Bhadra Kaal: भद्रा काल में क्यों रुक जाते हैं शुभ काम? शास्त्रों में छिपी है इसकी कहानी
Bhadra Kaal: भद्रा काल का नाम सुनते ही लोग अक्सर कोई भी शुभ काम टाल देते हैं। शादी हो, गृह प्रवेश हो या रक्षाबंधन जैसा कोई त्योहार, भद्रा का साया हमेशा चर्चा में रहता है। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि भद्रा कौन हैं और उनके समय में शुभ काम क्यों मना हैं? आइए जानते हैं इसके पीछे की पौराणिक कहानी और ज्योतिषीय कारण।
भद्रा काल क्या है?
भद्रा काल का संबंध विष्टि करण से है। पंचांग में 11 करण बताए गए हैं, जिनमें से एक विष्टि करण को भद्रा कहा जाता है। जब किसी खास तारीख को विष्टि करण होता है, तो उस समय को भद्रा काल कहा जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस समय को कुछ खास कामों के लिए अशुभ माना जाता है।
भद्रा की पौराणिक कहानी:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, भद्रा को सूर्य देव और छाया की पुत्री कहा जाता है। भद्रा का स्वभाव बेहद उग्र और गुस्सैल माना जाता है। कहा जाता है कि जब भी भद्रा धरती पर होती है, तो शुभ और मांगलिक कामों में रुकावट आ सकती है। इसी वजह से भद्रा के दौरान शादी, गृह प्रवेश, मुंडन, यज्ञ और नई शुरुआत जैसे शुभ काम टाल दिए जाते हैं।
भद्रा के दौरान कौन से काम नहीं करने चाहिए?
शादी और सगाई
गृह प्रवेश
नया बिज़नेस शुरू करना
कोई भी शुभ काम
क्या भद्रा हमेशा अशुभ होती है?
यह जानना भी ज़रूरी है कि भद्रा को हर हाल में अशुभ नहीं माना जाता है। ज्योतिष के अनुसार, अगर भद्रा स्वर्ग या पाताल में हो, तो इसका असर कम हो जाता है। हालांकि, जब भद्रा धरती पर हो, तो शुभ कामों से बचने की सलाह दी जाती है।