नई दिल्ली: हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले की सुंदरनगर फैमिली कोर्ट ने एक तलाक याचिका पर अहम फैसला सुनाया है। गंभीर बीमारी के कारण पति का पैर कटने के बाद पत्नी ने तलाक की मांग की थी। अदालत ने आरोपों को साबित न किए जाने पर याचिका खारिज कर दी और पत्नी पर लागत भी लगाई।*

पत्नी ने पति पर लगाए थे क्रूरता और परित्याग के आरोप
मामला हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले स्थित सुंदरनगर का है। जानकारी के मुताबिक, बीबीएमबी क्वार्टर निवासी मीना कुमारी ने अपने पति पारगी निवासी ललित कुमार से तलाक लेने के लिए फैमिली कोर्ट में याचिका दाखिल की थी। पत्नी ने हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 13 (1) (ia) और (ib) का हवाला देते हुए पति पर मानसिक और शारीरिक क्रूरता के साथ-साथ परित्याग का आरोप लगाया था।
पत्नी का दावा था कि पति ने उसे वर्ष 2014 से छोड़ रखा है और दोनों अलग-अलग रह रहे हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर उसने अदालत से विवाह समाप्त करने की मांग की थी। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों ने इन दावों पर सवाल खड़े कर दिए।
जिरह में सामने आई अलग तस्वीर
अदालत में हुई जिरह के दौरान पत्नी ने खुद स्वीकार किया कि वह और उसका पति वर्ष 2014 से 2023 तक सुंदरनगर के जवाहर पार्क स्थित एक किराये के मकान में साथ रह रहे थे। इस बयान के बाद वर्ष 2014 से पति द्वारा उसे छोड़ दिए जाने का आरोप अदालत के सामने टिक नहीं सका।
मामले में यह भी सामने आया कि ललित कुमार गंभीर बीमारी से पीड़ित हुए थे और उनकी टांग काटनी पड़ी थी। इसके बाद उनकी शारीरिक स्थिति काफी कमजोर हो गई और उन्हें चलने-फिरने में परेशानी होने लगी। अदालत में पत्नी ने यह भी स्वीकार किया कि पति का पैर कटने के बाद वह उनसे एक बार भी मिलने नहीं गई।
अदालत ने आरोप साबित न होने पर खारिज की याचिका
मामले की सुनवाई के बाद अतिरिक्त प्रधान न्यायाधीश, फैमिली कोर्ट सुंदरनगर ने माना कि पत्नी अपने पति पर लगाए गए क्रूरता और परित्याग के आरोपों को साबित करने में सफल नहीं रही। अदालत ने कहा कि याचिका में लगाए गए आरोपों के समर्थन में पर्याप्त आधार सामने नहीं आया। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि कठिन परिस्थितियों में जीवनसाथी को सहयोग और सहारा देने के बजाय उसे बोझ समझकर अलग होने की कोशिश को इस मामले के तथ्यों के आधार पर तलाक का वैध आधार नहीं माना जा सकता। कोर्ट के मुताबिक, याचिकाकर्ता पत्नी अपने दावों को प्रमाणित करने में विफल रही।
पत्नी पर लागत भी लगाई गई
फैमिली कोर्ट ने तलाक की याचिका को खारिज करने के साथ पत्नी पर लागत भी लगाई। अदालत ने मामले में उपलब्ध तथ्यों और जिरह के दौरान सामने आए बयानों को महत्वपूर्ण माना। खास तौर पर साथ रहने से जुड़े बयान ने परित्याग के आरोप को कमजोर कर दिया।
यह फैसला ऐसे समय में सामने आया है, जब वैवाहिक विवादों में मानसिक और शारीरिक क्रूरता तथा परित्याग जैसे आधारों पर तलाक की मांग के मामले अदालतों में पहुंचते रहते हैं। इस मामले में अदालत ने केवल आरोपों के आधार पर राहत देने के बजाय सुनवाई के दौरान सामने आए तथ्यों और बयानों को महत्व दिया।
इस फैसले में अदालत ने स्पष्ट किया कि तलाक की मांग के लिए लगाए गए कानूनी आधारों को संबंधित पक्ष को अदालत के सामने साबित भी करना होता है। सुंदरनगर फैमिली कोर्ट का यह आदेश इसी वजह से चर्चा में है।
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