Paonta Sahib. पांवटा साहिब। सरकार खेलों को बढ़ावा तो दे रही है। लेकिन धरातल पर खिलाडिय़ों के लिए कोई सुविधाएं नहीं मिल पा रहीं हैं। पांवटा में एक मात्र नगर परिषद का खेल मैदान है जहां एक साथ सभी खेल खेले जाते हैं। इसके इलावा कोई भी धार्मिक आयोजन मेला व अन्य आयोजन भी इस मैदान में ही किए जाते हंै। जिसके चलते खिलाडिय़ों का आगे बढऩा मुश्किल हो गया है। हर चुनाव में पार्टियों का यहां एक खेल स्टेडियम बनाने का वादा किया जाता है पर चुनाव के बाद इस और ध्यान नहीं दिया जाता। बीजेपी के सांसद अनुराग ठाकुर ने कई साल पहले पांवटा में एक स्टेडियम बनाने की घोषणा भी की थी पर वह कोरी घोषणा ही रह गई। पांवटा खेल मैदान के अभाव में खिलाडिय़ों को आगे बढऩे का मौका नहीं मिल पा रहा है। कुछ बच्चे नेशनल स्तरीय खेलों में चुनकर शहर का नाम रोशन कर रहे हैं। राजनीति में दमखम दिखाकर लोगों के हितों की बात करने वाले नेता भी बच्चों के खेलों के विकास की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहे हें। प्रतिभाएं खेल मैदान के लिए तरस रहीं हैं। खेल प्रतिभाएं अपने आप में निखार नहीं ला पा रहीं हैं। खेल मैदान के अभाव में खिलाडिय़ों को आगे बढऩे का मौका नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्र में नगर परिषद का एक ही मैदान है।
जहां सुबह-शाम युवा अभ्यास कर रहे हैं। लेकिन यह मैदान भी किसी न किसी आयोजन में व्यस्त रहता है। जिसके कारण खिलाडिय़ों को अभ्यास के लीय कोई मैदान नहीं मिलता। खेल से जुड़े जानकारों का कहना है कि क्षेत्र में अनेक खेल प्रतिभाएं छुपी हुई हैं। उनको तलाश कर तराशने की जरूरत है। दुर्भाग्य से क्षेत्र में खेल सुविधाएं तो दूर की बात अभ्यास के लिए ढंग का मैदान नहीं है।पांवटा में सरकारी प्रतियोगिता के अलावा क्रिकेट, कबड्डी सहित यहां कई तरह की प्रतियोगिताएं स्वयं के स्तर पर आयोजित होती हैं। क्षेत्र में राज्य स्तरीय खिलाड़ी होने के बावजूद खेल मैदान नहीं होने का मलाल पूरे शहर के लोगों को है। स्थानीय युवाओं ने बताया कि पांवटा में खेल मैदान के अभाव में बच्चे और युवा एक छोटे से मैदान खेलने को मजबूर हैं। खेल मैदान के अभाव में क्षेत्र की प्रतिभाएं अब खेल से दूरी बनाने लगी हैं। पांवटा क्षेत्र की खेल प्रतिभाएं जिला और राज्य स्तर पर अपना लगातार परचम फहरा रही हैं। मगर खेल मैदान नहीं होने के कारण खिलाडिय़ों को अभ्यास करने में असुविधा होती है। प्रतिभाएं आगे नहीं बढ़ रही हैं। विशेष कर बालिकाओं को सुविधाओं के अभाव में घर पर रोकना मजबूरी बनी हुई है। जिला स्तर पर बालिकाओं के अभ्यास के लिए भेजना हर किसी भी परिवार के लिए परेशानी बनी हुई । बालिकाओं की प्रतिभा दम तोड़ती नजर आ रही है।