लड्डू गोपाल की छठी आज श्रद्धालु करेंगे विशेष श्रृंगार और पूजा
छठी पर बन रहा शुभ संयोग पूजा
नई दिल्ली: भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव के बाद मनाया जाने वाला श्रीकृष्ण छठी उत्सव आज घर-घर श्रद्धा और भक्ति के साथ मनाया जाएगा। जन्माष्टमी के छह दिन बाद मनाई जाने वाली इस परंपरा में लड्डू गोपाल की विशेष पूजा, श्रृंगार और भोग अर्पित किया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, जिस तरह किसी नवजात शिशु के जन्म के छठे दिन छठी मनाई जाती है, उसी परंपरा के तहत भगवान श्रीकृष्ण की छठी भी मनाई जाती है। इस दिन भक्त बाल गोपाल को नए वस्त्र पहनाकर उनका विशेष श्रृंगार करते हैं और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
श्रीकृष्ण छठी की तिथि
इस वर्ष श्रीकृष्ण जन्माष्टमी 4 सितंबर को मनाई गई थी। इसके छह दिन बाद 10 सितंबर 2026 को कान्हाजी की छठी मनाने की परंपरा है। कई स्थानों पर मंदिरों में भी विशेष आयोजन किए जाते हैं।
पूजा विधि
सुबह स्नान करके साफ कपड़े पहनें।
पूजा स्थल को साफ कर चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं।
लड्डू गोपाल का पंचामृत से अभिषेक करें।
नए वस्त्र पहनाकर चंदन, फूल और माला से श्रृंगार करें।
दीप जलाकर भगवान श्रीकृष्ण की आरती करें।
परिवार की सुख-शांति और खुशहाली की प्रार्थना करें।
कान्हा को लगाएं खास भोग
श्रीकृष्ण छठी पर भगवान को कई प्रकार के पकवानों का भोग लगाया जाता है। मान्यता के अनुसार इस दिन कढ़ी-चावल, खीर, मिठाई, फल और माखन-मिश्री का भोग विशेष रूप से शुभ माना जाता है।
छठी का धार्मिक महत्व
मान्यता है कि श्रीकृष्ण की छठी पर श्रद्धा से पूजा करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है और भगवान कृष्ण की कृपा प्राप्त होती है। भक्त इस दिन भजन-कीर्तन करते हैं और बाल गोपाल के जन्म की खुशियां मनाते हैं।
शुभ मुहूर्त
श्रीकृष्ण छठी की पूजा के लिए सुबह और दोपहर के शुभ समय में पूजा करना उत्तम माना जाता है। अलग-अलग स्थानों के पंचांग के अनुसार मुहूर्त में अंतर हो सकता है, इसलिए स्थानीय पंचांग के अनुसार पूजा करना बेहतर माना जाता है।