Amalaki Ekadashi 2026: आमलकी एकादशी पर पढ़ें आंवले के पेड़ से जुड़ी कहानी

Update: 2026-02-27 01:50 GMT
Amalaki Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को बेहद फलदायी माना गया है। फाल्गुन मास में आने वाली एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है। साल 2026 में यह व्रत 27 फरवरी, शुक्रवार को रखा जाएगा। इस दिन भगवान विष्णु की पूजा के साथ आंवले के पेड़ का विशेष पूजन किया जाता है। क्या आपके मन भी कभी विचार आया है कि आमलकी एकादशी पर आंवले की वृक्ष का पूजन क्यों होता है। तो चलिए जानते हैं कि आमलकी एकादशी और आंवले के पेड़ का क्या संबंध है। यहां पढ़िए महत्व और आमलकी एकादशी की कथा।
आमलकी एकादशी का महत्व:
हिंदू पंचांग के अनुसार साल में कुल 24 एकादशी होती हैं। फाल्गुन मास की एकादशी को आमलकी एकादशी के नाम से जाना जाता है। इस दिन व्रत रखकर भगवान विष्णु की पूजा की जाती है। मान्यता है कि इससे पापों का नाश होता है और व्यक्ति को पुण्य की प्राप्ति होती है।
आंवले के पेड़ की उत्पत्ति की कथा:
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सृष्टि के आरंभ में जब चारों ओर जल ही जल था, तब ब्रह्मा जी ने भगवान विष्णु की तपस्या की। उनकी कठोर साधना से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु प्रकट हुए। भगवान के दर्शन से भावुक होकर ब्रह्मा जी की आंखों से आंसू बह निकले। मान्यता है कि
उन्हीं आंसुओं से
आंवले के वृक्ष की उत्पत्ति हुई। इसी कारण इसे धरती का पहला वृक्ष और आदि वृक्ष भी कहा जाता है।
समुद्र मंथन से जुड़ी कथा:
एक अन्य मान्यता के अनुसार समुद्र मंथन के समय निकले अमृत की कुछ बूंदें धरती पर गिरी थीं। जहां-जहां अमृत की बूंदें गिरीं, वहां आंवले के पेड़ उग आए। इसके औषधीय गुणों के कारण आंवले को अमृत फल भी कहा जाता है।
क्यों की जाती है आंवले के वृक्ष की पूजा:
पौराणिक कथा के अनुसार, आमलकी एकादशी की तिथि पर ही आंवले के पेड़ का प्राकट्य हुआ था। मान्यता है कि इस दिन आंवले के वृक्ष में भगवान विष्णु का वास माना जाता है। भक्त इस दिन वृक्ष की पूजा कर आंवले का फल भगवान को अर्पित करते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा से पूजन करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है।
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