Aamlaki Ekadashi 2026: कब है आमलकी एकदाशी, जानें सही तारीख, मुहूर्त और पूजा विधि

Update: 2026-02-23 02:20 GMT
Aamlaki Ekadashi 2026: हिन्दू धर्म में एकादशी व्रत का विशेष महत्व बताया गया है. हर महीने दो एकादशी व्रत होते हैं. एक व्रत कृष्ण पक्ष में और दूसरा शुक्ल पक्ष में रखा जाता है. इन एकादशी के नाम अलग-अलग होते हैं. फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी एकादशी कहा जाता है. इसे रंगभरी एकादशी भी कहते हैं. इस एकादशी पर व्रत पूर्वक भगवान लक्ष्मीनारायण, श्रीराधाकृष्ण और शिवपार्वती जी की पूजा करने का विधान हैं|
इसके साथ ही आंवला वृक्ष की भी पूजा की जाती है. इस एकादशी का व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं. दांपत्यजीवन में मधुरता आती है. सभी पाप कर्म और संकटों से मुक्ति मिलती है. इसके साथ ही मोक्ष की प्राप्ति होती है. आइए जानते हैं इस साल एकादशी व्रत कब रखना शुभ होगा|
आमलकी एकादशी व्रत 2026 तिथि:
फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि 27 फरवरी को सुबह 12 बजकर 33 मिनट पर शुरु होगी. एकादशी तिथि का समापन 27 फरवरी को रात 10 बजकर 32 मिनट पर होगा. 27 फरवरी को आमलकी एकादशी व्रत रखना शुभ होगा|
व्रत पारण का समय:
आमलकी एकादशी व्रत का पारण 28 फरवरी को होगा. पारण का समय सुबह 06 बजकर 48 मिनट से सुबह 09 बजकर 05 मिनट तक रहेगा. इस मुहूर्त में व्रत का पारण करने से व्रत का पूरा फल प्राप्त होता है|
आमलकी एकादशी पर 4 शुभ संयोग:
इस साल आमलकी एकादशी पर बेहद शुभ संयोग बन रहा है. एकादशी तिथि के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग, रवि योग, आयुष्मान योग और सौभाग्य योग का दिव्य संयोग रहेगा. इन योग में पूजा करने पर पूजा का दोगुना फल प्राप्त होता है|
आंवला वृक्ष 2026 शुभ मुहूर्त:
आमलकी एकादशी के दिन श्रीहरि की पूजा के साथ आंवला वृक्ष की पूजा करने का विधान है. शास्त्रों के मुताबिक, आंवला वृक्ष भगवान श्रीहरि के आंसूओं की बूंदों से प्रकट हुआ था. इसलिए इसे श्रीहरि का स्वरुप माना जाता है. यही वजह है आंवला में चमत्कारी औषधीय गुण होते हैं. इस दिन आंवला वृक्ष की पूजा शुभ मुहूर्त में करनी चाहिए. इस साल पूजा का मुहूर्त सुबह 06.48 मिनट से सुबह 11.08 मिनट तक रहेगा|
आमलकी एकादशी 2026 पूजा विधि:
आमलकी एकादशी के दिन सबसे पहले स्नान करें फिर व्रत का संकल्प लें. उसके बाद उत्तर-पूर्व दिशा में चौकी बिछाकर उस पर लाल या पीला कपड़ा बिछाएं.
चौकी पर भगवान लक्ष्मीनारायण, श्रीराधाकृष्ण और शिव-पार्वती जी के श्रीविग्रह की स्थापना करें. भगवान का गंगाजल से अभिषेक करें. चंदन और फूलों से श्रंगार करें. इसके बाद भगवान को गुलाल और अबीर अवश्य लगाएं. मौसमी फलों और दूध से बने पदार्थों का भोग लगाएं|
तुलसी पत्र अवश्य चढ़ाएं. श्रद्धा भक्ति के साथ आरती करें. पूजा के बाद विष्णु चालीसा, श्रीकृष्ण चालीसा, शिव चालीसा का पाठ करें. ऊं नमो भगवतये वासुदेवाय मंत्र का जाप करें. आंवला वृक्ष पर जल चढ़ाएं और रोली लगाकर पूजन करें. साथ ही आंवला वृक्ष की आरती करने के बाद परिक्रमा करें. सामर्थ्य के अनुसार ब्राह्मण और गरीबों को दान दें|
शास्त्रों के अनुसार आमलकी एकादशी का व्रत करने से भगवान विष्णु की कृपा मिलती है. इसके साथ ही जीवन में सभी सुख प्राप्त होते हैं. जीवन के सभी संकट और परेशानिया दूर होती हैं. साधक को ज्ञात और अज्ञात सभी तरह के पाप कर्मों से छुटकारा मिल जाता है. साधक को अंत समय पर भगवान के बैकुंठ लोक में स्थान प्राप्त होता है. मोक्ष की प्राप्ति होती है|
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