Dhanteras 2025 Puja Vidhi: धनतेरस पर किसकी पूजा होती है, जानिए पूजा विधि से लेकर मंत्र, कथा, आरती तक सारी जानकारी

Update: 2025-10-18 02:16 GMT
Dhanteras 2025 Puja Vidhi: धनेतरस का दिन हिंदू धर्म में बेहद खास माना जाता है। इस दिन को धनत्रयोदशी के नाम से भी जाना जाता है क्योंकि कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को यह त्योहार मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन भगवान धन्वंतरि अमृत कलश लेकर समुद्र से प्रकट हुए थे। इसलिए इस दिन माता लक्ष्मी के साथ ही भगवान धन्वंतरि की भी पूजा की जाती है। इसके साथ ही कुबेर देव को भी इस दिन पूजा जाता है। साल 2025 में 18 अक्टूबर को धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा। आइए ऐसे में जान लेते हैं इस दिन पूजा का शुभ मुहूर्त कब रहेगा, पूजा की विधि क्या होगी और किन मंत्रों का जप इस दिन शुभ रहेगा।
धनतेरस 2025 शुभ मुहूर्त:
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि 18 अक्टूबर को दोपहर 12 बजकर 20 मिनट से शुरू होगी वहीं इसकी समाप्ति 19 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 53 मिनट पर होगी। ऐसे में प्रदोष काल की पूजा 18 अक्टूबर को ही की जाएगी और इसी दिन धनतेरस का त्योहार मनाया जाएगा।
धनतेरस की पूजा के लिए शुभ मुहूर्त- धनतेरस की पूजा सूर्यास्त के बाद की जाती है और इस व्रत 18 अक्टूबर को शाम 7 बजकर 15 मिनट से लेकर रात्रि 8 बजकर 20 मिनट तक का समय पूजा के लिए सबसे शुभ रहेगा।
पूजा विधि:
धनतेरस के दिन आपको माता लक्ष्मी, भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव की पूजा करनी चाहिए। इन मूर्ति या तस्वीर को पूजा स्थल पर स्थापित करें। पूजा के लिए सबसे सही दिशा उत्तर-पूर्व दिशा को माना जाता है इसी दिशा में आपको पूजा करनी चाहिए। इसके बाद दीपक जलाकर माता लक्ष्मी के साथ ही भगवान धन्वंतरि और कुबेर देव की पूजा करें। पूजा में अक्षत, हल्दी, फूल, मिष्ठान आदि अर्पित करें। इसके बाद मंत्रों का जप करें। अंत में आरती के बाद पूजा की समाप्ति करें और प्रसाद का वितरण करें।
धनेतरस पर करें इन मंत्रों का जप:
माता लक्ष्मी के मंत्र :
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं ऐं कमलवासिन्यै स्वाहा।
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्री सिद्ध लक्ष्म्यै नम:।
ॐ ह्रीं श्रीं लक्ष्मी-नारायणाभ्यां नम:।
भगवान धन्वंतरि के मंत्र
ॐ श्रीमते नमः।
ॐ सर्वाश्चर्यमयाय नमः।
ॐ सर्वेश्वराय नमः।
कुबेर देव के मंत्र
ॐ श्रीं ह्रीं क्लीं श्रीं क्लीं वित्तेश्वराय नमः।
ॐ ह्रीं श्रीं क्रीं श्रीं कुबेराय अष्ट-लक्ष्मी मम गृहे धनं पुरय पुरय नमः।
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