Kamika Ekadashi 2025: कामिका एकादशी व्रत कब और कैसे रखें, यहां पढ़ें कामिका एकादशी व्रत रखने की पूरी विधि और समय
Kamika Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी के व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. जितना महत्वपूर्ण एकादशी का व्रत होता है उतना ही महत्वपूर्ण एकादशी व्रत का पारण भी होता है. एकादशी के व्रत को समाप्त करने को पारण कहा जाता है. एकादशी के व्रत का पारण व्रत के अगले दिन किया जाता है|
सावन माह में कृष्ण पक्ष की एकादशी को कामिका एकादशी कहा जाता है. इस एकादशी का विशेष महत्व है. संयोग से कामिका एकादशी का व्रत सावन के दूसरे सोमवार के दिन रखा गया, साथ ही एकादशी व्रत का पारण मंगला गौरी व्रत के दिन किया जाएगा. एकादशी का व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है. सावन और एकादशी व्रत के शुभ संयोग से आप भगवान शिव के साथ-साथ विष्णु जी की कृपा भी प्राप्त कर सकते हैं|
कब करें एकादशी के व्रत का पारण?
एकादशी व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद पारण किया जाता है. एकादशी व्रत का पारण द्वादशी तिथि समाप्त होने से पहले करना अति आवश्यक है. द्वादशी तिथि सूर्योदय से पहले समाप्त हो गयी हो तो एकादशी व्रत का पारण सूर्योदय के बाद ही होता है|
व्रत तोड़ने के लिये सबसे उपयुक्त समय प्रातःकाल होता है. व्रत करने वाले श्रद्धालुओं को मध्याह्न के दौरान व्रत तोड़ने से बचना चाहिए. कुछ कारणों की वजह से अगर कोई सुबह के समय पारण नहीं कर पाता तो उसे मध्याह्न के बाद पारण करना चाहिए|
कामिका एकादशी 2025 व्रत पारण:
22 जुलाई को कामिका एकादशी के व्रत का पारण किया जाएगा. इस दिन सुबह 05:37 से 07:05 के बीच आप व्रत का पारण कर सकते हैं.
पारण तिथि के दिन द्वादशी सुबह 07:05 मिनट पर समाप्त होगी|
कामिका एकादशी व्रत पारण की विधि :
व्रत पारण के दिन सुबह स्नान करने के बाद साफ कपड़े धारण करें.
सूर्य देव को अर्घ्य दें.
मंदिर की सफाई करें और गंगाजल का छिड़काव कर शुद्ध करें.
भगवान विष्णु के सामने देसी घी का दीपक जलाकर आरती करें.
मंत्रों का जप और विष्णु चालीसा का पाठ करें.
प्रभु को सात्विक चीजों का भोग लगाएं.
जरूरमंदों में अन्न और धन समेत आदि चीजों का दान करें.
खुद भी प्रसाद ग्रहण करें|