दिल्ली: अमेरिका में वजन घटाने के लिए इस्तेमाल की जाने वाली दवा ओजेम्पिक की नकली खेप बेचने के आरोप में दो भारतीय नागरिकों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, दोनों आरोपी चीन से कम कीमत पर नकली ओजेम्पिक मंगाते थे और फिर उसे अमेरिका में डिस्ट्रीब्यूटर्स को बेचते थे। आरोपियों की पहचान स्वप्नदीप रॉय और विक्की रमनचा के रूप में हुई है। दोनों पर कुल छह आरोप लगाए गए हैं। इनमें तस्करी की साजिश, तस्करी और नकली दवा की बिक्री से जुड़े आरोप शामिल हैं। अलग-अलग आरोपों में दोष साबित होने पर दोनों को अधिकतम 71 साल तक की जेल हो सकती है।
नकली ओजेम्पिक की पैकिंग असली जैसी
जांच के दौरान सामने आया कि नकली दवा को इस तरह तैयार किया गया था कि पहली नजर में उसे असली ओजेम्पिक से अलग करना मुश्किल हो। नकली दवा के बॉक्स, दवा से जुड़ी जानकारी वाली पर्ची और इंजेक्शन पेन के लेबल को असली उत्पाद जैसा बनाया गया था। यहां तक कि इसके साथ दी जाने वाली सुई भी असली दवा जैसी थी। अमेरिकी अधिकारियों के आरोप के मुताबिक, इस तरह की पैकिंग का उद्देश्य खरीदारों को यह विश्वास दिलाना था कि वे कंपनी की असली दवा खरीद रहे हैं और उन्हें नकली उत्पाद के बारे में पता न चले। अमेरिकी फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन यानी FDA ने ओजेम्पिक को साल 2017 में टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए मंजूरी दी थी।
2023 में FDA ने नकली ओजेम्पिक को लेकर चेताया था
अमेरिकी दवा नियामक FDA ने दिसंबर 2023 में नकली ओजेम्पिक की कुछ खेप पकड़ी थी। इसके बाद लोगों को इस तरह की नकली दवा से सावधान रहने की चेतावनी दी गई थी।
अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि इसके बावजूद स्वप्नदीप रॉय और विक्की रमनचा नकली दवा की बिक्री से जुड़े रहे।
रॉय के खिलाफ इंटरपोल का रेड नोटिस भी जारी किया गया था। अधिकारियों के मुताबिक, उसे इटली में गिरफ्तार किया गया। इसके बाद अमेरिका ने इटली से उसके प्रत्यर्पण की मांग की।
मंगलवार को रॉय को फ्लोरिडा के टैम्पा शहर की अदालत में पेश किया गया।
रॉय पर रेड नोटिस कैसे काम करता है?
स्वप्नदीप रॉय के खिलाफ जारी इंटरपोल रेड नोटिस का मतलब था कि इंटरपोल से जुड़े देशों को उसकी तलाश और संभावित गिरफ्तारी के लिए सूचना दी गई थी।
हालांकि, रेड नोटिस को अपने आप में किसी व्यक्ति की गिरफ्तारी का अंतरराष्ट्रीय वारंट नहीं माना जाता। इस मामले में रॉय की गिरफ्तारी इटली में हुई और बाद में अमेरिका ने उसके प्रत्यर्पण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, रॉय और रमनचा के खिलाफ कुल छह आरोप लगाए गए हैं। इनमें नकली दवा की तस्करी और उसे बेचने से संबंधित आरोप शामिल हैं।
अमेरिका नकली दवाओं पर कैसे रखता है नजर?
अमेरिका में नकली दवाओं को रोकने के लिए दवाओं की सप्लाई चेन पर निगरानी रखने की व्यवस्था है। दवा बनाने वाली कंपनी से लेकर थोक विक्रेता और मेडिकल स्टोर तक अलग-अलग स्तर पर लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था होती है।
कई दवाओं से जुड़ी जानकारी इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड में भी रखी जाती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिलती है कि दवा कहां तैयार हुई, किसके पास पहुंची और उसे किसने बेचा।
मेडिकल स्टोर को भी दवाओं की खरीद और बिक्री से संबंधित रिकॉर्ड रखना होता है। अगर किसी दवा के नकली होने का संदेह होता है तो उसे अलग करके उसकी जांच की जाती है। नकली पाए जाने पर FDA को इसकी जानकारी दी जाती है और बाजार से उत्पाद हटाने की कार्रवाई की जा सकती है।
ऑनलाइन बिक्री और तस्करी से पहुंचती हैं नकली दवाएं
निगरानी व्यवस्था के बावजूद नकली दवाएं कभी-कभी ऑनलाइन बिक्री, तस्करी या अवैध सप्लायरों के माध्यम से बाजार तक पहुंच जाती हैं। ऐसे मामलों में FDA और दूसरी अमेरिकी एजेंसियां जांच करती हैं।
इस मामले में भी अमेरिकी अधिकारियों का आरोप है कि दोनों आरोपियों ने नकली ओजेम्पिक को असली दवा जैसा तैयार करके अमेरिकी बाजार में पहुंचाया। अब मामले में लगाए गए आरोपों पर आगे की कानूनी कार्रवाई होगी और दोष साबित होने पर ही सजा तय होगी।
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