Falgun Amavasya 2026: फाल्गुन अमावस्या पर इन मंत्रों का जाप कर पाएं पितरों का आशीर्वाद

Update: 2026-02-16 04:11 GMT
Falgun Amavasya 2026: सनातन धर्म में फाल्गुन महीने का बहुत महत्व है. महाशिवरात्रि से लेकर होली का पर्व इस फाल्गुन माह में आता है. इसी तरह इस माह में पड़ने वाले फाल्गुन अमावस्या का भी बहुत महत्व है. इस तिथि पर पितृ शांति के लिए कई उपाय किए जाते हैं साथ ही कई शक्तिशाली मंत्रों का जाप भी किया जाता है. आज की इस कड़ी में हम पितृ दोष से मुक्त के लिए कुछ उपाय और मंत्रों को जानेंगे.
फाल्गुन अमावस्या पर पितृ दोष के उपाय और मंत्र:
वैदिक पंचांग के अनुसार, इस साल मंगलवार 17 फरवरी 2026 को फाल्गुन अमावस्या को पड़ रही है. इस तिथि पर श्रद्धालु गंगा के अलावा कई पवित्र नदियों में स्नान-ध्यान करते हैं और शिवजी और मां पार्वती की पूजा करते हैं. दान-पुण्य करते हैं और पितरों का तर्पण करते हैं. पितृदोष किसी भी व्यक्ति की कुण्डली में हो तो उसका न तो विकास होता है और न तो घर में समृद्धि आती है. उन पूर्वजों के ऋण का भुगतान उनके वंशजों को जरूर कर लेना चाहिए नहीं तो पितृदोष किसी भी काम को पूरा नहीं कर सकता है. हालांकि, फाल्गुन अमावस्या पर पितृ दोष का उपाय कर सकते हैं और कुछ मंत्रों का जाप करके शुभ परिणाम प्राप्त कर सकते हैं और पितृ को प्रसन्न कर सकते हैं. शास्त्रों के उपायों और मंत्रों को आइए जानें|
पितृ दोष निवारण मंत्र:
पूर्वजों को स्मरणकर इस मंत्र का 21 बार जाप करें.
ॐ श्री पितराय नम:
इस मंत्र का 51 बार जाप करने से पितृ प्रसन्न होते हैं.
ॐ श्री पितृभ्य: नम:
इस मंत्र का 108 बार जाप करें को पितृ का आशीर्वाद प्राप्त होगा.
ॐ श्री सर्व पितृ देवताभ्यो नमो नमः
इस मंत्र का जाप करने से पितरों की आत्मा तृप्त होती है.
ॐ पितृभ्यः स्वधायिभ्यः पितृगणाय च नमः
इस मंत्र का जाप श्राद्ध कर्म के समय करें तो पितरों को शांति मिलती है.
ॐ श्राध्दाय स्वधा नमः
भगवान शिव के इस मंत्र का जाप करने से पितृ दोष दूर होता है. इससे पितरों की आत्मा शांत होती है.
ॐ नमः शिवाय
पितृ गायत्री मंत्र का कम से कम एक माला जाप करने से पितृ दोष दूर होता है.
देवताभ्यः पितृभ्यश्च महा योगिभ्य एव च ।
नमः स्वाहायै स्वधायै नित्यमेव नमो नमः ।।
पितृ दोष दूर करने का उपाय:
फाल्गुन अमावस्या पर पितृ दोष पूजा कराए, इससे पितृ दोष दूर होगी.
फाल्गुन अमावस्या पर षोडश पिंड दान करें, सर्प पूजा करें, ब्राह्मण को गौ -दान करें.
फाल्गुन अमावस्या पर मंदिर प्रांगण में पीपल का पेड़ या बरगद का पेड़ लगाएं.
फाल्गुन अमावस्या पर 13 ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दक्षिणा देकर आशीर्वाद लें.
फाल्गुन अमावस्या पर कौवों को भोजन कराएं ताकि पितृ दोष दूर हो सके. पितृ कौवों के रूप में अपने वंशज के पास आते हैं.
फाल्गुन अमावस्या पर गाय की सेवा करें, गाय को भोजन कराएं.
सूर्य पिता के कारक हैं, फाल्गुन अमावस्या पर तांबे के लोटे में जल लेकर उसमें लाल फूल, लाल चंदन का चूरा, रोली डालें और सूर्य देव को अर्घ्य दें|
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