नई दिल्ली: देशवासियों को नए साल में 3 नई एयरलाइंस का तोहफा मिलने वाला है. केंद्र सरकार ने देश में 3 नई एयरलाइंस को मंजूरी दी है. यानी अब इंडिगो, एयर इंडिया, स्पाइसजेट जैसी एयरलाइंस के अलावा हवाई यात्रा करने वाले करोड़ों लोगों के पास 3 नए ऑप्शन होंगे. कहा जा रहा है कि नई एयरलाइंस के आने के बाद एयरलाइंस की मनमानी पर ब्रेक लगेगा. 3 नई एयरलाइंस के आने से एविएशन सेक्टर में कंपटीशन बढ़ेगा और इसका फायदा आम लोगों को मिलेगा.
हाल में ही इंडिगो विमानन कंपनी की वजह से भारत के एविएशन सेक्टर में भूचाल आ गया था. अब सेक्टर में यात्रियों को और ज्यादा विकल्प देने और इंडिगो पर निर्भरता कम करने की कोशिश में केंद्र सरकार ने तीन नए एयरलाइंस को उड़ान शुरू करने की तैयारी के लिए नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) जारी कर दिया है. नागरिक उड्डयन मंत्रालय से शंख एयर, अल हिंद एयर और फ्लाईएक्सप्रेस को NOC मिल गया है.
भारत का एविएशन सेक्टर तेजी से बढ़ रहा है. इन तीन कंपनियों को यह मंजूरी ऐसे समय दी गई है, जब भारत में बस गिने-चुने कंपनियों पर विमानन बाज़ार अत्यधिक निर्भर हो गया है. मौजूदा समय में यह सेक्टर कुछ बड़ी एयरलाइनों के नियंत्रण में है जिनमें इंडिगो और एयर इंडिया समूह प्रमुख हैं.
ये एयरलाइंस मिलकर देश के घरेलू हवाई यात्रा के 90 फीसदी से अधिक हिस्से को नियंत्रित करती हैं, जिसमें अकेले इंडिगो का लगभग 65 फीसदी बाजार हिस्सा है. इस एकाधिकार के कारण, हाल ही में इंडिगो में तकनीकी और संचालन संबंधी व्यवधानों ने यात्रियों को प्रभावित किया, जिससे सेक्टर में वैकल्पिक एयरलाइनों की आवश्यकता और ज़ोर से महसूस की गई.
नई एयरलाइनों अल हिंद एयर, जो केरल आधारित अलहिंद ग्रुप द्वारा प्रोत्साहित है, फ्लाईएक्सप्रेस और शंख एयर, जो 2026 में उड़ान शुरू करने की योजना में है, भारतीय घरेलू उड़ान बाजार में कंपटीशन को बढ़ावा देंगी. हालांकि, इनके लिए अभी कई नियामक और परिचालन संबंधी प्रक्रियाओं को पूरा करना बाकी है.
सिविल एविएशन मंत्री के राम मोहन नायडू ने एक्स के माध्यम से इस मंजूरी की जानकारी दी और कहा कि सरकार की यह रणनीति है कि वह अधिक एयरलाइनों को प्रोत्साहित करे ताकि भारत की बढ़ती हवा यात्रा की मांग को पूरा किया जा सके. इसके साथ ही यूडीएएन योजना के तहत क्षेत्रीय विमान सेवाएं बढ़ाई गई हैं, जिससे छोटे शहरों को भी राष्ट्रीय विमान नेटवर्क से जोड़ा जा रहा है.
इस नई पहल से उम्मीद है कि घरेलू यात्रा के क्षेत्र में विकल्पों की संख्या बढ़ेगी और यात्रियों को बेहतर सेवाएं मिलेंगी, जिससे भारतीय एविएशन सेक्टर और अधिक मज़बूत होगा.
इंडिगो की उड़ानें रद्द होने का मामला
यह घोषणा ऐसे समय में हुई है जब हाल ही में इंडिगो एयरलाइंस को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा था. दिसंबर के पहले हफ्ते में इंडिगो की 4,000 से अधिक उड़ानें रद्द करनी पड़ी थीं. ये रद्दीकरण नए फ्लाइट ड्यूटी टाइम लिमिटेशन (FDTL) नियमों को लागू करने में आई दिक्कतों के कारण हुए थे.
एविएशन सेक्टर में मोनोपॉली तोड़ने की तैयारी
एविएशन इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि इससे भारतीय एविएशन सेक्टर में नई प्रतिस्पर्धा शुरू होगी. हालांकि, इन नई एयरलाइंस के सामने असली चुनौती अब शुरू होती है.उन्हें पूंजी जुटानी होगी, विमान बेड़े को तैयार करना होगा और मजबूत नेटवर्क खड़ा करना होगा, ताकि वे सही मायनों में उड़ान भर सकें.
जानकारों के मुताबिक, अगर ये एयरलाइंस सफल होती हैं, तो इसका सीधा फायदा यात्रियों को मिलेगा. टिकटों के ज्यादा विकल्प मिलेंगे और देश के अलग-अलग हिस्सों की एयर कनेक्टिविटी भी बेहतर होगी.
बड़ी कंपनियों पर निर्भरता कम करने के लिए फैसला
भारत का घरेलू एविएशन बाजार आज दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ने वाले बाजारों में शामिल है.सरकार का मानना है कि जितनी ज्यादा एयरलाइंस होंगी, उतनी ही ज्यादा उड़ानें और सीटें मिलेंगी. इससे देश के अलग-अलग हिस्सों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी और टिकट के दाम भी प्रतिस्पर्धा के कारण काबू में रहेंगे. इसी सोच के साथ सरकार नए खिलाड़ियों को मौका दे रही है, ताकि विमानन बाजार सिर्फ एक या दो बड़ी कंपनियों पर निर्भर न रहे और यात्रियों को ज्यादा विकल्प मिल सकें.
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