथवा घर के स्वच्छ, शांत और एकांत स्थान में बैठकर जप करना उत्तम माना गया है। प्रतिदिन कम से कम 108 बार रुद्राक्ष की माला से जप करना चाहिए, क्योंकि रुद्राक्ष भगवान शिव को अत्यंत प्रिय है। पवित्र नदी के तट पर शिवलिंग की स्थापना और पूजन के बाद जप करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। ‘ॐ नमः शिवाय’ मंत्र का जप किसी भी समय किया जा सकता है।
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