Raipur. रायपुर। दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे के रायपुर मंडल में अधोसंरचना विकास से जुड़े महत्वपूर्ण कार्य के चलते कई यात्री ट्रेनों का परिचालन प्रभावित रहेगा। रेलवे प्रशासन द्वारा भाटापारा-हथबंध स्टेशनों के बीच तीसरी लाइन सेक्शन में ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम की कमीशनिंग के लिए नॉन इंटरलॉकिंग (एनआई) कार्य किया जाएगा। इसके चलते 18 और 19 जुलाई 2026 को कई मेमू और पैसेंजर ट्रेनों को रद्द किया गया है, जबकि कुछ ट्रेनों को बीच रास्ते से ही समाप्त कर चलाया जाएगा। रेलवे अधिकारियों के अनुसार, यात्रियों की सुविधा और रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित एवं बेहतर बनाने के उद्देश्य से लगातार अधोसंरचना विकास के कार्य किए जा रहे हैं। इसी क्रम में भाटापारा-हथबंध रेल खंड में तीसरी लाइन पर ऑटो सिग्नलिंग कार्य किया जाएगा। इस तकनीकी कार्य के कारण कुछ ट्रेनों का संचालन प्रभावित रहेगा।
18 और 19 जुलाई को कई ट्रेनें रहेंगी रद्द
रेलवे द्वारा जारी जानकारी के मुताबिक, 19 जुलाई 2026 को गाड़ी संख्या 68728 रायपुर-बिलासपुर मेमू पैसेंजर, गाड़ी संख्या 68734 बिलासपुर-गेवरा रोड मेमू पैसेंजर और गाड़ी संख्या 68733 गेवरा रोड-बिलासपुर मेमू पैसेंजर का परिचालन रद्द रहेगा। इसके अलावा 18 और 19 जुलाई 2026 को गाड़ी संख्या 68719 बिलासपुर-रायपुर मेमू पैसेंजर, गाड़ी संख्या 58203 कोरबा-रायपुर पैसेंजर और गाड़ी संख्या 58204 रायपुर-कोरबा पैसेंजर भी रद्द रहेंगी। वहीं 18 जुलाई 2026 को गाड़ी संख्या 68746 रायपुर-गेवरा रोड मेमू पैसेंजर और 19 जुलाई 2026 को गाड़ी संख्या 68745 गेवरा रोड-रायपुर मेमू पैसेंजर का परिचालन नहीं होगा।
दो ट्रेनों का सफर रहेगा सीमित
रेलवे ने कुछ ट्रेनों को उनके निर्धारित गंतव्य तक नहीं चलाने का फैसला लिया है। गाड़ी संख्या 68861 गोंदिया-झारसुगुड़ा मेमू पैसेंजर, जो 18 और 19 जुलाई 2026 को गोंदिया से रवाना होगी, उसे बिलासपुर स्टेशन से प्रारंभ किया जाएगा। यह ट्रेन गोंदिया और बिलासपुर के बीच रद्द रहेगी। इसी तरह गाड़ी संख्या 68862 झारसुगुड़ा-गोंदिया मेमू पैसेंजर 18 और 19 जुलाई 2026 को बिलासपुर स्टेशन पर ही समाप्त कर दी जाएगी। यह ट्रेन बिलासपुर और गोंदिया के बीच संचालित नहीं होगी।
यात्रियों से रेलवे ने की अपील
रेलवे प्रशासन ने यात्रियों से अपील की है कि यात्रा करने से पहले अपनी ट्रेन की स्थिति की जानकारी अवश्य प्राप्त कर लें। एनआई कार्य पूरा होने के बाद ट्रेनों का परिचालन सामान्य रूप से शुरू किया जाएगा। रेलवे का कहना है कि ऑटो सिग्नलिंग सिस्टम लागू होने से रेल परिचालन की क्षमता बढ़ेगी और ट्रेनों की आवाजाही अधिक सुरक्षित व सुचारू हो सकेगी। अधोसंरचना से जुड़े ऐसे कार्य भविष्य में बेहतर यात्री सुविधाओं और समयबद्ध ट्रेन संचालन में मददगार साबित होंगे।