कुकर्मी-कातिल को फांसी की सजा सुनाई गई

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Update: 2026-07-24 01:10 GMT

यूपी। बहराइच में बच्चे हुई हैवानियत के बाद हत्या के मामले में कोर्ट ने महज 14 दिन में फैसला सुना दिया। फास्ट ट्रैक कोर्ट के अपर सत्र न्यायाधीश, विशेष न्याधीश पॉक्सो अरविंद कुमार गौतम ने घटना को रेयर ऑफ रेयरेस्ट मानते हुए दोषी को सजा-ए-मौत सुनाई है। साथ ही दोषी पर एक लाख रुपये अर्थदंड भी लगाया गया है। वारदात बीती 12 मई 2026 को कैसरगंज थाने के मंझारा तौकली के मजरे दयालपुरवा की है।

कैसरगंज थाना क्षेत्र के मंझारा तौकली के मजरे दयालपुरवा निवासी सात वर्षीय बालक 12 मई 2026 की रात गांव में आई बारात के लिए चलाई जा रही फिल्म देख रहा था। इसी दौरान वह लापता हो गया। तलाश शुरू हुई तो अगले दिन उसका क्षत विक्षत शव गांव से कुछ दूर पड़ा मिला। विशेष जिला शासकीय अधिवक्ता पाक्सो संत प्रताप सिंह ने बताया कि बच्चे के पिता की तहरीर पर पुलिस ने दयालपुरवा निवासी मुकेश निषाद (21) पुत्र सुमिरन निषाद को नामजद कर हत्या और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में मुकदमा दर्ज किया। अगले ही दिन मंझारा तौकली के मजरे खाधी रघौली से आरोपी को गिरफ्तार कर हत्या में इस्तेमाल गंड़ासा, खून सने कपड़े बरामद कर लिए गए। पुलिस ने मामले की गंभीरता देखकर हुए डीएनए जांच कराई, जिसमें बच्चे से कुकर्म के बाद हत्या की पुष्टि हुई। विशेष लोक अभियोजक पॉक्सो संतोष सिंह ने बताया कि पुलिस ने त्वरित विवेचना कर कोर्ट में 20 जून को मुकेश निषाद के विरुद्ध चार्जशीट दाखिल की। 22 जून को आरोप तय कर त्वरित गति से सुनवाई कर सबूतों का परीक्षण किया गया। गुरुवार को अदालत ने मुकेश निषाद को हत्या और पॉक्सो एक्ट के तहत दोष करार देते हुए फांसी और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माने की आधी रकम पीड़ित पिता को दिए जाने का आदेश दिया। फैसले की प्रति हाईकोर्ट को भी भेजी गई है।

विशेष शासकीय अधिवक्ता पॉक्सो संत प्रताप सिंह ने बताया, यह केस बेहद संवेदनशील था। अदालत ने इसे रेयर ऑफ रेयरेस्ट माना। इसके पीछे वैज्ञानिक और अन्य सबूत मजबूती से पेश किए। चुस्त पैरवी से कोर्ट ने भी इसे अत्यंत बर्बरतापूर्ण कृत्य माना। केवल 14 कार्य दिवस में फैसले से अपराधियों में खौफ पैदा होगा।

पॉक्सो विशेष लोक अभियोजक संतोष कुमार सिंह ने बताया, सात वर्षीय बालक से कुकर्म के बाद जिस तरह नृशंसता से हत्या की गई, वह दुलर्भ था। कोर्ट ने इसका त्वरित संज्ञान लिया और 14 कार्य दिवस में फैसला आ गया। ऐसे न्याय से पीड़ित को राहत मिलेगी और अपराधियों को चोट लगेगी।


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