Mahanavami 2025: महानवमी पर ऐसे करें देवी सिद्धिदात्री की पूजा, खुलेंगे धन और सौभाग्य के द्वार

Update: 2025-09-30 05:48 GMT
Mahanavami 2025: पंचांग के अनुसार, नवरात्रि का नौवाँ दिन, महानवमी, जो 2025 में 1 अक्टूबर को पड़ रही है, देवी सिद्धिदात्री को समर्पित है। यह दिन नवरात्रि का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन है। मान्यता के अनुसार, देवी सिद्धिदात्री की पूजा और हवन करने से भक्तों को अष्ट सिद्धियाँ और नौ निधियाँ प्राप्त होती हैं। आइए जानें कि इस विशेष दिन पर पूजा कैसे करें ताकि देवी माँ की कृपा से आपके घर में धन और सौभाग्य के द्वार खुल जाएँ।
महानवमी कब है?
नवरात्रि के नौवें दिन को महानवमी कहा जाता है। इस दिन देवी दुर्गा के नौवें स्वरूप, देवी सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है।
नवमी तिथि प्रारंभ: 30 सितंबर 2025, शाम 6:06 बजे
नवमी तिथि समाप्त: 1 अक्टूबर 2025, शाम 7:01 बजे
महानवमी पूजा: उदया तिथि के अनुसार, महानवमी बुधवार, 1 अक्टूबर 2025 को मनाई जाएगी।
नवमी हवन का शुभ मुहूर्त: 1 अक्टूबर 2025, सुबह 6:14 बजे से शाम 6:07 बजे तक।
माँ सिद्धिदात्री पूजा विधि:
माँ सिद्धिदात्री सभी प्रकार की सिद्धियाँ प्रदान करने वाली देवी हैं। इनकी पूजा करने से ज्ञान, बल और मोक्ष की प्राप्ति होती है। सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर हाथ में जल, पुष्प और अक्षत लेकर माँ सिद्धिदात्री की पूजा और व्रत का संकल्प लें। कलश में स्थापित देवताओं की पूजा करें। माँ सिद्धिदात्री की मूर्ति या चित्र को गंगाजल से शुद्ध करें। उन्हें लाल वस्त्र और सोलह श्रृंगार अर्पित करें।
माँ सिद्धिदात्री को तिल का नैवेद्य प्रिय है। आप हलवा, पूरी और छोले का भी भोग लगा सकते हैं। पूजा के दौरान माँ के मंत्रों का जाप करें। उनका बीज मंत्र है: "ॐ ह्रीं क्लीं ऐं सिद्धये नमः।" इसके बाद माँ दुर्गा की आरती करें। महानवमी पर हवन का विशेष महत्व है। नौवें दिन हवन करके कन्या पूजन करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
महानवमी पर कन्या पूजन का महत्व और विधि:
कन्या पूजन के बिना नवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि नौ कन्याओं में देवी दुर्गा के नौ रूप विराजमान होते हैं।
कन्याओं की संख्या: नौ कन्याओं और एक बालक (जिसे भैरव के रूप में पूजा जाता है) को आमंत्रित करें।
पैर धोना: जब कन्याएँ आपके घर आएँ, तो उनके पैर धोकर उन्हें साफ़ आसन पर बिठाएँ।
तिलक और आरती: उनके माथे पर रोली और चावल का तिलक लगाएँ, और फिर कपूर या घी के दीपक से आरती करें।
भोजन: कन्याओं को हलवा, पूरी और चने का सात्विक भोजन कराएँ।
दक्षिणा और उपहार: भोजन के बाद, उन्हें यथाशक्ति दक्षिणा और उपहार देकर उनका आशीर्वाद लें। उन्हें विदा करते समय उनके चरण स्पर्श अवश्य करें।
Tags:    

Similar News