Religion Spirituality,धर्म अध्यात्म : उत्तर भारत के पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश और दिल्ली में हर साल 13 जनवरी को लोहड़ी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। यह पर्व मुख्य रूप से सर्दियों के अंत और रबी की फसल की कटाई का प्रतीक माना जाता है। लोग अग्निकुंड के चारों ओर इकट्ठा होकर गीत-संगीत, भांगड़ा और गिद्दा का आनंद लेते हैं।
लोहड़ी का त्योहार मकर संक्रांति के ठीक एक दिन पहले आता है। मकर संक्रांति को सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का संकेत माना जाता है। इस दिन सूर्य उत्तरायण होते हैं और दिन के उजाले में वृद्धि होती है। मकर संक्रांति 14 जनवरी को मनाई जाएगी, जबकि लोहड़ी 13 जनवरी को होगी। इस तरह लोहड़ी नए साल और नई फसल का स्वागत करने का पर्व भी है।
त्योहार के दौरान परिवार और समुदाय के लोग खेतों से तिल, मूंगफली, गजक, गुड़ और अन्य व्यंजन एकत्र करके अग्नि में अर्पित करते हैं। इस परंपरा का अर्थ है नए साल में खुशहाली, समृद्धि और उन्नति की कामना। बच्चों और युवाओं के लिए यह दिन खास होता है क्योंकि वे भी अपनी खुशी और उत्साह को परिवार और दोस्तों के साथ बांटते हैं।
विशेष रूप से, लोहड़ी का पर्व सामाजिक मेल-जोल और समुदायिक एकता का भी प्रतीक है। लोग अपने घरों और गांवों में मिलकर गीत गाते, नृत्य करते और विशेष व्यंजनों का आनंद लेते हैं। यह पर्व हर उम्र के लोगों के लिए आनंद और उत्साह का अवसर है।
इस त्योहार की सांस्कृतिक और धार्मिक महत्ता भी बहुत है। इसे केवल फसल का उत्सव ही नहीं, बल्कि जीवन में खुशहाली, स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना के रूप में देखा जाता है। अग्नि के चारों ओर घूमना और तिल, मूंगफली तथा गुड़ का अर्पण करना शुभ माना जाता है। धार्मिक मान्यता है कि इससे परिवार में सुख-शांति और धन-समृद्धि बनी रहती है।
लोहड़ी का पर्व पंजाब और हरियाणा में विशेष रूप से बड़े पैमाने पर मनाया जाता है। इसके अलावा दिल्ली, हिमाचल प्रदेश और उत्तर भारत के अन्य हिस्सों में भी लोग इसे बड़े उत्साह के साथ मनाते हैं। इस दिन बच्चे घर-घर जाकर ‘लोहड़ी’ गाने गाते हैं और लोगों से मिठाई और व्यंजन प्राप्त करते हैं।
सर्दियों की समाप्ति और रबी की फसल के आगमन के प्रतीक के रूप में लोहड़ी का पर्व न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक मेल-जोल, खुशी और उत्साह का भी अवसर है। यह पर्व लोगों को प्रकृति और कृषि से जोड़ने का काम करता है और समुदाय में सहयोग और एकता की भावना को मजबूत करता है।
इस प्रकार, 13 जनवरी को मनाई जाने वाली लोहड़ी न केवल पंजाब और दिल्ली के लोगों के लिए बल्कि पूरे उत्तर भारत में खुशियों का पर्व है। अगली तारीख यानी 14 जनवरी को मकर संक्रांति के साथ यह पर्व फसल उत्सव और नई उमंग का प्रतीक बन जाता है।
मुख्य बातें:
पर्व: लोहड़ी
तिथि: 13 जनवरी 2026
क्षेत्र: पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, दिल्ली
महत्व: सर्दियों का अंत, रबी फसल की कटाई, खुशियों और समृद्धि का प्रतीक
परंपरा: अग्निकुंड के चारों ओर तिल, मूंगफली, गुड़ अर्पित करना, गीत-संगीत, भांगड़ा और गिद्दा
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