Guru Purnima 2025: कब मनाया जाएगा गुरु पूर्णिमा का पर्व,जानें सही तिथि और महत्व
Guru Purnima 2025: गुरु पूर्णिमा भारतीय संस्कृति में एक अत्यंत पावन पर्व माना गया है। यह दिन गुरु और शिष्य के रिश्ते की पवित्रता और उसके महत्व का प्रतीक माना जाता है। यह केवल पारंपरिक गुरु-शिष्य संबंध तक सीमित नहीं है, बल्कि आज के समय में माता-पिता, अध्यापक, आध्यात्मिक गुरु, और वे सभी लोग जो जीवन को दिशा देने में सहायक होते हैं, उन्हें भी इस दिन विशेष सम्मान दिया जाता है।
इस दिन को व्यास पूर्णिमा और वेद पूर्णिमा के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि इसी दिन महर्षि वेदव्यास का जन्म हुआ था। महर्षि वेदव्यास ने महाभारत, श्रीमद्भागवत और 18 पुराणों की रचना की, जो आज भी सनातन धर्म के गूढ़ और गहन ज्ञान के स्त्रोत माने जाते हैं। वे महान ऋषि पराशर के पुत्र थे।
गुरु पूर्णिमा से जुड़ी परंपराएं और अनुष्ठान:
गुरु पूजन- इस दिन लोग अपने गुरु के चरणों में पुष्प अर्पण कर उनका आशीर्वाद लेते हैं।
व्रत और ध्यान- कई लोग इस दिन उपवास रखते हैं और पूरे दिन ध्यान व भक्ति में लीन रहते हैं।
पवित्र नदियों में स्नान- धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है।
दान-पुण्य- वस्त्र, अन्न, धन और जरूरतमंदों को दान देना इस दिन विशेष पुण्य प्रदान करता है।
गुरु पूर्णिमा 2025 तिथि:
हिंदू पंचांग के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पर्व हर वर्ष आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 10 जुलाई को रात 1:36 बजे होगी और इसका समापन 11 जुलाई को रात 2:06 बजे होगा। उदया तिथि के अनुसार गुरु पूर्णिमा का पर्व 10 जुलाई को ही मनाया जाएगा।
गुरु केवल शिक्षा देने वाले व्यक्ति नहीं होते, बल्कि वे अज्ञान के अंधकार से बाहर निकालकर आत्मज्ञान के प्रकाश की ओर ले जाने वाले मार्गदर्शक होते हैं। इस दिन का उद्देश्य अपने भीतर कृतज्ञता और श्रद्धा का भाव जागृत करना है। यही वह दिन है जब शिष्य अपने जीवन की सफलता और मार्गदर्शन के लिए गुरुओं का आभार व्यक्त करते हैं।