सांकेतिक तस्वीर (AI)

नई दिल्ली: उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की बहन शशि आज भी उत्तराखंड के कोठार गांव में चाय-नाश्ते और प्रसाद की दुकान चलाती हैं। रक्षाबंधन के मौके पर भाई को राखी बांधने की बात पर वह भावुक हो गईं और कहा कि उन्हें याद नहीं कि आखिरी बार उन्होंने अपने हाथों से भाई को कब राखी बांधी थी।
 बचपन के अजय से योगी आदित्यनाथ तक का सफर
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आज राजनीति में एक बड़े नाम हैं, लेकिन उनके परिवार से जुड़ी कई बातें उनके निजी जीवन का अलग पहलू सामने लाती हैं। उनका बचपन का नाम अजय सिंह बिष्ट था। बचपन में वह अपने भाई-बहनों के साथ रहे और बहन शशि की शादी में भी भाई की जिम्मेदारियां निभाईं।
समय के साथ अजय सिंह बिष्ट ने संन्यास का रास्ता अपनाया और योगी आदित्यनाथ के नाम से पहचाने जाने लगे। इसके बाद गोरखपुर से उनकी राजनीतिक यात्रा शुरू हुई और आगे चलकर वह उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। सार्वजनिक जीवन की जिम्मेदारियों और परिवार से बढ़ती दूरी के कारण भाई-बहन की मुलाकातें भी पहले की तुलना में कम होती गईं।
आखिरी बार कब बांधी राखी, बहन को भी नहीं याद
रक्षाबंधन के मौके पर जब शशि से भाई को राखी बांधने के बारे में पूछा गया तो वह भावुक हो गईं। उन्होंने बताया था कि वह हर साल अपने भाई के लिए राखी भेजती हैं, लेकिन उन्हें यह याद नहीं कि उन्होंने आखिरी बार अपने हाथों से भाई को कब राखी बांधी थी।
शशि ने यह भी कहा था कि उन्हें नहीं पता कि वह अब अपने हाथों से महाराज जी को राखी कब बांध पाएंगी। भाई से जुड़ी पुरानी यादों का जिक्र करते हुए उनकी आंखों में आंसू आ गए। उनकी भावुकता यह बताती है कि भाई से दूरी के बावजूद उनके मन में बचपन की यादें और भाई के लिए स्नेह आज भी कायम है।
*बहन की शादी में योगी ने निभाई थी भाई की जिम्मेदारी
शशि की शादी 5 मार्च 1991 को हुई थी। उन्होंने अपनी शादी से जुड़ी पुरानी यादों को साझा करते हुए बताया था कि उस समय योगी आदित्यनाथ ने भाई के तौर पर कई रस्में निभाई थीं।
शशि के मुताबिक, शादी के दौरान फेरों में खील-बताशे डालने जैसी रस्मों में भी योगी शामिल रहे थे। उन्होंने बताया था कि उनकी डोली भी योगी ने खुद उठाई थी। शशि ने यह भी बताया था कि जब योगी ऋषिकेश में पढ़ाई कर रहे थे, तब वह दिल्ली से पैदल उनके गांव तक आया करते थे। उस दौर में गांव तक सड़क नहीं बनी थी। इन यादों का जिक्र करते हुए शशि ने भाई के साथ अपने पुराने रिश्ते को याद किया था।
पहाड़ में आज भी चाय-नाश्ते की दुकान चलाती हैं शशि
योगी आदित्यनाथ की बहन शशि उत्तराखंड के कोठार गांव में रहती हैं। गांव से करीब ढाई किलोमीटर दूर पहाड़ पर पार्वती मंदिर के पास उनकी चाय-नाश्ते, प्रसाद और शिकंजी की दुकान है।
शशि के मुताबिक, पहाड़ में खेती से परिवार का खर्च चलाना मुश्किल था। कई बार जानवर खेती को नुकसान पहुंचा देते थे। ऐसे में वर्ष 2010 में उन्होंने एक छोटी झोपड़ी से चाय-नाश्ते और प्रसाद की दुकान शुरू की। कोरोना लॉकडाउन के दौरान उन्होंने दुकान में खुद टीन लगाई। धीरे-धीरे दुकान पहले की तुलना में बेहतर होती गई। दुकान में उन्होंने अपने भाई योगी आदित्यनाथ की तस्वीर भी लगा रखी है।
 बहन की तस्वीर देखकर भावुक हुए थे योगी
एक टीवी इंटरव्यू के दौरान जब योगी आदित्यनाथ के सामने उनकी बहन शशि की तस्वीर दिखाई गई थी, तो वह भी भावुक हो गए थे। उनकी आंखों में आंसू आ गए और कुछ देर तक वह बोल नहीं पाए। जब शशि से इस बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा था कि महाराज जी को इतना भावुक नहीं होना चाहिए। उनके मुताबिक, दुकान पर काम करना उनकी रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा है। छोटे गांव में बिना काम किए परिवार का खर्च चलाना आसान नहीं है।
त्योहारों पर फोन से होती है बातचीत
योगी के जीजा पूरन सिंह पायल ने परिवार की मुलाकातों के बारे में बताया था कि वर्ष 2019 में ऋषिकेश में योगी से मुलाकात हुई थी। यह मुलाकात करीब 10 मिनट की रही थी। इसके बाद परिवार की मुलाकातें काफी कम हो गईं। हालांकि, त्योहारों के दौरान शशि की योगी से फोन पर बातचीत हो जाती है। बताया गया था कि कई बार यह बातचीत सीधे नहीं, बल्कि योगी के पीए के माध्यम से होती है।
रक्षाबंधन पर भले ही लंबे समय से शशि के हाथों से भाई योगी की कलाई पर राखी न बंधी हो, लेकिन उनके मन में भाई के लिए स्नेह और बचपन की यादें आज भी मौजूद हैं। पहाड़ में अपनी छोटी सी दुकान चलाने वाली शशि और सार्वजनिक जीवन में व्यस्त योगी के बीच दूरी जरूर है, लेकिन भाई-बहन के रिश्ते की भावनात्मक डोर अब भी जुड़ी हुई है।
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