Hospice. धर्मशाला। हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिला के चामुंडा स्थित डाढ़ गांव से शुक्रवार को एक ऐसा सैन्य युग विदा हो गया, जिसकी मिसाल भारतीय सेना के इतिहास में शायद ही कहीं और मिले। भारत के 14वें थल सेना प्रमुख (चीफ ऑफ आर्मी स्टाफ) के निधन के साथ ही एक ऐसे जीवन का अंत हो गया है, जो न केवल अपने आप में एक किंवदंती था, बल्कि एक ऐसे परिवार का अटूट हिस्सा था जिसने अपना सर्वस्व मातृभूमि पर न्योछावर कर दिया। यह खबर सिर्फ एक सैन्य दिग्गज के निधन की नहीं, बल्कि एक ऐसे खानदान के त्याग और समर्पण को नमन करने की है, जिसका हर सदस्य भारतीय सेना के गौरव का जीवंत प्रतीक रहा है। दिवंगत सैन्य अधिकारी, भारत के पहले परमवीर चक्र विजेता, अदम्य साहसी मेजर सोमनाथ शर्मा के सबसे छोटे भाई थे। उनके पिता, मेजर जनरल अमर नाथ शर्मा ने डायरेक्टर मेडिकल सर्विसेज के रूप में अपनी सेवाएं दी थीं।
उनके देशप्रेम की गहराई का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जब उन्हें विश्व स्वास्थ्य संगठन डब्लयूएचओ के महानिदेशक जैसे बेहद प्रतिष्ठित वैश्विक पद की पेशकश की गई, तो उन्होंने अपनी माटी और देश की सेवा को सर्वोपरि मानते हुए उसे विनम्रता से ठुकरा दिया। परिवार के सबसे बड़े भाई लेफ्टिनेंट जनरल सुरिंदर नाथ शर्मा (103 वर्ष) ने सेना में इंजीनियर-इन-चीफ के रूप में भूमिका निभाई। देश सेवा का यह जज्बा यहीं नहीं रुका, उनकी बहन ने भी आर्मी मेडिकल कोर में ब्रिगेडियर के पद पर देश की सेवा की, जिनका विवाह मेजर जनरल तिवारी से हुआ था। कांगड़ा के डाढ़ गांव की मिट्टी के इस लाल के निधन से पूरा प्रदेश और सैन्य जगत शोकाकुल है। यह परिवार हमेशा सेना की गौरवशाली परंपरा और अदम्य साहस का पर्याय बना रहेगा। एक महान, देशभक्त और नेक आत्मा को पूरे राष्ट्र का अंतिम सलाम।