Indira Ekadashi 2025: पितृ दोष से हैं परेशान, इंदिरा एकादशी पर करें ये आसान उपाय, मिलेगा पितरों का आशीर्वाद

Update: 2025-09-10 06:45 GMT
Indira Ekadashi 2025: पितृ पक्ष में इंदिरा एकादशी एक विशेष तिथि है, जिसका संबंध पितरों की शांति और मोक्ष से है। मान्यता है कि इस दिन नियमित रूप से व्रत और पूजा-अर्चना करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और पितृ दोष से मुक्ति का मार्ग खुलता है। शास्त्रों के अनुसार, जो लोग पितृ पक्ष में अपने पितरों को प्रसन्न करने के उपाय करते हैं, उन्हें न केवल पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है, बल्कि उनके जीवन में सुख, समृद्धि और उन्नति भी आती है। आइए जानते हैं इस बार की एकादशी तिथि और उन उपायों के बारे में जिन्हें करने से पितरों का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
इंदिरा एकादशी 2025:
पंचांग के अनुसार, आश्विन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 16 सितंबर को दोपहर 12:21 बजे शुरू होगी। वहीं, एकादशी तिथि 17 सितंबर को रात 11:39 बजे समाप्त होगी। ऐसे में उदया तिथि के अनुसार इंदिरा एकादशी 17 सितंबर को मनाई जाएगी।
पितृ दोष क्या है?
जब किसी व्यक्ति के पूर्वजों (पितरों) की आत्मा को शांति नहीं मिलती, तो उसे पितृ दोष माना जाता है। यह दोष कई कारणों से हो सकता है, जैसे पूर्वजों का श्राद्ध ठीक से न करना, उनकी मृत्यु के बाद कोई कर्मकांड अधूरा रह जाना, या उनकी असंतुष्टि। पितृ दोष के कारण परिवार में कई तरह की परेशानियाँ आ सकती हैं, जैसे धन की कमी, विवाह में देरी, संतान संबंधी समस्याएँ और बार-बार बीमार पड़ना।
इंदिरा एकादशी पर पितृ दोष से मुक्ति पाने के लिए क्या करें?
अगर आप पितृ दोष से परेशान हैं, तो इंदिरा एकादशी का दिन आपके लिए बेहद शुभ है। इस दिन कुछ खास उपाय करके आप पितरों का आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं:
व्रत और पूजा: इंदिरा एकादशी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और व्रत का संकल्प लें। भगवान शालिग्राम और भगवान विष्णु की पूजा करें। पूजा में तुलसी दल, फूल, फल और पंचामृत चढ़ाएँ।
श्राद्ध और तर्पण: इस दिन पितरों का श्राद्ध करना अत्यंत पुण्यदायी माना जाता है। यदि आप अपने पितरों का श्राद्ध करने में सक्षम हैं, तो विधि-विधान से किसी योग्य ब्राह्मण से श्राद्ध करवाएँ। यदि यह संभव न हो, तो तर्पण (जल अर्पण) कर सकते हैं।
ब्राह्मणों को भोजन कराएँ: पितरों की शांति के लिए इस दिन किसी ब्राह्मण या ज़रूरतमंद व्यक्ति को भोजन कराना अत्यंत शुभ होता है। भोजन में खीर और पूरी जैसी चीज़ें शामिल करें।
दान: इस दिन अनाज, वस्त्र या धन का दान करना भी अत्यंत लाभकारी होता है। गाय को चारा खिलाना भी पुण्य का कार्य है।
पितृ स्तोत्र का पाठ: यदि आपको पितृ दोष लगता है, तो इंदिरा एकादशी के दिन पितृ स्तोत्र या गरुड़ पुराण का पाठ करना अत्यंत फलदायी होता है। इससे पितरों की आत्मा को शांति मिलती है।
यह एकादशी आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में आती है और पितृ पक्ष में पड़ने वाली एकमात्र एकादशी के रूप में जानी जाती है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन व्रत रखने और विधि-विधान से पूजा करने से व्यक्ति को पितृ दोष से मुक्ति मिलती है। ऐसा भी कहा जाता है कि इस व्रत के प्रभाव से पितरों को स्वर्ग में स्थान मिलता है और वे अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।
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