बलभद्र जयंती और रक्षाबंधन पर जगन्नाथ धाम में उमड़ी श्रद्धा
जगन्नाथ मंदिर
ओडिशा के पुरी स्थित प्रसिद्ध श्री जगन्नाथ मंदिर में रक्षाबंधन 2026 का पर्व श्रद्धा और परंपरा के साथ मनाया गया। सुबह की विशेष आरती के साथ भगवान बलभद्र की जयंती और राखी उत्सव का आयोजन किया गया। मंदिर परिसर में धार्मिक अनुष्ठानों और भक्तों की आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला।
रक्षाबंधन के अवसर पर भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र की पूजा का विशेष महत्व माना जाता है। परंपरा के अनुसार इस दिन बलभद्र जयंती भी मनाई जाती है और देवी सुभद्रा अपने भाइयों जगन्नाथ और बलभद्र को राखी बांधती हैं।
सुबह की आरती से शुरू हुआ उत्सव
पुरी जगन्नाथ मंदिर में सुबह की आरती के साथ ही विशेष पूजा-अर्चना शुरू हुई। सेवायतों ने निर्धारित परंपराओं के अनुसार भगवान के विग्रहों का श्रृंगार किया और धार्मिक विधियां पूरी कीं।
मंदिर में मौजूद श्रद्धालुओं ने भगवान के दर्शन कर परिवार की सुख-समृद्धि और मंगल जीवन की कामना की।
बलभद्र जयंती का विशेष महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार भगवान बलभद्र को भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई के रूप में पूजा जाता है। रक्षाबंधन के दिन उनकी जयंती मनाने की परंपरा ओडिशा की धार्मिक संस्कृति का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
इस अवसर पर भगवान बलभद्र की विशेष पूजा की जाती है और भक्त आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
बहन सुभद्रा बांधती हैं भाइयों को राखी
जगन्नाथ मंदिर की परंपरा में रक्षाबंधन का अलग महत्व है। मान्यता है कि देवी सुभद्रा अपने भाइयों भगवान जगन्नाथ और बलभद्र को राखी बांधती हैं।
यह परंपरा भाई-बहन के पवित्र रिश्ते और प्रेम का प्रतीक मानी जाती है।
मंदिर में उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़
रक्षाबंधन और बलभद्र जयंती के मौके पर पुरी में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। मंदिर परिसर में सुरक्षा और दर्शन व्यवस्था के लिए विशेष इंतजाम किए गए।
भक्तों ने पूजा-अर्चना कर भगवान से सुख, शांति और समृद्धि की प्रार्थना की।
ओडिशा की अनूठी धार्मिक परंपरा
पुरी जगन्नाथ मंदिर की परंपराएं देशभर में विशेष पहचान रखती हैं। यहां मनाए जाने वाले त्योहारों में धार्मिक आस्था के साथ सदियों पुरानी संस्कृति और रीति-रिवाजों की झलक देखने को मिलती है।
रक्षाबंधन के दिन बलभद्र जयंती और राखी उत्सव का आयोजन इसी समृद्ध परंपरा का हिस्सा है।