Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी पर स्याहु माला क्यों पहनी जाती है? जानें इसे धारण करने की सही विधि
Ahoi Ashtami 2025: अहोई अष्टमी कार्तिक मास की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। माताएँ अपनी संतान की दीर्घायु और सुख-समृद्धि के लिए यह व्रत रखती हैं। इस दिन महिलाएँ दिन भर निर्जला व्रत रखती हैं और शाम को देवी अहोई की पूजा के बाद तारों को अर्घ्य देकर व्रत का समापन करती हैं। इस पूजा में स्याहु माला धारण करने का विशेष महत्व है। आइए जानें अहोई अष्टमी पर स्याहु माला धारण करने के पीछे का धार्मिक कारण।
अहोई अष्टमी पर स्याहु माला धारण करने का धार्मिक महत्व क्या है?
हिंदू धर्म में, अहोई अष्टमी पर स्याहु माला धारण करना अत्यंत शुभ माना जाता है। स्याहु माला को दीर्घायु और सौभाग्य का प्रतीक माना जाता है। ऐसा माना जाता है कि इस माला को धारण करने से देवी अहोई प्रसन्न होती हैं और संतान के सभी कष्ट दूर होते हैं।
स्याहु माला कैसी होती है?
स्याहु माला आमतौर पर चांदी की बनी होती है। छोटे-छोटे मोतियों को एक धागे में पिरोकर माला बनाई जाती है। पूजा के दौरान इसे धारण करने से पहले देवी को अर्पित करना शुभ माना जाता है।
स्याहु माला की पूजा कैसे करें?
अहोई अष्टमी के दिन माला पर सिंदूर और चंदन का लेप लगाएँ।
माला पर चावल छिड़कें।
इसे देवी अहोई को अर्पित करें।
देवी को माला पहनाने के बाद तिलक लगाएँ।
स्याहु माला कैसे धारण करें?
देवी अहोई को माला पहनाकर तिलक लगाने के बाद प्रणाम करें।
अपनी संतान की दीर्घायु की कामना करें।
इसके बाद माला उतारकर स्वयं धारण करें।