सिंथेटिक ड्रग फैक्ट्री का भंडाफोड़, मालिक समेत तीन आरोपी गिरफ्त में
तीन दिनों तक चला ऑपरेशन.
भोपाल: केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) ने मध्य प्रदेश में नशीले पदार्थों के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। तीन दिनों तक चले इस ऑपरेशन में इंदौर जिले की महू तहसील के थवलाय गांव में एक गुप्त फैक्ट्री का पता लगाया गया, जहां सिंथेटिक ड्रग मेथामफेटामाइन (एमडी) बनाई जा रही थी।
यह सब 13 फरवरी की रात शुरू हुआ। सीबीएन की नीमच शाखा को सूचना मिली कि मंदसौर से एक बस में बड़ी मात्रा में एमडी ले जाया जा रहा है। तुरंत टीम बनाई गई और मंदसौर पुलिस को फोन पर अलर्ट किया गया। पुलिस ने बस रोक ली। टीम पहुंचने पर एनडीपीएस एक्ट के तहत तलाशी ली गई।
एक यात्री के पास संदिग्ध बॉक्स मिला, जिसमें उसने एमडी होने की बात मानी। पूछताछ में उसका साथी भी सामने आया और उसकी सीट के नीचे से दूसरा बॉक्स बरामद हुआ। दोनों बॉक्स में कुल 8.172 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली क्रिस्टल एमडी (मेथामफेटामाइन) मिली, जो पांच पॉलीथीन पैकेट में पैक थी। दोनों आरोपियों ने ड्रग अपने पास रखने की बात कबूल की। पूछताछ से पता चला कि यह ड्रग एक गुप्त फैक्ट्री से ली गई थी।
इस खुलासे पर सीबीएन ने नीमच, मंदसौर, जावरा और उज्जैन शाखाओं की संयुक्त टीम बनाई। आधी रात से सर्च शुरू हुआ। 14 फरवरी की सुबह थवलाय गांव में एक मकान की पहचान हुई, जहां लोहे का गेट और दो ताड़ के पेड़ थे। अंदर तेज केमिकल की गंध और धुआं था, इसलिए स्वास्थ्य जोखिम के कारण पहले प्रवेश रोका गया। नीमच से व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) वाली विशेष टीम बुलाई गई।
फैक्ट्री में आधुनिक मशीनरी और प्लांट लगे थे। इसे खोलने के लिए तकनीकी विशेषज्ञों की जरूरत पड़ी, इसलिए नीमच के सरकारी अफीम एवं क्षार कार्यालय (जीओएडब्ल्यू) से मदद मांगी गई। चार सदस्यीय इंजीनियर और रसायनज्ञ टीम 15 फरवरी की आधी रात पहुंची। मशीनरी और प्लांट खोलकर जब्त किया गया। कार्रवाई 15 फरवरी की सुबह पूरी हुई।
फैक्ट्री से 43.820 किलोग्राम उच्च गुणवत्ता वाली एमडी, 260 किलोग्राम से ज्यादा पूर्ववर्ती केमिकल और उन्नत उपकरण बरामद हुए। सारी सामग्री नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस एक्ट, 1985 के तहत जब्त की गई।
मंदसौर के बीपीएल चौराहे पर पकड़े गए दो आरोपियों पर एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया। फैक्ट्री चलाने वाले मकान मालिक को भी हिरासत में लिया गया। सीबीएन ने कहा कि यह राज्य में सिंथेटिक ड्रग लैब का अब तक का सबसे बड़ा भंडाफोड़ है। कम समय और सीमित सुराग के बावजूद टीमों के समन्वय, समर्पण और जीओएडब्ल्यू के तकनीकी सहयोग से सफलता मिली। बड़े नेटवर्क की जांच जारी है।