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नई दिल्ली: भारत में मांस की खपत और उत्पादन को लेकर अलग-अलग राज्यों में काफी अंतर देखने को मिलता है। खानपान की आदतें और स्थानीय फूड कल्चर अलग होने के कारण मांस के इस्तेमाल का तरीका भी अलग-अलग रहता है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, 2024-25 में भारत में प्रति व्यक्ति मांस की सालाना उपलब्धता 7.51 किलो रही।

अगर इस आंकड़े को साल के 365 दिनों में बांटा जाए तो यह करीब 20.6 ग्राम प्रति व्यक्ति प्रतिदिन बैठता है। हालांकि, इस आंकड़े को देश के हर व्यक्ति की वास्तविक रोजाना खपत नहीं माना जा सकता। यह आंकड़ा मांस की औसत उपलब्धता को दर्शाता है। इसका मतलब यह नहीं है कि भारत में हर व्यक्ति रोजाना 20.6 ग्राम मांस खाता है। कुछ लोग मांस का ज्यादा सेवन करते हैं, कुछ लोग कम खाते हैं, जबकि कई लोग मांस नहीं खाते हैं।
2024-25 में 10.50 मिलियन टन मांस का उत्पादन
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2024-25 में भारत में कुल करीब 10.50 मिलियन टन मांस का उत्पादन हुआ। इसमें पोल्ट्री मीट की हिस्सेदारी सबसे बड़ी रही। इसके अलावा भैंस, बकरी, भेड़ और सुअर के मांस का भी कुल उत्पादन में योगदान रहा।
देश में मांस उत्पादन में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसके पीछे बढ़ती मांग के साथ पोल्ट्री और अन्य पशुपालन से जुड़े कारोबार का विस्तार भी एक कारण माना जाता है। भारत में अलग-अलग राज्यों में मांस उत्पादन की स्थिति भी एक जैसी नहीं है। कुछ राज्यों में उत्पादन काफी ज्यादा है, जबकि कई राज्यों में इसका स्तर तुलनात्मक रूप से कम है।
पश्चिम बंगाल मांस उत्पादन में सबसे आगे
केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी विभाग के *Basic Animal Husbandry Statistics 2025* के अनुसार, 2024-25 में कुल मांस उत्पादन के मामले में पश्चिम बंगाल देश में सबसे आगे रहा।
कुल मांस उत्पादन में पश्चिम बंगाल की हिस्सेदारी *12.46 प्रतिशत* रही। इसके बाद उत्तर प्रदेश का स्थान रहा, जिसकी हिस्सेदारी *12.20 प्रतिशत* थी। मांस उत्पादन में टॉप पांच राज्यों की बात करें तो पश्चिम बंगाल और उत्तर प्रदेश के बाद महाराष्ट्र की हिस्सेदारी *11.57 प्रतिशत, आंध्र प्रदेश की **10.84 प्रतिशत* और तेलंगाना की *10.49 प्रतिशत* रही।
इस तरह इन पांच राज्यों ने मिलकर देश के कुल मांस उत्पादन में 57.55 प्रतिशत योगदान दिया।
मांस उत्पादन में टॉप 5 राज्य
1. पश्चिम बंगाल — 12.46%
2. उत्तर प्रदेश — 12.20%
3. महाराष्ट्र — 11.57%
4. आंध्र प्रदेश — 10.84%
5. तेलंगाना — 10.49%
उत्पादन और खपत को एक जैसा नहीं मानना चाहिए
मांस से जुड़े आंकड़ों को समझते समय उत्पादन और खपत के बीच अंतर को ध्यान में रखना जरूरी है। किसी राज्य में मांस का उत्पादन ज्यादा होने का यह मतलब नहीं है कि वहां के लोग ही सबसे ज्यादा मांस खाते हैं।
राज्यों में उत्पादित मांस दूसरे राज्यों में भी भेजा जाता है। इसलिए उत्पादन का आंकड़ा किसी राज्य के लोगों की वास्तविक खपत को सीधे नहीं बताता। इसी तरह अलग-अलग राज्यों में खानपान की परंपराएं भी अलग हैं। नगालैंड, मेघालय, केरल, असम, गोवा, त्रिपुरा, मणिपुर, मिजोरम और अरुणाचल प्रदेश जैसे राज्यों में मांस और मछली से जुड़े पारंपरिक व्यंजन लोकप्रिय हैं।
इसलिए अगर सवाल *मांस उत्पादन* का है, तो 2024-25 के आंकड़ों के अनुसार पश्चिम बंगाल सबसे आगे रहा। वहीं अगर सवाल यह हो कि *किस राज्य में प्रति व्यक्ति सबसे ज्यादा मांस खाया जाता है*, तो उसके लिए अलग तरह के खपत संबंधी आंकड़ों की जरूरत होगी।
इस लिहाज से भारत में प्रति व्यक्ति 7.51 किलो सालाना मांस उपलब्धता को सीधे रोजाना की वास्तविक खपत नहीं कहा जा सकता। यह देश में मांस की औसत उपलब्धता का आंकड़ा है।
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