Dahi Handi 2025: जन्माष्टमी के बाद इस दिन मनाई जाएगी दही हांडी

Update: 2025-08-08 05:04 GMT
Dahi Handi 2025: भगवान कृष्ण के जन्मोत्सव के अगले दिन मनाया जाने वाला 'दही हांडी' का उत्सव विशेष रूप से महाराष्ट्र, गुजरात और मुंबई के उपनगरीय इलाकों में बड़े हर्षोल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन युवाओं की टोलियाँ ऊँचे मानव पिरामिड बनाकर मटकी फोड़ने की प्रतियोगिता में भाग लेती हैं, जिसे देखने के लिए भारी भीड़ उमड़ती है। आइए जानते हैं इस बार दही हांडी का उत्सव कब है?
दही हांडी 2025 तिथि और शुभ मुहूर्त
पंचांग के अनुसार, इस बार दही हांडी का उत्सव 16 अगस्त 2025 को मनाया जाएगा। चूँकि श्री कृष्ण जन्माष्टमी 15 अगस्त को है, इसलिए दही हांडी का आयोजन अगले ही दिन किया जाता है। इसे गोकुलाष्टमी भी कहा जाता है, क्योंकि इसी दिन बालकृष्ण ने गोकुल में अपनी बाल लीलाएँ दिखाई थीं।
दही हांडी क्या है?
दही हांडी एक पारंपरिक उत्सव है जिसमें छोटे बच्चों के समूह, जिन्हें 'गोविंदा' कहा जाता है, एक ऊँचा मानव पिरामिड बनाते हैं। उनका लक्ष्य ऊपर लटकी दही से भरी मटकी को फोड़ना होता है। यह उत्सव भगवान कृष्ण की बाल लीलाओं को याद करने के लिए मनाया जाता है। गोविंदाओं की टोलियाँ ढोल की थाप पर नाचते-गाते सड़कों पर घूमती हैं और दही हांडी उत्सव में भाग लेती हैं। कई जगहों पर इस आयोजन को एक प्रतियोगिता का रूप दिया जाता है और विजेता टीमों को पुरस्कार भी दिए जाते हैं।
दही हांडी का महत्व और इसके पीछे की कहानी
दही हांडी केवल एक परंपरा नहीं है, बल्कि हमें भगवान कृष्ण के जीवन से जुड़ी एक रोचक लीला की याद दिलाती है। ऐसा माना जाता है कि बचपन में श्री कृष्ण को मक्खन, दही और माखन बहुत पसंद थे। वे अक्सर अपने दोस्तों के साथ घरों में लटकी मटकी से दही चुरा लिया करते थे। यह लीला माखनचोर के नाम से प्रसिद्ध हुई।
इस परंपरा को जीवित रखने के लिए आज भी लोग मटकी को किसी ऊँचे स्थान पर लटकाते हैं और युवाओं का एक समूह उसे फोड़ता है। दही-हांडी का यह उत्सव उन शरारती दिनों और भगवान कृष्ण की लीलाओं को याद करने का एक तरीका है। यह त्योहार हमें यह भी सिखाता है कि एकजुटता और टीम भावना से कोई भी कठिन लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। यह त्योहार हमें न केवल आनंद देता है, बल्कि भगवान कृष्ण के जीवन से मिली शिक्षाओं की भी याद दिलाता है।
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