Bhishma Dwadashi 2026: कब मनाया जाएगा भीष्म द्वादशी नोट कर लें तारीख, शुभ मुहूर्त पूजा विधि और महत्व
Bhishma Dwadashi 2026: महाभारत के महान योद्धा भीष्म पितामह को इच्छा मृत्यु का वरदान प्राप्त था. कुरुक्षेत्र युद्ध के दौरान वह लगभग 58 दिनों तक बाणों की शय्या पर लेटे रहे. सूर्य के उत्तरायण होने पर, मकर संक्रांति के दिन, उन्होंने अपने प्राण त्यागे. यह तिथि माघ शुक्ल अष्टमी मानी जाती है, जिसे भीष्म अष्टमी कहा जाता है. इसके चार दिन बाद माघ शुक्ल द्वादशी को उनके निर्वाण की स्मृति में भीष्म द्वादशी मनाई जाती है. चलिए हम आपको शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में बताते हैं|
कब है भीष्म द्वादशी 2026:
पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 29 जनवरी 2026 को दोपहर 01 बजकर 55 मिनट से शुरू होगी और 30 जनवरी 2026 को सुबह 11 बजकर 09 मिनट तक रहेगी. उदयातिथि के आधार पर, भीष्म द्वादशी 29 जनवरी 2026, गुरुवार को मनाई जाएगी|
भीष्म द्वादशी का धार्मिक महत्व:
मान्यता है कि इस दिन पितरों के लिए किया गया तर्पण बहुत फलदायी होता है. दान और पुण्य कर्म से पितृ दोष में कमी आती है. यह दिन आत्मा की शांति और पूर्वजों के आशीर्वाद की प्राप्ति के लिए शुभ माना जाता है. कई लोग इस अवसर पर गरीबों को भोजन और वस्त्र दान करते हैं|
सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करें. व्रत का संकल्प लें. इसके अलावा भगवान विष्णु और भीष्म पितामह की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें. घी का दीपक जलाएं. तिल, गुड़, फूल, फल, धूप और पंचामृत अर्पित करें. पवित्र नदी या घर पर ही पितरों के लिए तर्पण करें और अंत में भगवान विष्णु की आरती करें|