ज्योतिष न्यूज़: हरतालिका तीज का व्रत सुहाग, दांपत्य सुख और शिव-पार्वती की आराधना से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व है। पंचांग के अनुसार यह व्रत भाद्रपद शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को रखा जाता है। इस वर्ष हरतालिका तीज का व्रत 14 सितंबर 2026 को किया जा रहा है, जबकि अगले दिन 15 सितंबर को व्रत का पारण होगा। इस दिन महिलाएं भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा कर अखंड सौभाग्य, पति की दीर्घायु और परिवार की सुख-समृद्धि की कामना करती हैं। धार्मिक मान्यता है कि व्रत का जितना महत्व माना गया है, उतनी ही श्रद्धा और सही विधि से पारण करना भी जरूरी है। ऐसे में आइए जानते हैं पारण का समय और सरल विधि।
हरतालिका तीज पर पूजा का शुभ समय
ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 4:32 बजे से 5:19 बजे तक
प्रातःकालीन शुभ मुहूर्त: सुबह 6:05 बजे से 7:06 बजे तक
दोपहर पूजा मुहूर्त: सुबह 11:52 बजे से दोपहर 12:41 बजे तक
सायंकालीन पूजा मुहूर्त: शाम 6:28 बजे से 7:37 बजे तक
पारण का समय: 15 सितंबर को सूर्योदय के बाद से सुबह 7:44 बजे तक
हरतालिका तीज व्रत का पारण की विधि
व्रत के अगले दिन सूर्योदय से पहले उठकर घर और पूजा स्थल की साफ-सफाई करें।
स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें और भगवान शिव तथा माता पार्वती की पूजा करें।
पूजा में माता पार्वती को अर्पित किया गया सिंदूर अपने मांग में लगाना शुभ माना जाता है।
पूजा में चढ़ाई गई सामग्री को स्पर्श कर विधिपूर्वक पूजा पूर्ण करें।
इसके बाद सूर्योदय से पहले शिव-पार्वती की मिट्टी की प्रतिमाओं का विसर्जन करने की परंपरा है।
विसर्जन के बाद ही व्रत खोलें। पारण से पहले घर के बड़े-बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना शुभ माना जाता है।
व्रत खोलते समय पूजा में चढ़ाए गए प्रसाद जैसे काले चने, गुड़, मिठाई और गंगाजल का सेवन किया जाता है।
पारण नमक वाली चीजों से नहीं करना चाहिए।
सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण या किसी जरूरतमंद व्यक्ति को दान देकर व्रत पूर्ण करना भी शुभ माना जाता है।
पारण का शुभ मुहूर्त
हरतालिका तीज व्रत का पारण सूर्योदय से पश्चात किया जाता है। 15 सितंबर को सूर्योदय सुबह 5:54 बजे के आसपास होगा। इसके बाद आप व्रत का पारण कर सकती हैं।
हरतालिका तीज व्रत के प्रमुख नियम
धार्मिक मान्यता के अनुसार व्रत के दौरान संयम और ब्रह्मचर्य का पालन करना चाहिए। महिलाओं के लिए सोलह श्रृंगार और मेहंदी लगाना शुभ माना जाता है। रात में जागरण और भजन-कीर्तन करने की भी परंपरा है। व्रत के अगले दिन सूर्योदय के बाद उचित विधि से जल ग्रहण कर पारण करना चाहिए।
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