Bharat: संसद के मानसून सत्र से पहले प्रस्तावित परिसीमन विधेयक को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। विपक्षी दलों की ओर से जहां इस बिल को लेकर विरोध के संकेत दिए जा रहे हैं, वहीं कुछ नेताओं के बयानों से यह भी साफ हो रहा है कि अगर सरकार कुछ बदलाव करती है तो इस पर विचार किया जा सकता है। शिवसेना (यूबीटी) के राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी परिसीमन विधेयक को लेकर अपना रुख स्पष्ट करते हुए कहा है कि विपक्ष इसका विरोध करेगा, लेकिन सरकार द्वारा सुझाए गए संशोधनों को शामिल करने पर इस पर चर्चा की जा सकती है।
संजय राउत ने गुरुवार को नागपुर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान कहा कि परिसीमन विधेयक को लेकर विपक्षी दलों की अपनी चिंताएं हैं। उन्होंने कहा कि मौजूदा स्वरूप में विपक्ष इस बिल का विरोध करेगा, लेकिन अगर सरकार विपक्ष के सुझावों और जरूरी संशोधनों को स्वीकार करती है तो सभी दल बैठकर इस पर विचार कर सकते हैं।
राउत का यह बयान ऐसे समय आया है जब संसद का मानसून सत्र शुरू होने वाला है और सरकार परिसीमन से जुड़े बड़े संवैधानिक संशोधन विधेयक को पेश करने की तैयारी कर रही है। बताया जा रहा है कि सरकार संविधान (131वां संशोधन) विधेयक लाने पर विचार कर रही है, जिसमें लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने और परिसीमन प्रक्रिया शुरू करने का प्रस्ताव शामिल है।
परिसीमन का मुद्दा लंबे समय से राजनीतिक बहस का विषय रहा है। कई राज्यों को चिंता है कि जनसंख्या के आधार पर सीटों का पुनर्गठन होने से कुछ राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है, जबकि अधिक जनसंख्या वाले राज्यों को ज्यादा सीटें मिल सकती हैं। इसी वजह से कई विपक्षी दल इस मुद्दे पर सरकार से स्पष्टता और संतुलित व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।
इससे पहले राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की कार्यकारी अध्यक्ष सुप्रिया सुले ने भी परिसीमन विधेयक को लेकर बड़ा बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि अगर यह विधेयक सभी राज्यों में सीटों की संख्या में समान रूप से 50 प्रतिशत बढ़ोतरी के आधार पर लाया जाता है तो इसका विरोध करने का कोई खास कारण नहीं होगा।
सुप्रिया सुले के इस बयान के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज हो गई थी कि क्या विपक्ष इस मुद्दे पर सरकार के साथ आ सकता है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया था कि पार्टी का अंतिम फैसला विधेयक के प्रावधानों को देखने के बाद ही लिया जाएगा।
संजय राउत ने सुप्रिया सुले के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अभी यह तय नहीं है कि परिसीमन विधेयक संसद के इस सत्र में पेश किया जाएगा या नहीं। उन्होंने कहा कि जब बिल सामने आएगा, तब सभी विपक्षी दल मिलकर चर्चा करेंगे और आगे की रणनीति तय करेंगे।
उन्होंने विपक्षी एकता को लेकर चल रही चर्चाओं पर भी प्रतिक्रिया दी। राउत ने कहा कि विपक्षी दलों में टूट की खबरों का कोई आधार नहीं है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग यह माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं कि बहुमत साबित करने के लिए नेताओं को तोड़ा जाएगा, लेकिन ऐसी बातें वास्तविकता से दूर हैं।
सरकार की ओर से प्रस्तावित परिसीमन प्रक्रिया का उद्देश्य संसद में प्रतिनिधित्व को नए सिरे से व्यवस्थित करना बताया जा रहा है। अगर यह विधेयक आता है तो लोकसभा सीटों की संख्या बढ़ाने के साथ-साथ राजनीतिक समीकरणों में भी बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है।
फिलहाल परिसीमन विधेयक को लेकर सभी दलों की नजर संसद के मानसून सत्र पर है। सरकार जहां इसे आगे बढ़ाने की तैयारी में है, वहीं विपक्ष संशोधनों और राज्यों के हितों को लेकर अपनी मांगों पर कायम है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे पर संसद के अंदर और बाहर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।