Religion धर्म : गणेश चतुर्थी 2025 का पर्व भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है। यह पर्व भगवान गणेश के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है और देशभर में 10 दिनों तक उत्सव का माहौल रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इन 10 दिनों में अगर श्रद्धा के साथ विशेष भोग गणपति बप्पा को अर्पित किए जाएं, तो कर्ज, रोग, मानसिक तनाव और जीवन की बाधाएं दूर होती हैं।
पंडितों और धर्मग्रंथों के अनुसार, प्रत्येक दिन अलग-अलग प्रकार के भोग चढ़ाने से विशेष फल प्राप्त होते हैं। आइए जानते हैं कि किस दिन कौन-सा भोग लगाने से कौन-सी समस्या का समाधान हो सकता है। पहले दिन: मोदक
भगवान गणेश का प्रिय भोग है मोदक। इसे पहले दिन चढ़ाने से सुख-समृद्धि का आगमन होता है और घर में लक्ष्मी का वास होता है।
दूसरे दिन: लड्डू
बेसन या बूंदी के लड्डू चढ़ाने से कर्ज से छुटकारा मिलता है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है।
तीसरे दिन: दूध और चावल
इस दिन भगवान को दूध और चावल का भोग लगाने से मानसिक शांति और परिवार में प्रेम बढ़ता है।
चौथे दिन: दूर्वा घास
दूर्वा को बहुत शुभ माना जाता है। इसे चढ़ाने से बुरी नजर, रोग और बाधाओं से रक्षा होती है। पाँचवें दिन: सिंदूर मिश्रित तेल
गणपति को सिंदूर अत्यंत प्रिय है। सिंदूर में थोड़ा सरसों का तेल मिलाकर अर्पित करने से शत्रु शांत होते हैं।
छठे दिन: शकरकंद या गुड़
मूल और मीठे पदार्थ चढ़ाने से संतान संबंधी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
सातवें दिन: केले
केला शुद्धता का प्रतीक है। इसे अर्पित करने से स्वास्थ्य लाभ होता है और रोग दूर होते हैं।
आठवें दिन: नारियल
नारियल चढ़ाने से मनोकामनाएं पूरी होती हैं और आत्मविश्वास बढ़ता है। तिल और गुड़ का भोग शनि दोष और राहु-केतु के अशुभ प्रभाव से मुक्ति दिलाता है।
दसवें दिन (विसर्जन): पंचामृत और पंचमेवा
विसर्जन के दिन पंचामृत और मेवा का भोग लगाकर बप्पा को विदा करने से घर में शुभता बनी रहती है। ध्यान रखें:
हर दिन गणपति की पूजा में साफ-सफाई, पवित्रता और श्रद्धा अनिवार्य है।
भोग चढ़ाने से पहले भगवान को गंगाजल से स्नान कराना और पुष्प अर्पित करना न भूलें।
भोग चढ़ाने के बाद परिवार के साथ प्रसाद स्वरूप उसे ग्रहण करें।