पुल न बना तो ग्रामीण खुद बन गए मिस्त्री

Update: 2026-07-03 12:16 GMT
Patlikuhal. पतलीकूहल। वर्ष 2025 की आपदा में क्षतिग्रस्त कशेरी गांव का एकमात्र पुल डेढ़ साल बाद भी नहीं बना। मानसून शुरू होते ही ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। गत रात भारी बारिश से नाले का बहाव तेज हुआ और ग्रामीणों का बनाया वैकल्पिक रास्ता फिर बह गया। इसके बाद गांव वालों ने मिलकर दोबारा अस्थायी पुल तैयार किया, ताकि संपर्क न टूटे। ग्रामीणों ने लोक निर्माण विभाग, लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह, मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू और स्थानीय विधायक से कई बार स्थायी पुल बनाने की मांग की, लेकिन निर्माण शुरू नहीं हुआ। ग्रामीण ईश्वर ठाकुर, हुक्म राम और रतन ने बताया कि हाल ही में पीडब्ल्यूडी के जेई ने
भरोसा दिया था।


विभागीय अपार्टमेंट के पास गड्ढा भरते ही दो दिन में तकनीकी टीम पुल का काम शुरू कर देगी। ग्रामीणों के मुताबिक, पिछले सोमवार को मशीनें और टिपर मौके पर पहुंचे भी थे, लेकिन दो दिन काम करने के बाद वापस चले गए। उसके बाद से निर्माण स्थल पर कोई काम नहीं हुआ। ग्रामीणों का आरोप है कि देरी संसाधनों की नहींए बल्कि विभागों में तालमेल की कमी से हो रही है। स्कूली बच्चों, बुजुर्गों, किसानों और मरीजों का आना.जाना जोखिम भरा हो गया है। बारिश में नाला उफान पर आने से गांव का संपर्क कभी भी कट सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि अस्थायी रास्ता अगली बारिश में फिर बह सकता है। पिछले साल जैसे हालात दोबारा बनने का डर है। वे पूछ रहे हैं कि हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन होगा।
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